कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३१ / २०४ № 31 of 204 रचना ३१ / २०४
२९ जनवरी २०१४ 29 January 2014 २९ जनवरी २०१४

बदले हो तुम तो है क्या... badale ho tum to hai kyaa बदले हो तुम तो है क्या...

बदले हो तुम, तो

है क्या, मैं भी बदल जाऊँगी।

दायरा तोड़ कहीं और निकल जाऊँगी।

एक चट्टान हूँ मैं,

मोम नहीं याद रहे।

जो छुअन भर से तुम्हारी,

ही पिघल जाऊँगी।

जब बिना बात के नाराज़ हो दरका दर्पण।

मेरा चेहरा है वही, क्यों मैं दहल जाऊँगी?

मैं तो बेफिक्र थी, मासूम

सा दिल देके तुम्हें।

क्या खबर थी कि मैं यूँ, खुद

को ही छल जाऊँगी।

वक्त पर होश मुझे आ गया अच्छा ये हुआ।

ठोकरें खा के मुहब्बत में सँभल जाऊँगी।

दर अगर बंद हुआ एक,

तो हैं और अनेक।

चलते-चलते ही नए दौर में ढल जाऊँगी।

किसी गफलत में न रहना,

कि अकेली हूँ सुनो।

साथ मैं एक सखी लेके गज़ल जाऊँगी।

जो मुझे आज तलक,

तुमने दिये हैं तोहफे।

वे तुम्हारे ही लिए छोड़ सकल जाऊँगी।

‘कल्पना’ सोच

के रक्खा है जिगर पर पत्थर।

पी के इक बार जुदाई का गरल जाऊँगी।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

badale ho tum, to

hai kyaa, main bhee badal jaaoongee

·

daayaraa tod kaheen aur nikal jaaoongee

·

ek chattaan hoon main,

mom naheen yaad rahe

·

jo chuan bhar se tumhaaree,

hee pighal jaaoongee

·

jab binaa baat ke naaraaz ho darakaa darpan

·

meraa cheharaa hai wahee, kyon main dahal jaaoongee?

·

main to bephikr thee, maasoom

saa dil deke tumhen

·

kyaa khabar thee ki main yoon, khud

ko hee chal jaaoongee

·

wakt par hosh mujhe aa gayaa achchaa ye huaa

·

thokaren khaa ke muhabbat men sanbhal jaaoongee

·

dar agar band huaa ek,

to hain aur anek

·

chalate-chalate hee nae daur men dhal jaaoongee

·

kisee gaphalat men n rahanaa,

ki akelee hoon suno

·

saath main ek sakhee leke gazal jaaoongee

·

jo mujhe aaj talak,

tumane diye hain tohaphe

·

we tumhaare hee lie chod sakal jaaoongee

·

‘kalpanaa’ soch

ke rakkhaa hai jigar par patthar

·

pee ke ik baar judaaee kaa garal jaaoongee

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

बदले हो तुम, तो

है क्या, मैं भी बदल जाऊँगी।

दायरा तोड़ कहीं और निकल जाऊँगी।

एक चट्टान हूँ मैं,

मोम नहीं याद रहे।

जो छुअन भर से तुम्हारी,

ही पिघल जाऊँगी।

जब बिना बात के नाराज़ हो दरका दर्पण।

मेरा चेहरा है वही, क्यों मैं दहल जाऊँगी?

मैं तो बेफिक्र थी, मासूम

सा दिल देके तुम्हें।

क्या खबर थी कि मैं यूँ, खुद

को ही छल जाऊँगी।

वक्त पर होश मुझे आ गया अच्छा ये हुआ।

ठोकरें खा के मुहब्बत में सँभल जाऊँगी।

दर अगर बंद हुआ एक,

तो हैं और अनेक।

चलते-चलते ही नए दौर में ढल जाऊँगी।

किसी गफलत में न रहना,

कि अकेली हूँ सुनो।

साथ मैं एक सखी लेके गज़ल जाऊँगी।

जो मुझे आज तलक,

तुमने दिये हैं तोहफे।

वे तुम्हारे ही लिए छोड़ सकल जाऊँगी।

‘कल्पना’ सोच

के रक्खा है जिगर पर पत्थर।

पी के इक बार जुदाई का गरल जाऊँगी।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗