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कवयित्री · गीतकार · ग़ज़लगो poet · songwriter · ghazal-writer कवयित्री · गीतकार · ग़ज़लगो
६ जून १९५१ · २७ दिसम्बर २०२३ 6 June 1951 · 27 December 2023 ६ जून १९५१ · २७ दिसम्बर २०२३
गीत, ग़ज़ल, दोहा, कुण्डलिया और कहानी। सात पुस्तकें, छह सौ से अधिक रचनाएँ, और एक ऐसा स्वर जो उज्जैन की धरती से नवी मुंबई के क्षितिज तक जाकर भी कभी थका नहीं। Geet, ghazal, doha, kundaliya, and short story. Seven books, six hundred-plus writings, and a voice that travelled from the soil of Ujjain to the skyline of Navi Mumbai, and never tired. गीत, ग़ज़ल, दोहो, कुंडलिया ऐं कहाणी। सत किताबूं, छह सौ खां वधीक रचनाऊं, ऐं हिक एडी आवाज़ जा कडहिं न थकी।
मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी,
उम्र भर, साँसें रहेंगी जब तलक।
main ghazal kahti rahoongi,
umr bhar, saansein rahengi jab talak.
माँ ग़ज़ल चवंदी रहंदस,
उमिर भर, साह रहंदा जिते ताईं।
उन्हें प्रकाश प्रिय था। सूर्य की पहली किरण से लेकर क़लम की रौशनाई तक। She loved light. From the sun's first ray, to the gleam of ink on paper. हुनन खे प्रकाश पियारो हो। सूरज जी पहिरीं किरण खां क़लम जे रौशन ताईं।
आज की रचना Today's verse अजि जी रचना
ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल
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उनकी क़लम से From her pen उनहीं जी क़लम सां
तुमसे नज़रें मिलीं, मन मिलाना हुआ। tumase nazaren mileen, man milaanaa huaa तुमसे नज़रें मिलीं, मन मिलाना हुआ।
दिल की दुनिया पुनः बसाने, आओगे ना! dil kee duniyaa punah basaane, aaoge naa! दिल की दुनिया पुनः बसाने, आओगे ना!
बदले हो तुम, तो badale ho tum, to बदले हो तुम, तो
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पाठकreadersपढ़ंदड़
प्रतिलिपि पर, दिसम्बर २०२३ तक on Pratilipi, as of December 2023 प्रतिलिपिअ ते, दिसम्बर २०२३ ताईं
"साँसें थम भी जाएँ, शब्द कभी नहीं थमते।
वे रहती हैं, जैसे माँ की दुआ रहती है।" "Saansein tham bhi jaayein, shabd kabhi nahin thamte.
Wo rehti hain, jaise maa ki dua rehti hai." "साह बंद थी पवन, पर लफ़्ज़ कडहिं न बंद थी थिए।"
पोते की कलम से, रोहन from her grandson, Rohan पोते जी क़लम सां, रोहन