जब भी जन्म लो, "कल्पना" ही जन्म लो — और फिर मुझे ही जन्मो। Whenever you take birth, take birth as "Kalpana" again — and birth me, again. जदहिं भी जन्म वठो, "कल्पना" ई जन्म वठो — ऐं पोइ मूंखे ई जन्म डियो।
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सीधा-सरल — हिन्दी सा जीवन। ईश्वर का चमत्कार, गुणों की खदान — ने जन्म लिया।
स्वयं सीखती, स्वयं बुनती — कभी सपने, कभी स्वेटर। सलाइयाँ हमेशा हाथों में होतीं।
हर दिन बुनती, हर रंग बुनती। वो जादुई सलाइयाँ — कभी खुरपी बन मिट्टी गुड़ाई करतीं, बेल बन जातीं — लौकी, तोरई, बैंगन, करेला। कभी जादुई सलाइयाँ बुन लेतीं उन बेलों में — सुंदर फ्रॉक, पीछे बेल्ट, बाहों में फ्रिल।
"नन्ही चिड़िया, नन्ही आशा" — कंप्यूटर की सीट की पेटी बाँधकर उड़ा ले गई सरल हिन्दी को आसमानों में। सबने कहा — कौन पायलट उड़ा रहा है? कोई होनहार ही होगा। है भी।
ख़ूब उड़ी। मस्त हवाओं को मोड़, उन "हौसलों के पंख" से अपनी उड़ान चुनी। सभी अचंभित, सभी विस्मित!
कोई चमत्कार सी। दुआओं सी। अलसुबह सफ़ेद सी। भोला बच्चा-मन सी। सबकी ख़ुशियों की कामना सी। हर इबादत क़बूल सी।
अपनी माँ की वो कर्मठ बाली। पिता की सबसे होनहार, पुरस्कृत संतान। भाइयों के लिए फिर माँ सी। बहनों में उनका शृंगार सी। भाभियों के लिए — दुख उनका भी अपना कर सी।
सारी विधाओं को सहेली बना — कभी तैरतीं, कभी पढ़तीं, कभी ऐनक लगा कंप्यूटर युग को जीतीं, तो कभी रसोई के राज़ बतातीं।
वो जहाँ होतीं, पत्तियाँ हरी हो जातीं। सब नाती-पोते फलदार हो जाते।
अब!!!
सबको लगा — उड़ान भरी है, कभी तो नीचे आना होगा। पर चमत्कार जन्म लेते हैं तो — हौसले नीचे नहीं आते।
एक-एक पंख हर एक के हिस्से में आया, अपनी विरासत में — छोटे-बड़े, सबके मन में वो पंख हौसला बन उग आया।
वो हौसले, वो विरासत के पंख — आशीर्वाद बन, दुआओं की हवाओं में, फिर-फिर, आसमान जीत रहे...
अब तो "खेतों ने भी ख़त लिखा" है।
जब भी जन्म लो, "कल्पना" ही जन्म लो — और फिर मुझे ही जन्मो। ❤️
माँ मेरी थी, पर सबके लिए भी माँ थी! इतनी कितनी माँ थी तू — सबको मिली माँ सी। मेरी फिर भी थोड़ी ज़्यादा माँ थी। बस ख़ुश हूँ बहुत मैं — मेरी ही तुम माँ थी। 💞
— आपकी "पल"
A life as simple, as plain — as Hindi itself. God's miracle, a mine of virtues — was born.
She taught herself, she knit herself — sometimes dreams, sometimes sweaters. The needles were always in her hands.
Every day she knit, every colour she knit. Those magical needles — sometimes turned trowel and tilled the soil, became vines — bottle gourd, ridge gourd, brinjal, bitter gourd. Sometimes the magical needles knit, into those vines — beautiful frocks, a belt at the back, frills on the sleeves.
"Little bird, little hope" — she buckled the seatbelt of the computer and lifted simple Hindi into the skies. Everyone said — who is the pilot flying this plane? Must be some prodigy. She was, too.
She flew far. Turning the wild winds, she chose her flight with those "Wings of Courage" (Hauslon ke Pankh). All amazed, all astonished!
Like a miracle. Like a prayer. Like the white of early dawn. Like the innocent mind of a child. Like a wish for everyone's happiness. Like every prayer, accepted.
Her mother's hard-working "Baali". Her father's most promising, most awarded child. For her brothers — a mother all over again. Among her sisters — their adornment. For her sisters-in-law — making their sorrow her own.
Befriending every form — sometimes swimming, sometimes reading, sometimes putting on glasses and conquering the computer age, sometimes telling the secrets of the kitchen.
Wherever she was — the leaves turned green. Every grandchild bore fruit.
Now!!!
Everyone thought — she has flown, surely she must come down sometime. But when miracles take birth — courage doesn't come down.
One feather each fell to each of us — in her legacy. Small and big, in everyone's heart, that feather grew as courage.
That courage, that inheritance of feathers — became blessings, riding the winds of prayer, again and again, winning the sky...
Now even "The Fields Wrote a Letter" (Kheton ne Khat Likha).
Whenever you take birth — take birth as "Kalpana" again. And birth me, again. ❤️
She was my mother, but she was a mother to everyone too! How many mothers were you — everyone got a mother in you. And yet — you were a little more mine. I am only joyful — that you were MY mother. 💞
— Your Pal
✎ अनुवाद, समीक्षा बाक़ी
सिधो-साधो — हिन्दीअ जहड़ो जीवनु। ईश्वर जो चमत्कार, गुणन जी ख़ान — ने जन्म वठो।
पाण सिखंदी, पाण बुणंदी — कदहिं सुपिना, कदहिं स्वेटर। सलायूं हमेशा हथन में हुयूं।
हर डिंह बुणंदी, हर रंग बुणंदी। हो जादूई सलायूं — कदहिं खुरपी बणी मिट्टी गोडंदियूं, बेलूं बणी वंजंदियूं — लौकी, तोरई, बैंगन, करेला। कदहिं हो जादूई सलायूं उन बेलन में बुणी छडंदियूं — सूतियूं फ्रॉकूं, पुठियां ते बेल्ट, बांहन में फ्रिल।
"नंढड़ी चिड़ी, नंढड़ी आस" — कंप्यूटर जी सीट जी पटी बंधी सिधी हिन्दी खे आसमानन में उडाए वई। सभन चयो — कहड़ो पायलट उडाए रहियो आहे? कोई होनहार ई हूंदो। आहे भी।
बहु उडी। मस्त हवाऊं मोड़ी, उन "हौसलन जा पंख" खाते पनहीं उडान चुनी। सभु अचंभित, सभु विस्मित!
कोई चमत्कार जहड़ी। दुआऊं जहड़ी। अल-सुभह सफ़ेद जहड़ी। भोले बार जे मन जहड़ी। सभन जी ख़ुशी जी कामना जहड़ी। हर इबादत क़बूल जहड़ी।
पनहीं अम्मा जी हो कर्मठ "बाली"। बाबा जी सभ खां होनहार, ईनाम वारी अवलाद। भाउन लाई फेरि अम्मा जहड़ी। भीणन में हुनन जो शिंगार। भाभीयन लाई — हुनन जो डुख पनहीं कंदड़।
सभ विधाऊं खे सहेली बणाए — कदहिं तरंदी, कदहिं पढ़ंदी, कदहिं ऐनकूं चाढ़े कंप्यूटर युग खे जीतंदी, ते कदहिं रसोई जा राज़ ब्धाईंदी।
हू जत हुई, ओत पतियूं हरियूं थी वंजंदियूं। सभ नाती-पोता फलदार थी वंजंदा।
हाणे!!!
सभन खे लगो — उडान भरी आहे, कदहिं ते हेठ अचण कुडहंदो। पर चमत्कार जन्म वठंदा आहन त — हौसला हेठ न इंदा।
हिक-हिक पंख हर हिकु जे हिसे में आयो, पनहीं विरासत में — न्ंढा-वडा, सभन जे मन में हो पंख हौसलो बणी उभुरियो।
हो हौसला, हो विरासत जा पंख — आशीर्वाद बणी, दुआऊं जी हवा में, फेरि-फेरि, आसमान जीतंदा रहन...
हाणे ते "खेतन भी ख़त लिखियो" आहे।
जदहिं भी जन्म वठो — "कल्पना" ई जन्म वठो। ऐं पोइ मूंखे ई जन्म डियो। ❤️
हू मुहिंजी अम्मा हुई, पर सभन लाई भी अम्मा हुई! इतरियूं घणियूं अम्मियूं हुयूं तूं — सभन खे मिली अम्मा जहड़ी। मुहिंजी फेरि भी थोड़ी घणी अम्मा हुयीं। बसु आउं ख़ुश आहियां — मुहिंजी ई तूं अम्मा हुयीं। 💞
— अहां जी "पल"