माँगकर सम्मान पाने का चलन देखा यहाँ maangakar sammaan paane kaa chalan dekhaa yahaan माँगकर सम्मान पाने का चलन देखा यहाँ
माँगकर
सम्मान पाने,
का चलन देखा यहाँ
मान
अपना खुद घटाने, का चलन देखा यहाँ...
किस
तरह साहिल बचाए, डूबते को कर पकड़
साहिलों
को ही डुबाने, का चलन देखा यहाँ
इस
तरह सिक्के उछलते, हारते हर बार अबल
इनका
हक उनको दिलाने का, चलन देखा यहाँ
खुश
किसी को देखकर, खुश ये ज़माना कब हुआ?
कंठ
खुशियों का दबाने, का चलन देखा यहाँ
पूछता
कोई नहीं, क्या ख्वाहिशें हैं बाग की
ख़ुशबुओं
पर हक़ जताने, का चलन देखा यहाँ
नित्य
नव परिधान में इक घोषणा सजती मगर
घोषणाओं
पर न जाने का, चलन देखा यहाँ
परिजनों के, प्रिय वतन के, लाख दिल तड़पा
करें
दूरियों
से दिल लगाने का, चलन देखा यहाँ
वर
दिये विज्ञान ने पर “कल्पना” क्या कीजिये
चाबियाँ
उलटी घुमाने का, चलन देखा यहाँ!
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
maangakar
sammaan paane,
kaa chalan dekhaa yahaan
maan
apanaa khud ghataane, kaa chalan dekhaa yahaan
kis
tarah saahil bachaae, doobate ko kar pakad
saahilon
ko hee dubaane, kaa chalan dekhaa yahaan
is
tarah sikke uchalate, haarate har baar abal
inakaa
hak unako dilaane kaa, chalan dekhaa yahaan
khush
kisee ko dekhakar, khush ye zamaanaa kab huaa?
kanth
khushiyon kaa dabaane, kaa chalan dekhaa yahaan
poochataa
koee naheen, kyaa khvaahishen hain baag kee
kushabuon
par haq jataane, kaa chalan dekhaa yahaan
nity
naw paridhaan men ik ghoshanaa sajatee magar
ghoshanaaon
par n jaane kaa, chalan dekhaa yahaan
parijanon ke, priy watan ke, laakh dil tadapaa
karen
dooriyon
se dil lagaane kaa, chalan dekhaa yahaan
war
diye wijnaan ne par “kalpanaa” kyaa keejiye
chaabiyaan
ulatee ghumaane kaa, chalan dekhaa yahaan!
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
माँगकर
सम्मान पाने,
का चलन देखा यहाँ
मान
अपना खुद घटाने, का चलन देखा यहाँ...
किस
तरह साहिल बचाए, डूबते को कर पकड़
साहिलों
को ही डुबाने, का चलन देखा यहाँ
इस
तरह सिक्के उछलते, हारते हर बार अबल
इनका
हक उनको दिलाने का, चलन देखा यहाँ
खुश
किसी को देखकर, खुश ये ज़माना कब हुआ?
कंठ
खुशियों का दबाने, का चलन देखा यहाँ
पूछता
कोई नहीं, क्या ख्वाहिशें हैं बाग की
ख़ुशबुओं
पर हक़ जताने, का चलन देखा यहाँ
नित्य
नव परिधान में इक घोषणा सजती मगर
घोषणाओं
पर न जाने का, चलन देखा यहाँ
परिजनों के, प्रिय वतन के, लाख दिल तड़पा
करें
दूरियों
से दिल लगाने का, चलन देखा यहाँ
वर
दिये विज्ञान ने पर “कल्पना” क्या कीजिये
चाबियाँ
उलटी घुमाने का, चलन देखा यहाँ!
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी