कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३

प्रिय स्मृतियाँ In loving memory पियारी यादगिरियूं

श्रद्धांजलि Tributes श्रद्धांजलि

परिवार, मित्रों, संपादकों, और पाठकों के स्मरण। From family, friends, editors, and readers across the world. घर वारन, दोस्तन, एडिटरन ऐं पढ़ंदड़न जूं याद।

श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ०१ 01 ०१
जब भी जन्म लो, "कल्पना" ही जन्म लो — और फिर मुझे ही जन्मो। Whenever you take birth, take birth as "Kalpana" again — and birth me, again. जदहिं भी जन्म वठो, "कल्पना" ई जन्म वठो — ऐं पोइ मूंखे ई जन्म डियो।
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सीधा-सरल — हिन्दी सा जीवन। ईश्वर का चमत्कार, गुणों की खदान — ने जन्म लिया।

स्वयं सीखती, स्वयं बुनती — कभी सपने, कभी स्वेटर। सलाइयाँ हमेशा हाथों में होतीं।

हर दिन बुनती, हर रंग बुनती। वो जादुई सलाइयाँ — कभी खुरपी बन मिट्टी गुड़ाई करतीं, बेल बन जातीं — लौकी, तोरई, बैंगन, करेला। कभी जादुई सलाइयाँ बुन लेतीं उन बेलों में — सुंदर फ्रॉक, पीछे बेल्ट, बाहों में फ्रिल।

"नन्ही चिड़िया, नन्ही आशा" — कंप्यूटर की सीट की पेटी बाँधकर उड़ा ले गई सरल हिन्दी को आसमानों में। सबने कहा — कौन पायलट उड़ा रहा है? कोई होनहार ही होगा। है भी।

ख़ूब उड़ी। मस्त हवाओं को मोड़, उन "हौसलों के पंख" से अपनी उड़ान चुनी। सभी अचंभित, सभी विस्मित!

कोई चमत्कार सी। दुआओं सी। अलसुबह सफ़ेद सी। भोला बच्चा-मन सी। सबकी ख़ुशियों की कामना सी। हर इबादत क़बूल सी।

अपनी माँ की वो कर्मठ बाली। पिता की सबसे होनहार, पुरस्कृत संतान। भाइयों के लिए फिर माँ सी। बहनों में उनका शृंगार सी। भाभियों के लिए — दुख उनका भी अपना कर सी।

सारी विधाओं को सहेली बना — कभी तैरतीं, कभी पढ़तीं, कभी ऐनक लगा कंप्यूटर युग को जीतीं, तो कभी रसोई के राज़ बतातीं।

वो जहाँ होतीं, पत्तियाँ हरी हो जातीं। सब नाती-पोते फलदार हो जाते।

अब!!!

सबको लगा — उड़ान भरी है, कभी तो नीचे आना होगा। पर चमत्कार जन्म लेते हैं तो — हौसले नीचे नहीं आते।

एक-एक पंख हर एक के हिस्से में आया, अपनी विरासत में — छोटे-बड़े, सबके मन में वो पंख हौसला बन उग आया।

वो हौसले, वो विरासत के पंख — आशीर्वाद बन, दुआओं की हवाओं में, फिर-फिर, आसमान जीत रहे...

अब तो "खेतों ने भी ख़त लिखा" है।

जब भी जन्म लो, "कल्पना" ही जन्म लो — और फिर मुझे ही जन्मो। ❤️

माँ मेरी थी, पर सबके लिए भी माँ थी! इतनी कितनी माँ थी तू — सबको मिली माँ सी। मेरी फिर भी थोड़ी ज़्यादा माँ थी। बस ख़ुश हूँ बहुत मैं — मेरी ही तुम माँ थी। 💞

— आपकी "पल"

A life as simple, as plain — as Hindi itself. God's miracle, a mine of virtues — was born.

She taught herself, she knit herself — sometimes dreams, sometimes sweaters. The needles were always in her hands.

Every day she knit, every colour she knit. Those magical needles — sometimes turned trowel and tilled the soil, became vines — bottle gourd, ridge gourd, brinjal, bitter gourd. Sometimes the magical needles knit, into those vines — beautiful frocks, a belt at the back, frills on the sleeves.

"Little bird, little hope" — she buckled the seatbelt of the computer and lifted simple Hindi into the skies. Everyone said — who is the pilot flying this plane? Must be some prodigy. She was, too.

She flew far. Turning the wild winds, she chose her flight with those "Wings of Courage" (Hauslon ke Pankh). All amazed, all astonished!

Like a miracle. Like a prayer. Like the white of early dawn. Like the innocent mind of a child. Like a wish for everyone's happiness. Like every prayer, accepted.

Her mother's hard-working "Baali". Her father's most promising, most awarded child. For her brothers — a mother all over again. Among her sisters — their adornment. For her sisters-in-law — making their sorrow her own.

Befriending every form — sometimes swimming, sometimes reading, sometimes putting on glasses and conquering the computer age, sometimes telling the secrets of the kitchen.

Wherever she was — the leaves turned green. Every grandchild bore fruit.

Now!!!

Everyone thought — she has flown, surely she must come down sometime. But when miracles take birth — courage doesn't come down.

One feather each fell to each of us — in her legacy. Small and big, in everyone's heart, that feather grew as courage.

That courage, that inheritance of feathers — became blessings, riding the winds of prayer, again and again, winning the sky...

Now even "The Fields Wrote a Letter" (Kheton ne Khat Likha).

Whenever you take birth — take birth as "Kalpana" again. And birth me, again. ❤️

She was my mother, but she was a mother to everyone too! How many mothers were you — everyone got a mother in you. And yet — you were a little more mine. I am only joyful — that you were MY mother. 💞

— Your Pal

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

सिधो-साधो — हिन्दीअ जहड़ो जीवनु। ईश्वर जो चमत्कार, गुणन जी ख़ान — ने जन्म वठो।

पाण सिखंदी, पाण बुणंदी — कदहिं सुपिना, कदहिं स्वेटर। सलायूं हमेशा हथन में हुयूं।

हर डिंह बुणंदी, हर रंग बुणंदी। हो जादूई सलायूं — कदहिं खुरपी बणी मिट्टी गोडंदियूं, बेलूं बणी वंजंदियूं — लौकी, तोरई, बैंगन, करेला। कदहिं हो जादूई सलायूं उन बेलन में बुणी छडंदियूं — सूतियूं फ्रॉकूं, पुठियां ते बेल्ट, बांहन में फ्रिल।

"नंढड़ी चिड़ी, नंढड़ी आस" — कंप्यूटर जी सीट जी पटी बंधी सिधी हिन्दी खे आसमानन में उडाए वई। सभन चयो — कहड़ो पायलट उडाए रहियो आहे? कोई होनहार ई हूंदो। आहे भी।

बहु उडी। मस्त हवाऊं मोड़ी, उन "हौसलन जा पंख" खाते पनहीं उडान चुनी। सभु अचंभित, सभु विस्मित!

कोई चमत्कार जहड़ी। दुआऊं जहड़ी। अल-सुभह सफ़ेद जहड़ी। भोले बार जे मन जहड़ी। सभन जी ख़ुशी जी कामना जहड़ी। हर इबादत क़बूल जहड़ी।

पनहीं अम्मा जी हो कर्मठ "बाली"। बाबा जी सभ खां होनहार, ईनाम वारी अवलाद। भाउन लाई फेरि अम्मा जहड़ी। भीणन में हुनन जो शिंगार। भाभीयन लाई — हुनन जो डुख पनहीं कंदड़।

सभ विधाऊं खे सहेली बणाए — कदहिं तरंदी, कदहिं पढ़ंदी, कदहिं ऐनकूं चाढ़े कंप्यूटर युग खे जीतंदी, ते कदहिं रसोई जा राज़ ब्धाईंदी।

हू जत हुई, ओत पतियूं हरियूं थी वंजंदियूं। सभ नाती-पोता फलदार थी वंजंदा।

हाणे!!!

सभन खे लगो — उडान भरी आहे, कदहिं ते हेठ अचण कुडहंदो। पर चमत्कार जन्म वठंदा आहन त — हौसला हेठ न इंदा।

हिक-हिक पंख हर हिकु जे हिसे में आयो, पनहीं विरासत में — न्ंढा-वडा, सभन जे मन में हो पंख हौसलो बणी उभुरियो।

हो हौसला, हो विरासत जा पंख — आशीर्वाद बणी, दुआऊं जी हवा में, फेरि-फेरि, आसमान जीतंदा रहन...

हाणे ते "खेतन भी ख़त लिखियो" आहे।

जदहिं भी जन्म वठो — "कल्पना" ई जन्म वठो। ऐं पोइ मूंखे ई जन्म डियो। ❤️

हू मुहिंजी अम्मा हुई, पर सभन लाई भी अम्मा हुई! इतरियूं घणियूं अम्मियूं हुयूं तूं — सभन खे मिली अम्मा जहड़ी। मुहिंजी फेरि भी थोड़ी घणी अम्मा हुयीं। बसु आउं ख़ुश आहियां — मुहिंजी ई तूं अम्मा हुयीं। 💞

— अहां जी "पल"

श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ०२ 02 ०२
दीदी ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। शत-शत नमन। Didi ne meri zindagi badal di. Shat-shat naman. दीदीअ मुहिंजी ज़िंदगी बदलाए छडी। शत-शत नमन।
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इन्नू दीदी मुझसे एक वर्ष बड़ी थीं। किस क्लास में था याद नहीं — मैं उदास बैठा रो रहा था। दीदी ने देखा, बोलीं — "क्या हुआ?"

मैंने कहा — "मुझे पाइथागोरस का साध्य समझ नहीं आ रहा। मैं साइंस कैसे लूँगा? सर ने भी बहुत समझाया है, पर समझ नहीं आ रहा। प्रिंसिपल तेलंग सर ने बोला है, जिसको भी यह साध्य नहीं आएगा उसको साइंस नहीं मिलेगा। कल वे पूछने वाले हैं।"

दीदी ने बोला — "मेरे साथ बैठो।" दस मिनट में उन्होंने मुझे पाइथागोरस का साध्य समझा दिया। मैंने कहा — "ये तो इतना सरल है, मज़ा आ गया!"

मुझे साइंस मिला, और पूरे स्कूल से दसवीं बोर्ड में मैं अकेला प्रथम श्रेणी में पास हुआ, और इंजीनियरिंग में एडमिशन मिला।

दीदी बहुत इंटेलिजेंट थीं — हमेशा क्लास में प्रथम आती थीं। दीदी ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। शत-शत नमन। 🙏

Innu Didi was one year older than me. I don't remember which class I was in — I was sitting in despair, crying. Didi noticed, asked — "Kya hua?"

I said, "Mujhe Pythagoras ka saadhya samajh nahin aa raha. How will I take science? Sir has explained it so many times, but I still don't get it. Principal Telang Sir has said anyone who doesn't get this theorem won't be allowed to take science. He's going to ask me tomorrow."

Didi said, "Mere saath baitho." In ten minutes, she explained the Pythagorean theorem to me. I said, "Yeh to itna saral hai — mazaa aa gaya!"

I got science, and from the entire school, I was the only one to pass the tenth-grade board exam in the first class. I got admission to engineering.

Didi was so intelligent — always first in class. Didi changed my life. Shat-shat naman. 🙏

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

इन्नू दीदी मुहिं खां हिक वरह व्डी हुई। किहड़े क्लास में हुयस ख़बर न आहे — आउं उदास विहारी रो रहियो हुयस। दीदीअ डिठो, चयूं — "छा थियो?"

आउं चयो — "मूंखे पाइथागोरस जो साध्य समझ में नथो अचे। साइंस कीअं कंदुस? सर भी बहु समझायो, पर समझ में नथो अचे। प्रिंसिपल तेलंग सर चयो आहे, जेके भी हीउ साध्य न अचंदो उन खे साइंस न मिलंदी। सुभाणे हू पुछण वारा आहन।"

दीदीअ चयो — "मुहिंजे साथ विहो।" डाह मिंटन में हुनन मूंखे पाइथागोरस जो साध्य समझाए छडियो। आउं चयो — "हीउ त इतरो सोलो आहे, मज़ो अचि वियो!"

मूंखे साइंस मिली, ऐं पूरे स्कूल मां डहिं बोर्ड में आउं अकेलो प्रथम श्रेणी में पास थियस, ऐं इंजीनियरिंग में एडमिशन मिलियो।

दीदी बहु ज़ेहन वारी हुई — हमेशा क्लास में प्रथम अचंदी हुई। दीदीअ मुहिंजी ज़िंदगी बदलाए छडी। शत-शत नमन। 🙏

श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ०३ 03 ०३
आज भी मैं प्रेम से ही डरता हूँ, गुस्से से नहीं — और यही वो हमें गहरी सीख दे गईं। Aaj bhi main prem se hi darta hoon, gusse se nahin — aur yahi vo hamein gehri seekh de gaeen. अजु भी आउं प्रेम खां ई डहिं वियो था, ग़ुस्सी खां नहीं — ऐं हिऐ हुनन असांखे गहिरी सीख डिनी।
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सादा जीवन उच्च विचार! नहीं बल्कि अति उच्च विचार!! हमेशा हर परिस्थिति में शान्त, सौम्य, लेकिन अपने विचारों से अत्यधिक प्रभावित करने वाली हमारी प्यारी अनु दीदी की यादें ग़मगीन कर देती हैं। उनकी विशेषता थी कि हमारी बड़ी से बड़ी ग़लती पर भी वो शालीनता से रिएक्ट करती थीं।

बचपन का एक किस्सा याद आता है — मैं खाने का शुरू से ही शौकीन रहा हूँ। हरसमय और अनहेल्दी खाने पर अनु दीदी ने मेरे ऊपर रोक लगा रखी थी, जिसकी वजह से मैं बहुत परेशान था। इसी बीच अनु दीदी की शादी तय हो गई, और जैसे ही मुझे पता चला कि शादी के बाद अनु दीदी यह घर छोड़कर चली जाएँगी, तो मैं बहुत खुश था कि अब मुझे रोक-टोक वाला कोई नहीं होगा; जो मन करेगा, जितना चाहूँगा खाऊँगा। इस बात की खुशी मैंने सबके बीच ज़ाहिर की।

अनु दीदी को यह बात पता चली तो वो बहुत हँसीं, फिर मुझे प्यार से बैठाकर बहुत अच्छी-अच्छी चीज़ें खिलाईं, और फिर मुझे ग़लत खानपान से होने वाले नुकसान समझाए। बोलीं — "मैं तो चली जाऊँगी, लेकिन सबसे पता लगाती रहूँगी कि तुम सुधरे कि नहीं।" 😊 लेकिन यह सब बहुत ही सौम्य तरीके से, बिना डाँटे, वे समझाती थीं — और मैं उनके विनम्र स्वभाव की वजह से ही उनसे डरता था।

आज भी मैं प्रेम से ही डरता हूँ, गुस्से से नहीं — और यही वो हमें गहरी सीख दे गईं।

यादें ही शेष हैं। दीदी को शत-शत नमन। 🙏

Sada jeevan, uchcha vichaar! Nahin balki ati uchcha vichaar!! Hamesha har paristhiti mein shaant, saumya, lekin apne vichaaron se atyadhik prabhaavit karne waali humaari pyaari Anu Didi ki yaadein gamgeen kar deti hain. Unki visheshta thi ki humaari badi se badi galti par bhi vo shaaleenta se react karti thin.

Bachpan ka ek kissa yaad aata hai — main khaane ka shuru se hi shaukeen raha hoon. Har-time aur unhealthy khaane par Anu Didi ne mere upar rok laga rakhi thi, jiski wajah se main bahut pareshaan tha. Isi beech Anu Didi ki shaadi tay ho gayi, aur jaise hi mujhe pata chala ki shaadi ke baad Anu Didi yeh ghar chhodkar chali jaayengi, to main bahut khush tha ki ab mujhe rok-tok wala koi nahin hoga; jo man karega, jitna chaahoonga khaaoonga. Is baat ki khushi maine sabke beech zaahir ki.

Anu Didi ko yeh baat pata chali to vo bahut hansi, phir mujhe pyaar se baithaakar bahut achchhi-achchhi cheezein khilaayin, aur phir mujhe galat khaanpaan se hone waale nuksaan samjhaaye. Boli — "Main to chali jaaoongi, lekin sab se pata lagaati rahoongi ki tum sudhare ki nahin." 😊 Lekin yeh sab bahut hi saumya tareeke se, bina daante, ve samjhaati thin — aur main unke vinamra swabhaav ki wajah se hi unse darta tha.

Aaj bhi main prem se hi darta hoon, gusse se nahin — aur yahi vo hamein gehri seekh de gaeen.

Yaadein hi shesh hain. Didi ko shat-shat naman. 🙏

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

सादी जीवनधारा, उच्च विचार! न — बल्कि अति उच्च विचार!! हर हालत में शान्त, सौम्य, पर पनहीं विचारन सां असांखे गहिरो असर डिऐंदड़ असांजी प्यारी अनु दीदीअ जूं यादगिरियूं अकेलियूं करे डिनियूं आहन। हुनन जी ख़ासियत हुई त असांजी गहिरी कां गहिरी ग़लती ते भी हू शालीनताअ सां जवाब डिऐंदियूं हुयूं।

बचपन जो हिक किस्सो याद अचे थो — आउं खाण जो शुरुआतई खां शौक़ीन हुयस। हर वक़्त ऐं अनहेल्दी खाण ते अनु दीदीअ मुहिंजे ते रोक रखी हुई, जेका सबब हो जो आउं तंग हुयस। हुन वच्छाण में अनु दीदीअ जी शादी पक्की थी वई, ऐं जदहिं मूंखे ख़बर पई त शादीअ खांपोइ अनु दीदी ई घर छडे विंदियूं, त आउं बहु ख़ुश हुयस त हाणे मूंखे रोकण-टोकण वारो कोई न हूंदो; जे दिल चाहे, जितरो चाहियां खाईंदुस। हीअ ख़ुशी मां सभन ते ज़ाहिर कियो।

अनु दीदीअ खे जदहिं पतो पियो त हू बहु हँसियूं, पोइ मूंखे प्यार सां विहारी बहु सूतियूं-सूतियूं वस्तूं खारायूं, ऐं पोइ ग़लत खाण-पीण मां ऐंदड़ नुकसान समझायूं। चयूं — "आउं त विंदी आहियां, पर सभन खां पतो लगांदी रहंदी सि त तू सुधरियो आहीं या न।" 😊 पर हीअ सभु बहु सौम्य रीतिअ सां, बिना डाँटे, हू समझाईंदियूं हुयूं — ऐं आउं हुनन जे विनम्र स्वभाव जे सबब ई हुनन खां डहंदो हुयस।

अजु भी आउं प्रेम खां ई डहिं वियो था, ग़ुस्सी खां नहीं — ऐं हिऐ हुनन असांखे गहिरी सीख डिनी।

यादगिरियूं ई बाक़ी आहन। दीदीअ खे शत-शत नमन। 🙏

श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ०४ 04 ०४
हर दही बड़े और फ़िश में, ढूँढता हूँ उनका प्यार। In every dahi-bada and every fish, I search for her love. हर दही-बड़े ऐं फ़िश में, हुनन जो प्यार ढूंढिंदो आहियां।
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मेरी आवाज़ उन तक पहुँचे — ये हमेशा मुमकिन नहीं होता था। फिर भी मुझसे बात करने का उनका हौसला कभी कम नहीं होता था।

मैं निश्चिंत रहता था, क्योंकि माँ की आवाज़ के सहारे — मेरी हर बात, मेरा हर हाल पहुँच जाता था उनके द्वारे।

और फिर कुछ ही देर में उनका संदेश आ जाता था — "अब तो घर जल्दी आना।"

घर आने की बात के साथ ही जुड़ जाता था एक और प्यार भरा फ़रमान — "खाना ज़रूर खाना, भले लंच हो या डिनर — दही बड़े बना दूँगी।" यही था उनका अंदाज़, यही उनकी पहचान।

अक्सर ऐसे ही संदेशों से होता था मेरा स्वागत। उनके शब्दों में मिलता था अपनापन और राहत।

आज भी कहीं इशारे हैं, और है छिपी पुकार — हर दही बड़े और फ़िश में, ढूँढता हूँ उनका प्यार।

कल उनका जन्मदिन है। बस इतनी सी दुआ है मेरी —

जहाँ भी हों नानी, वहाँ अपनी छवि बनाए रखना। अपनी कविताओं और लेख में बढ़िया व्यस्त रहना। ज़रूरत पड़े तो अपना एड्रेस भेज देना — आपकी अधूरी पड़ी Fifty Shades भेजनी थी। वैसे, ऊपर वालों को बताना मत कि नीचे क्या पढ़ती थीं।

वही दही बड़े, वही प्यार, वही फ़िश खिलाना…

My voice didn't always reach her — yet her courage to talk to me never dimmed.

I stayed at peace, because through Maa's voice — every word of mine, every state I was in, reached her door.

And then, just a little while later, her message would come: "Now come home soon."

With "come home" came another loving decree — "Eat properly — lunch or dinner, I'll make dahi-bade for you." That was her way. That was her signature.

Often that's how I was welcomed — in her words I found belonging and rest.

Even today there are signals, hidden calls — in every dahi-bade and every fish, I search for her love.

Tomorrow is her birthday. Just this small prayer of mine —

Wherever you are, Nani — keep your spark alive. Stay nicely busy in your poems and your writing. If you need anything, send me your address — I had to send you your unfinished Fifty Shades. By the way — don't tell the ones up there what you were reading down here.

The same dahi-bade, the same love, the same fish to feed me…

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

मुहिंजी आवाज़ हुनन ताईं पहुचे — ऐहो हमेशा मुम्किन न हूंदो हो। तडहिं भी मुहिं सां ग़ालह करण जो हुनन जो हौसलो कदहिं घटु न थींदो हो।

आउं नचिंत रहंदो हुयस, जो अम्मा जी आवाज़ जे आसरे — मुहिंजी हर ग़ालह, मुहिंजो हर हाल पहुची वंजंदो हो हुनन जे डर ताईं।

ऐं पोइ थोड़ी देरि में हुनन जो संदेशो अची पवंदो हो — "हाणे ते घर जल्दी अच।"

घर अचण जी ग़ालह सां ई जुड़ी पवंदो हो हिक ब्यो प्यार भरियो हुक्म — "खाणो ज़रूरि खाईंदा करु, भले लंच हुजे या डिनर — दही-बड़ा बणाई डींदी सि।" हिऐ हुनन जो अंदाज़ हो, हिअई हुनन जी पहचाण।

अक्सरि एड़ान संदेशन सां थींदो हो मुहिंजो स्वागतु। हुनन जे अल्फ़ाज़न में मिलंदो हो पंहिंजापो ऐं राहत।

अजु भी कथे इशारा आहन, ऐं छिपिल पुकार — हर दही-बड़े ऐं फ़िश में, ढूंढिंदो आहियां हुनन जो प्यार।

सुभाणे हुनन जो जन्मडिंह आहे। बसु इतरी ई दुआ आहे मुहिंजी —

जत भी हुजो नानी — पनहीं छबि बणायल रखो। पनहीं कविता ऐं लेखन में सुठो मगन रहो। ज़रूरि पवे ते पनहीं ऐड्रेस मोकले डियो — अहां जी अधूरी पियल Fifty Shades मोकलेण थी। ख़ैर — मथे वारन खे न ब्धाईंदा करिजो जो हेठ छा पढ़ंदा हुयो।

उहई दही-बड़ा, उहो ई प्यार, उहो ई फ़िश खारायण…

श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ०५ 05 ०५
मैं जो हूँ, अजय रामानी के कारण हूँ। और अजय रामानी जो हैं, कल्पना रामानी के कारण हैं। इसीलिए मैं ख़ुद को रोहन अजय कल्पना रामानी कहता हूँ। I am what I am because of Ajay Ramani. And Ajay Ramani is what he is because of Kalpana Ramani. That is why I call myself Rohan Ajay Kalpana Ramani. मां जो आहियां, अजय रामानी जे सबब आहियां। ऐं अजय रामानी जो आहे, कल्पना रामानी जे सबब आहे। इन्हीं करे मां पाण खे रोहन अजय कल्पना रामानी सडिंदो आहियां।
श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ०६ 06 ०६
एक माँ ऐसी होती है — जो बिना कुछ माँगे, सब कुछ दे देती है। A mother is someone who gives everything without asking — and the one who receives never even knows what they got. अम्मा हीअ हूंदी आहे — जा बिनां कुझ गहरण जे, सभु कुझ डियी छडे।
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बहुत समय की पाबंद, कर्मठ, और काम में पूरी लगन वाली। उनका विज़न हमेशा साफ़ होता था।

वो कम सुनती थीं — लेकिन सुनने वालों से कहीं ज़्यादा गहराई से समझ जाती थीं।

वो एक तेज़ सीखने वाली थीं — और उम्र ने कभी भी उनकी जिज्ञासा पर असर नहीं डाला। उन्होंने उम्र की बाधाओं को पार करते हुए नई चीज़ें सीखीं — जैसे कंप्यूटर, कविता, और किताब लिखना।

अपने जीवन में, हर व्यक्ति को — चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष — उन्होंने कुछ न कुछ सिखाया है। हर कोई उनकी किसी न किसी बात को जीवन में एक सीख की तरह याद रख सकता है।

एक माँ ऐसी होती है — जो बिना कुछ माँगे, सब कुछ दे देती है। और पाने वाले को पता भी नहीं चलता कि उसे क्या मिला।

मिस यू, माँ।

She was strictly punctual, diligent, fully devoted to her work. Her vision was always clear.

She listened little — but understood far more deeply than those who listened more.

She was a quick learner — and age never dimmed her curiosity. She crossed the barriers of age to learn new things — computers, poetry, writing a book.

In her lifetime, every single person — directly or indirectly — she taught something. Everyone can remember at least one of her words as a lesson for life.

A mother is someone who gives everything — without asking. And the one who receives never even knows what they got.

Miss you, Maa.

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

बहु वक़्त जी पाबंद, मेहनती, ऐं कम में पूरी लगन वारी। हुनन जो विज़न हमेशा साफ़ हूंदो हो।

हू घटु सुणंदी हुई — पर सुणण वारन खां वडी गहिराईअ सां समझी वंजंदी हुई।

हू तेज़ सिखंदड़ हुई — ऐं उमिर हुनन जी जिज्ञासा ते कदहिं असर न डियो। हुनन उमिर जा बंधन पार करे नवियूं वस्तूं सिखियूं — जिअं कंप्यूटर, कविता, ऐं किताब लिखण।

पनहीं जीवन में, हर शख़्स खे — चाहे सिधो या अंदाजी — हुनन कुझ न कुझ सिखायो आहे। हर हिकु हुनन जी कुहन न कुहन ब्धण खे ज़िन्दगीअ में सिख वांगर याद रखी सघे थो।

अम्मा हीअ हूंदी आहे — जा बिनां कुझ गहरण जे, सभु कुझ डियी छडे। ऐं वठंदड़ खे पतो भी न पवे जो उन खे छा मिल्यो।

मिस यू, अम्मा।

श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ०७ 07 ०७
आप जिनके क़रीब होते हैं, वो बड़े ख़ुशनसीब होते हैं। Those who are close to you are the most fortunate of all. अहां जिन जे ओड़ो हुंदा आहियो, सो वडा ख़ुशनसीब हुंदा आहन।
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इन्नू दीदी — स्व-निर्मित ❤️, स्नेहमयी 💝, स्वतंत्र 🙎🏻‍♀️, और शब्दों से सम्पन्न।

उन्होंने अपना जीवन अपने संकल्प, शक्ति, और परिश्रम से रचा — और जो भी उन्हें जानता था, उसे प्रेरित किया। उनकी करुणा ने अनगिनत हृदयों को छुआ; उनके स्नेहमय स्वभाव ने लोगों को मूल्यवान और समझा हुआ महसूस कराया। उन्होंने जीवन को गरिमा, साहस और स्वतंत्रता के साथ जिया, और हर चुनौती का सामना सुंदरता से किया।

हिन्दी कविता की एक मधुर रचनाकार के रूप में, उन्होंने उन भावों को आवाज़ दी जिन्हें कई लोग महसूस तो करते थे, पर शब्दों में बाँध नहीं पाते थे। अपनी कविताओं के माध्यम से उन्होंने प्रेम, आशा, ज्ञान, और रोज़मर्रा के जीवन की सुंदरता को साझा किया। उनके शब्द आने वाले वर्षों तक हृदयों को छूते रहेंगे।

वे जैसे थीं — "आप जिनके क़रीब होते हैं, वो बड़े ख़ुशनसीब होते हैं।" 🫶❤️

Innu Didi — a self-made ❤️, caring 💝, independent 🙎🏻‍♀️ woman, gifted with words.

She built her life through determination, strength, and hard work, inspiring everyone who knew her. Her kindness touched many hearts, and her caring nature made people feel valued and understood. She lived with dignity, courage, and independence, facing life's challenges with grace.

As a writer of beautiful Hindi poems, she gave voice to emotions that many could feel but could never express. Through her poetry, she shared love, hope, wisdom, and the beauty of everyday life. Her words will continue to live on, touching hearts for years to come.

She was like — "Aap jinke kareeb hote hain, wo bade khushnaseeb hote hain." 🫶❤️

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

इन्नू दीदी — पनहीं हथन सां पनहीं ज़िन्दगी रचंदड़ ❤️, मेहरबान 💝, ख़ुदमुख़्तियार 🙎🏻‍♀️, ऐं अल्फ़ाज़ जी देवी।

हुनन पनहीं ज़िन्दगी पनहीं हिम्मत, शक्ति, ऐं मेहनत सां बणाई — ऐं जे कोई हुनन खे ओळखंदो हो, उन खे प्रेरणा डिनी। हुनन जी मेहरबानी अंवेकन दिलिन खे छुहियो; हुनन जे प्यार ऐं ख़याल राखण वारे स्वभाव सबब लोग पाण खे क़ीमती ऐं समझियो वियो महसूस कंदा हुया। हुनन ज़िन्दगी ख़ुद्दारी, हिम्मत ऐं ख़ुदमुख़्तियारीअ सां गुज़ारी, ऐं हर मसले जो सामनो ख़ूबसूरतीअ सां कियो।

हिन्दीअ जी हिक मीठी कविता-नवीस वांगर, हुनन उन जज़्बातन खे आवाज़ डिनी, जिन खे घणा माणू महसूस त कंदा हुया, पर अल्फ़ाज़ में बंधी न सघंदा हुया। पनहीं कवितां जे माध्यम सां हुनन प्यार, उम्मीद, समझ, ऐं रोज़ाणी ज़िन्दगीअ जी ख़ूबसूरती ब्धी कई। हुनन जा अल्फ़ाज़ अंवेकन वर्हन ताईं दिलिन खे छुहंदा रहंदा।

हू जिन वांगर हुयूं — "अहां जिन जे ओड़ो हुंदा आहियो, सो वडा ख़ुशनसीब हुंदा आहन।" 🫶❤️

श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ०८ 08 ०८
उनके पास लेटे हुए मैं उनकी कहानियों में डूब गई — कैसे वो अकेले इतना सफर तय कर लेती थीं, सच में एक योद्धा। Lying next to her I was engrossed in her stories — how she managed to travel alone, truly a warrior. उनहीं जे पासे विहारी आउं हुनन जूं कहाणियूं ब्धंदी रहियस — हू कीअं अकेलियूं इतरो सफर कंदियूं हुयूं, सचमुच हिक जुझार।
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इन्नू मासी की कितनी ही प्यारी यादें मन में बसी हैं — उस ज़माने की भी जब वो ख़ूब हृष्ट-पुष्ट और भरी-पूरी थीं, और बाद में जब बिल्कुल दुबली हो गईं — पर ज़िंदगी से भरपूर वो हमेशा रहीं। याद है, स्विमिंग पूल में उतरकर कोने में देर तक खड़ी रहती थीं, नई-नई चीज़ें सीखती हुई।

बचपन में मैं उन्हें "माया-माया मासी" कहती थी, क्योंकि वो मेरे लिए नई-नई फ़्रॉक सिल देती थीं। और मैं इतनी छोटी थी कि "नया-नया" शब्द भी ठीक से बोल नहीं पाती थी।

मेरी नानी का घर भी उसी शहर में था, इसलिए मुझे बहुत बुरा लगता था कि छुट्टियों में मैं वहाँ नहीं जा पाती। लेकिन फिर मैंने अपनी कई गर्मियों की छुट्टियाँ बड़नगर में मासी के घर बितायीं। दादा (मौसाजी) और अज्जू भैया मेरे लिए मेरी मनपसंद आइसक्रीम लाते थे। मासी मेरे लिए पूरे साल के *चाचा चौधरी* और *टिंकल* के कॉमिक्स छोटे-से स्टोर रूम में सम्भालकर रखती थीं — गर्मियों का बंदोबस्त हो जाता था; बदले में मुझे और हर्षा दीदी को ढेर सारी लहसुन छीलनी पड़ती थी। वो छुट्टियाँ सबसे बेहतरीन थीं — उन दिनों की बहुत-सी कहानियाँ हैं। एक तो ये कि पप्पी दीदी ने मूसलाधार बारिश में उस विशाल पेड़ को थामे रखा था, सिर्फ़ इसलिए कि उसके फल न गिरें।

इन्नू मासी कमाल की लेखिका थीं — और उससे भी बड़ी बात ये कि उन्होंने टेक्नोलॉजी पर विजय पाकर अपनी यात्रा की उस ऊँचाई को छुआ। ये बात बहुत प्रेरणादायक है — ज़िंदगी के हर पड़ाव पर कुछ नया सीखते रहना।

पुणे में जब वो रोहन निलय में रहती थीं, तब हमने ख़ूबसूरत दिन बिताए। मैं वहीं नौकरी करती थी, और हर वीकेंड अपने पीजी से उनके पास चली आती थी; वो मेरे लिए ज़बरदस्त खाना बनाती थीं। पंद्रह साल पहले की उनकी जन्मदिन की कुछ तस्वीरें भेज रही हूँ।

आख़िरी मुलाक़ात मई 2023 में हुई थी — शायद वो उनकी आख़िरी शादी थी जिसमें वो शामिल हुई थीं। मेरा कमरा भरा हुआ था, मैं किसी बिस्तर की तलाश में थी जहाँ थोड़ी देर लेट सकूँ, तो उनके कमरे में चली गई क्योंकि वो ख़ाली था। उनके पास लेटे हुए मैं उनकी कहानियों में डूब गई — कैसे वो अकेले इतना सफर तय कर लेती थीं, सच में एक योद्धा।

हम आपसे बहुत प्यार करते हैं और बहुत याद करते हैं, इन्नू मासी। ❤️

I have too many fond memories of Innu Masi — from the time she was extreme plumpy and healthy, to when she went on to be so lean, but full of life always. I remember her getting into the pool and standing for long in the corner, learning new things.

When I was a child, I used to call her "Maya-Maya Masi" because she used to stitch new frocks for me. I was so small I couldn't even pronounce "naya naya" (new) well.

Since my nani's house was in the same city, I used to be really upset that I didn't get to go there for vacations. But then I spent many of my summer vacays at Badnagar at Masi's house. Dada (Mausaji) and Ajju Bhaiya used to get me my favourite ice creams. Masi used to keep a whole year's *Chacha Chowdhury* and *Tinkle* books for me in the small tiny store room — summer sorted; in return, me and Harsha didi had to peel loads of garlic for her. Those vacays were the best, with too many stories from those times. One such — Pappi didi holding that enormous tree in heavy rain just to protect the fruits from falling.

Innu Masi was an amazing writer, and more than that — she beat technology to get to the peak of her journey. That's so inspiring — learning new things at every stage of your life.

We spent good days in Pune when she was at Rohan Nilay. I was working there and used to come from my PG on weekends, and she used to cook amazing dishes for me. Attaching those birthday pics from 15 years back.

Last meet was in May 2023, probably during the last wedding she attended. My room was full and I was looking for a bed to rest, so I went to her room since that was free. Lying next to her, I was engrossed in her stories — how she managed to travel alone, truly a warrior.

We love you so much and miss you loads, Innu Masi. ❤️

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

इन्नू मासीअ जूं ढेर सारियूं प्यारियूं यादगिरियूं मन में आहन — उन वक़्त खां जदहिं हू ख़ूब हृष्ट-पुष्ट ऐं भरी-पूरी हुयूं, ऐं पोइ जदहिं तमाम लाग़र थी वइयूं — पर हू सदा जीवन सां भरपूर रहियूं। याद आहे, स्विमिंग पूल में लहिं कुणे में देरि ताईं उभियूं रहंदियूं हुयूं, नवियूं-नवियूं वस्तूं सिखंदियूं।

बचपन में आउं हुनन खे "माया-माया मासी" चयंदी हुयस, जो हू मूंला नवियूं-नवियूं फ़्रॉक सिणींदियूं हुयूं। ऐं आउं इतरी न्ंढी हुयस जो "नयो-नयो" शब्द भी ठीक तरह सां न चई सघंदी हुयस।

मुहिंजी नानीअ जो घर भी उहीअ शहर में हो — हिन सबब मूंखे बहु ख़फा थींदी हुई त छुट्टियूं में अहिड़े वंजण नथो मिले। पर पोइ मां पनहीं घणयूं उनहारीयूं छुट्टियूं बड़नगर में मासीअ जे घर गुज़ारियूं। दादा (मौसाजी) ऐं अज्जू भायो मूंला मुहिंजी पसंद जा आइसक्रीम आणींदा हुया। मासी मूंला पूरे वर्हे जा *चाचा चौधरी* ऐं *टिंकल* जा कॉमिक्स न्ंढे स्टोर रूम में संभाल करे रखंदियूं हुयूं — उनहारीअ जो बंदोबस्त थी वंजंदो हो; बदले में मूंखे ऐं हर्षा दीदीअ खे ढेर सारियूं लहसण छीलण लाई पवंदी हुई। हो छुट्टियूं सभन खां सठियूं हुयूं — हुन वक़्त जूं घणयूं कहाणियूं आहन। हिकु हीउ त पप्पी दीदी मूसलाधार मेंह में हुन विशाल वण खे छाहियो हो, फ़क़त हिन लाई त उन जा फल भुईं ते न पवन।

इन्नू मासी हिक कमाल जी लेखिका हुयूं — ऐं उन कान भी वडी ख़ासियत हुई जो हुनन टेक्नोलॉजी ते क़ब्ज़ो हासिल कंदी पनहीं सफर जी हिक बुलंदी ते पहुतियूं। हीउ बहु प्रेरणा डिऐंदड़ आहे — जीवन जे हर मोड़ ते कुझ नयो सिखंदा रहण।

पुणे में जदहिं हू "रोहन निलय" में रहंदियूं हुयूं, असीं ख़ूबसूरत डिंह गुज़ारियो हो। आउं ओतही नोकरी कंदी हुयस, ऐं हर वीकेंड पनहीं पीजी खां हुनन वट अची वंजंदी हुयस; हू मूंला सठा-सठा खाणा बणाईंदियूं हुयूं। पंदरह वर्हे अगा जा हुनन जा जन्मडिंह जा फोटू मोकलियां पियी।

आख़िरी मिलाप मई 2023 में थियो — शायद हो हुनन जी आख़िरी शादी हुई जेअ में हू शामिल थियूं। मुहिंजो कमरो ढेर थील्यो हो, आउं हिक बिस्तरो भालींदी हुयस जत थोड़ी देरि ताईं विहारियां, तदहिं आउं हुनन जे कमरे में हलियो वियस — जो हू ख़ाली हो। हुनन जे पासे विहारी आउं हुनन जूं कहाणियूं ब्धंदी रहियस — हू कीअं अकेलियूं इतरो सफर कंदियूं हुयूं, सचमुच हिक जुझार।

असीं अहां सां ब्धो प्यार करियूं था ऐं बहु याद करियूं था, इन्नू मासी। ❤️

Pune, 2010 — "Innu-masi" on the chocolate cake
पुणे, २०१० — चॉकलेट केक पर "इन्नू-मासी" Pune, 2010 — "Innu-masi" on the chocolate cake पुणे, २०१० — चॉकलेट केक ते "इन्नू-मासी"
Cake-cutting at Rohan Nilay — Masi, Mami, all of us
रोहन निलय में जन्मदिन — मासी, मामी, हम बच्चे Cake-cutting at Rohan Nilay — Masi, Mami, all of us रोहन निलय में जन्मदिन — मासी, मामी ऐं असीं ब्चा
Bhaiya, Bhabhi, all of us — one special evening
भैया-भाभी, हम सब — एक ख़ास शाम Bhaiya, Bhabhi, all of us — one special evening भायो-भाभी, असीं सभ — हिक ख़ास शामु
May 2023 — the last wedding she attended
मई २०२३ — आख़िरी शादी जिसमें वो शामिल हुई थीं May 2023 — the last wedding she attended मई २०२३ — आख़िरी शादी जेअ में हू शामिल थियूं
Hands on the kalash — the ritual in full swing
कलश पर हाथ — रस्म की धूम Hands on the kalash — the ritual in full swing कलश ते हथ — रस्म जो धूमु
Family, together — as always
परिवार, साथ — हमेशा की तरह Family, together — as always घर वारा, गडु — हमेशा वांगर
श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ०९ 09 ०९
क्योंकि अनमोल हैं आप, आपका कोई समान नहीं। For you are without price — there is no one like you. जो अहां अनमोल आहियो — अहां जहड़ो कोई बियो कोन आहे।
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प्रेरणाओं और संस्कारों की पहचान हैं आप, हर दिल को छू जाए ऐसा मधुर एहसास हैं आप।

जीवन के संघर्षों को हँसकर अपनाने वाली, हिम्मत, धैर्य, और विश्वास की मिसाल हैं आप।

आपके स्नेह और मार्गदर्शन की छाँव मिली, जिससे पूरे परिवार को ख़ुशियों की ठाँव मिली।

शब्दों में आपके व्यक्तित्व को समेट पाना आसान नहीं, क्योंकि अनमोल हैं आप, आपका कोई समान नहीं।

मेरी प्यारी इनु बुआ — हमारा अभिमान हैं आप, परिवार के हर दिल में बसने वाली मुस्कान हैं आप।

You are the mark of inspirations and of values, a sweet feeling that touches every heart — that's what you are.

One who embraced life's struggles with a smile, the very example of courage, patience, and faith — that's you.

We received the shade of your affection and your guidance, through which our whole family found its haven of joy.

It isn't easy to gather your essence into words, for you are without price — there is no one like you.

My beloved Inu Bua — you are our pride. The smile that dwells in every heart of this family — that's you.

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

प्रेरणा ऐं संस्कारन जी पहचाण आहियो अहीं, हर दिल खे छुहंदड़ हिक मिठो एहसासु आहियो अहीं।

जीवन जे संघर्षन खे हँसी कबूल कंदड़, हिम्मत, धीरज ऐं विश्वास जी मिसाल आहियो अहीं।

अहां जे प्यार ऐं मार्गदर्शन जी छाहीं मिली, जिन सां पूरे घर खे ख़ुशियन जो ठहराउ मिल्यो।

अल्फ़ाज़न में अहां जे व्यक्तित्व खे समेटण आसान नथो, जो अहां अनमोल आहियो — अहां जहड़ो कोई बियो कोन आहे।

मुहिंजी पियारी इनु बुआ — असांजो अभिमान आहियो अहीं, घर जे हर दिल में वसण वारी मुस्कान आहियो अहीं।

श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि १० 10 १०
आपका प्यार मेरे जीवन में हमेशा के लिए बुन गया है। Your love remains woven into my life forever. अहां जो प्यार मुहिंजी ज़िन्दगीअ में हमेशा लाई बुणिल आहे।
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प्रिय इनु मासी,

आपको इस दुनिया से गए दो साल हो गए हैं — फिर भी एक दिन ऐसा नहीं जाता जब आपकी यादें मेरे मन में नहीं आतीं।

मुझे पता है आप एक सुंदर जगह में हैं, हम सब पर वैसी ही नज़र रखे हुए हैं — वही प्यार, वही ख़याल जो आप हमेशा हम पर लुटाया करती थीं। आप मेरे लिए सिर्फ़ एक मासी नहीं थीं। आप एक देवदूत थीं — एक रक्षक, एक मार्गदर्शक, और सदा भलाई की दुआ करने वाली।

कुछ यादें कभी फीकी नहीं पड़तीं। मैं आज भी मुस्कुरा देती हूँ जब हमारी रोज़ की सुबह की बातचीत याद आती है — आप लगभग हर रोज़ पूछती थीं, "शिखा, तुम अंग्रेज़ी अख़बार क्यों पढ़ रही हो? तुम्हें हिन्दी ज़्यादा पढ़नी चाहिए!" तब जो एक साधारण बात लगती थी, आज मेरी सबसे प्यारी यादों में से एक है।

मुझे आज भी आपकी बातें याद हैं — आपका स्नेह, आपकी चिंता, और जिस तरह आप हमेशा मेरे लिए सब अच्छा चाहती थीं। आपकी दुआएँ आज भी मेरा मार्गदर्शन करती हैं, और आपकी मौजूदगी अनगिनत छोटे-छोटे पलों में महसूस होती है।

आप अब शायद यहाँ नहीं हैं, लेकिन आपका प्यार मेरे जीवन में हमेशा के लिए बुन गया है।

आज भी, और हमेशा — आपकी कमी महसूस होती है। ❤️

प्यार के साथ, शिखा

Dear Innu Masi,

It has been two years since you left this world, yet not a day passes without thoughts of you finding their way into my heart.

I know you are in a beautiful place, watching over all of us with the same love and care that you always showered upon us. You were much more than a Maasi to me. You were an angel, a protector, a guide, and a constant well-wisher.

Some memories never fade. I still smile when I remember our daily morning ritual. Almost every day, you would ask, "Shikha, why are you reading an English newspaper? You should start reading Hindi more!" What seemed like a simple conversation then has now become one of my most treasured memories.

I still remember your words, your affection, your concern, and the way you always wanted the best for me. Your blessings continue to guide me, and your presence continues to be felt in countless little moments.

You may no longer be here physically, but your love remains woven into my life forever.

Missing you today and always. ❤️

With love, Shikha

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

पियारी इनु मासी,

अहां खे हिन दुनिया मां वंजे ब वर्ह थी विया आहन — तडहिं भी हिक डिंह एड़ो न वंजे जदहिं अहां जूं यादगिरियूं मुहिंजे मन में न अचंदियूं हुजन।

मूंखे ख़बर आहे — अहां हिक सुठी जायगिअ में आहियो, असां सभन ते वाहिड़ी कंदा रहियो — उहो ई प्यार, उहो ई ख़याल जे अहां हमेशा असां ते लुटायो हो। अहां मूंला फ़क़त हिक मासी न हुयो। अहां फ़रिश्तो हुयो — हिफ़ाज़त कंदड़, मार्गदर्शक, ऐं हमेशा भलाई चाहिणु वारी।

कुझ यादगिरियूं कदहिं पुराणियूं न थींदियूं आहन। मां अजु भी मुसकाईंदी आहियां जदहिं असांजी रोज़ानी सुभाणी जी ग़ालह याद अची वंजे — अहां लगभग हर डिंह पुछंदा हुयो, "शिखा, तूं अंग्रेज़ी अख़बार छोलाई पढ़ंदी आहीं? तूं हिन्दी घणी पढ़णी कुडहंदी।" जा तदहिं हिक साधारण ग़ालह लगंदी हुई, अजु मुहिंजी अहम यादगिरियून मां हिक आहे।

मूंखे अजु भी अहां जी हर ग़ालह याद आहे — अहां जो प्यार, अहां जी फ़िकर, ऐं जिअं अहां हमेशा मूंला बेहतर चाहियो हो। अहां जूं दुआऊं अजु भी मूंखे राह डिखारींदियूं आहन, ऐं अहां जी मौजूदगी अंवेकन न्ंढन-न्ंढन पलन में महसूस थींदी आहे।

अहां शायद हाणे हिते न आहियो, पर अहां जो प्यार मुहिंजी ज़िन्दगीअ में हमेशा लाई बुणिल आहे।

अजु भी, ऐं हमेशा — अहां जी कमी महसूस थींदी आहे। ❤️

प्यार साथ, शिखा

श्रद्धांजलि tribute श्रद्धांजलि ११ 11 ११
स्कूल में मिले कुछ इनाम तो उन्हीं की लिखी कविताओं से जीते थे। I even won a few awards back in school using the poetry she wrote for me. स्कूल में जे कुझ इनाम मां जीते, सो उन ई जी लिखियल कविता सां जीते।
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इनु मासी के साथ बचपन की कितनी ही प्यारी यादें हैं। बेशक मैं उज्जैन से जल्दी ही दूर हो गया, और बाद के सालों में उतना समय उनके साथ नहीं बिता पाया — पर जब मैं स्कूल में था, मैं अक्सर बड़नगर जाता था, और हर मौक़े पर उज्जैन उनसे मिलने पहुँच जाता था।

वो एक बहुत ही शुद्ध आत्मा थीं। उन्होंने मुझे हमेशा अच्छी बातें सिखाईं, इतिहास के टुकड़े सुनाए, और अपने बचपन की पुरानी कहानियाँ बताईं। एक बात तो पक्की है — उनसे बात करने के बाद मेरे चेहरे पर हमेशा एक बड़ी-सी मुस्कान होती थी।

उन्हें कविता और लेखन में अपनी जगह बनाते देखना मेरे लिए बेहद गर्व की बात थी। बल्कि स्कूल में मिले कुछ इनाम तो उन्हीं की लिखी कविताओं से जीते थे। 🙂

There are so many wonderful memories with Inu Masi from my childhood. Of course, I moved away from Ujjain early on and didn't get to spend as much time with her later in life — but back when I was in school, I used to travel to Badnagar a lot, and would visit her in Ujjain every chance I got.

She was such a pure soul. She always taught me good values, shared bits of history, and told me old stories from their own childhood. One thing I know for sure — I always left with a massive smile on my face after talking to her.

Seeing her make her own space in poetry and writing made me so incredibly proud. In fact, I even won a few awards back in school using the poetry she wrote for me. 🙂

अनुवाद, समीक्षा बाक़ी

इनु मासीअ साथ बचपन जूं घणियूं प्यारियूं यादगिरियूं आहन। बेशक मां उज्जैन खां जल्दी ई दूर थी वियस, ऐं पोइ जे वर्हन में उनहन साथ इतरो वक़्त न गुज़ारी सघियस — पर जदहिं मां स्कूल में हुयस, मां घणो बड़नगर वंजंदो हुयस, ऐं हर मौक़े ते उज्जैन उनहन सां मिलण पहुचंदो हुयस।

हू हिक तमाम साफ़ रूह हुई। हुनन मूंखे हमेशा सुठियूं ग़ालहियूं सिखायूं, इतिहास जा टोटा ब्धायो, ऐं पनहीं बचपन जूं पुराणियूं कहाणियूं सुणायूं। हिक ग़ालह त पक्की आहे — हुनन सां ग़ालह कई के मुहिंजे मूंहन ते हमेशा हिक वडी मुसकान हूंदी हुई।

हुनन खे कविता ऐं लेखन में पनहीं जायगा बणाईंदड़ ब्धंदी मूंखे तमाम घणो फ़ख़र हो। बल्कि स्कूल में मिले कुझ इनाम मां ते उन ई जी लिखियल कविता सां जीते। 🙂

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