आपकी कविताएँ अब हमारे संस्कार हैं — हर पीढ़ी, हर त्योहार, हर शाम। Aapki kavitaayein ab hamaare sanskaar hain — har peedhi, har tyohaar, har shaam. अहाँ जूं कविताऊं हाणे असांजा संस्कार आहन — हर पीढ़ी, हर त्योहार, हर शाम।
प्रिय स्मृतियाँ In loving memory पियारी यादगिरियूं
श्रद्धांजलि Tributes श्रद्धांजलि
परिवार, मित्रों, संपादकों, और पाठकों के स्मरण। From family, friends, editors, and readers across the world. घर वारन, दोस्तन, एडिटरन ऐं पढ़ंदड़न जूं याद।
उनकी क़लम के बिना, हिन्दी जाल-साहित्य का एक कोमल कोना सूना है। Unki qalam ke bina, Hindi jaal-saahitya ka ek komal kona soona hai. उनहीं जी क़लम बगैर, हिन्दी जाल-साहित्यु जो हिक नरम कुणु सुणु आहे।
अनुभूति पर उन्हें वर्षों पढ़ा। उनकी ग़ज़लें मन में ऐसे बसी हैं जैसे माँ की लोरी। Anubhuti par unhein varshon padha. Unki ghazlein man mein aise basi hain jaise maa ki lori. अनुभूतिअ ते उनहीं खे वरहन ताईं पढ़ियो। हुनन जूं ग़ज़लूं मन में हणियूं आहन जिअं अम्मा जी लोरी।
श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहते हैं? परिवार से संपर्क करें। Wish to add a tribute? Please reach out to the family. श्रद्धांजलि डियण चाहियो था? घर वारन सां राबितो करियो।