कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३

मतला सूची Index of first lines मतला सूची

पहली पंक्ति से खोजें By opening line पहिरींऊं सट्र खां ढूंढो

यदि कोई पंक्ति याद हो पर शीर्षक नहीं — यहाँ ६७७ रचनाएँ अपनी पहली पंक्ति से सजी हैं। If you remember a line but not the title — all 677 writings, set in order of their opening lines. जे कोई सट्र याद आहे पर शीर्षक नह — हते ६७७ रचनाऊं पनहीं पहिरीं सट्र खां सजील आहन।

१९ 19 १९
  1. “अरे कृपाराम तुम यहाँ?” विरासत wiraasat विरासत
  2. “अरे शालू दीदी, आप! रिश्तों का बाग rishton kaa baag रिश्तों का बाग
  3. अंतर्घट की प्यास बुझाता, नाम कृष्ण का। नाम कृष्ण का naam kriishn kaa नाम कृष्ण का
  4. अंतर्ज्वाला देश को, जला रही है आज। सभी चाहते ताज sabhee chaahate taaj सभी चाहते ताज
  5. अंतिम भाग ससुराल नहीं जाऊँगी 9 sasuraal naheen jaaoongee 9 ससुराल नहीं जाऊँगी 9
  6. अगर अगर कर्म पर जन का विश्वास होगा agar karm par jan kaa wishvaas hogaa अगर कर्म पर जन का विश्वास होगा
  7. अगर बेटियों पर चर्चा हो betiyon par charchaa ho बेटियों पर चर्चा हो
  8. अगर थे किथे पिणि, चिरागनि जो चर्चो। त छो थे गुलामीय जी रोटिनि जो चर्चों t cho the gulaameey jee rotini jo charchon त छो थे गुलामीय जी रोटिनि जो चर्चों
  9. अगर न सुलझें उलझनें, सब ईश्वर पर छोड़। नित्य प्रार्थना कीजिये nity praarthanaa keejiye नित्य प्रार्थना कीजिये
  10. अगले दिन से सुप्रिया की दिनचर्या में नई कैसेट के गीत सुनना भी शामिल हो गया. उपहार में विनोद की दी हुई कैसेट तो उसके लिए अब हीरे से बढकर मूल्यवान थी. वो फुर्सत के पलों में ही उस कैसेट का अपना मनप्रिय गाना, कोरा कागज़ था...धीमी आवाज़ में बार बार सुना करती. विनोद और उसकी मासूम प्रेम-कहानी खिड़की के रास्ते ताक-झांक, नज़रें मिलाने-झुकाने से आगे की राह पर बढ़ती, उससे पहले ही अचानक सुप्रिया के पिताजी के लिए तबादले का फरमान जारी हो गया. उसने छुआ था भाग 6 usane chuaa thaa bhaag 6 उसने छुआ था भाग 6
  11. अग्नि-बाण बरसे अम्बर अग्नि बाण बरसे अम्बर से agni baan barase ambar se अग्नि बाण बरसे अम्बर से
  12. अनाथालय में पली बढ़ी साँवली-सलोनी कजली के तन का रंग जितना काला था, गुणों का रंग उतना ही उजला. ईश्वर ने उसमें गुण कूट-कूट कर भरे थे. इन्हीं गुणों के कारण ही उसके सास-ससुर ने उसे अपने बेटे विनोद के लिए पसंद किया था. उसकी आवारगी और उच्चश्रंखलता के कारण कोई भला इंसान अपनी बेटी उसके साथ ब्याहना पसंद नहीं करता था। विनोद कजली को बेहद प्यार करता था लेकिन केवल रात के समय, दिन में वो तीसरा रंग /लघुकथा teesaraa rang /laghukathaa तीसरा रंग /लघुकथा
  13. अनाथालय में पली बढ़ी साँवली-सलोनी कजली के तन का रंग जितना काला था, गुणों का रंग उतना ही उजला. ईश्वर ने उसमें गुण कूट-कूट कर भरे थे. इन्हीं गुणों के कारण ही उसके सास-ससुर ने उसे अपने बेटे विनोद के लिए पसंद किया था. उसकी आवारगी और उच्चश्रंखलता के कारण कोई भला इंसान अपनी बेटी उसके साथ ब्याहना पसंद नहीं करता था। विनोद कजली को बेहद प्यार करता था लेकिन केवल रात के समय, दिन में वो उससे बात करना तो दूर, नज़र उठाकर देखता तक न था। कजली को उसका यह व्यवहार किसी दोमुँहे साँप जैसा महसूस होता और वो तिलमिला कर रह जाती थी। तीसरा रंग teesaraa rang तीसरा रंग
  14. अपनी पत्नी व बच्चों के साथ दीपावली की ख़रीदारी के लिए कई घंटों से निकले परेश की नज़रें माल में अचानक कपड़ों के एक स्टाल पर टंगी हुई सुंदर सी साड़ी पर ठहर गईं। उसने पत्नी को आवाज़ देकर बुलाया और पूछा- माँ के लिए maan ke lie माँ के लिए
  15. अपनी बात (प्रकाशित किताब "हौसलों के पंख" से) अपनी बात apanee baat अपनी बात
  16. अपने घड़ों पानी ghadon paanee घड़ों पानी
  17. अरे छाया! तुम यहाँ? काश! बेटियाँ होतीं kaash! betiyaan hoteen काश! बेटियाँ होतीं
  18. अरे शालू दीदी, आप! विनी की शादी के बाद तो शक्ल ही नहीं दिखाई, माँ आपको बहुत याद करती है” खुशी से भरकर जब अमन ने शालिनी का स्वागत किया तो उसकी आँखें भीगे बिना न रह सकीं। हरे भरे रिश्ते hare bhare rishte हरे भरे रिश्ते
  19. अल सुबह देखा था मैंने भोर का तारा। भोर का तारा bhor kaa taaraa भोर का तारा
१८ 18 १८
  1. “आस्था बेटी, अब उठो वहाँ से और नहा धोकर तैयार हो जाओ...जब देखो तब इसी पेड़ के आसपास बनी रहती हो, मिशन स्कूल में पढ़ते-पढ़ते लगता है तुम्हारा दिमाग भी मिशनरी हो चला है...”। उदिता ने भुनभुनाते हुए ६ वीं कक्षा में पढ़ने वाली अपनी बेटी से कहा। पिछले साल क्रिसमस पर उसी ने तो बेटी की ज़िद के कारण फर का यह पेड़ अपनी बगिया में लगवाया था।  वो एक साल के अंदर बेटी में होने वाले आश्चर्य जनक बदलाव से चकित थी, लेकिन अब उसकी अर्धवार्षिक परीक्षाएँ चल रही थीं अतः चुप थी। अभय दान -क्रिसमस विशेष abhay daan -krisamas wishesh अभय दान -क्रिसमस विशेष
  2. “आस्था बेटी, अब उठो वहाँ से और नहा धोकर तैयार हो जाओ...जब देखो तब इसी पेड़ के आसपास बनी रहती हो, मिशन स्कूल में पढ़ते-पढ़ते लगता है तुम्हारा दिमाग भी मिशनरी हो चला है...”। उदिता ने भुनभुनाते हुए ६ वीं कक्षा में पढ़ने वाली अपनी बेटी से कहा। पिछले साल क्रिसमस पर उसी ने तो बेटी की ज़िद के कारण फर का यह पेड़ अपनी बगिया में लगवाया था। वो एक साल के अंदर बेटी में होने वाले आश्चर्य जनक अभय दान abhay daan अभय दान
  3. “आहा! कितना शानदार भवन बनवाया है सुमि! आनंद आ गया... बहुत बहुत बधाई सखी...” गृहप्रवेश के अवसर पर न आ सकने पर खेद प्रगट करती हुई निर्मला बोली। टाट का पैबंद taat kaa paiband टाट का पैबंद
  4. आ गई प्रिय, फिर दिवाली, पर्व पावन है। आ गई प्रिय फिर दिवाली aa gaee priy phir diwaalee आ गई प्रिय फिर दिवाली
  5. आ गया नव वर्ष, हम स्वागत आ गया नव वर्ष aa gayaa naw warsh आ गया नव वर्ष
  6. आ गया फागुन सखी आ गया फागुन सखी aa gayaa phaagun sakhee आ गया फागुन सखी
  7. आँगन-आँगन आशाओं के दीप aashaaon ke deep आशाओं के दीप
  8. आज भोर का तारा छिपा जाने किधर है bhor kaa taaraa chipaa jaane kidhar hai भोर का तारा छिपा जाने किधर है
  9. आज बबिता ने कॉलेज की छुट्टियाँ हो जाने के बावजूद घर आने से इन्कार कर दिया. उसकी अंतिम वर्ष की परीक्षाएँ समाप्त हो चुकी हैं. आज उसे घर वापस आना ही था. फोन करती हूँ तो काट देती है, बात भी नहीं करती...पता नहीं कहाँ जाएगी...चौथी कक्षा में थी, तब से मेरे साथ ही है...मगर जब से हाई स्कूल के बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए छात्रावास में भर्ती किया है, उससे मिलने कम ही जाना हो पाता है. हाँ, वो ज़रूर बिना नागा मैं तुमसे तलाक चाहती हूँ माँ! main tumase talaak chaahatee hoon maan! मैं तुमसे तलाक चाहती हूँ माँ!
  10. आज सच  है। कल हो न हो kal ho n ho कल हो न हो
  11. आज सासु विचित्र विरासत wichitr wiraasat विचित्र विरासत
  12. आत्म -कथ्य मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी-समीक्षाएँ main gazal kahatee rahoongee-sameekshaaen मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी-समीक्षाएँ
  13. आत्म कथ्य-(प्रकाशित किताब से) मेरे बारे में /कल्पना रामानी mere baare men /kalpanaa raamaanee मेरे बारे में /कल्पना रामानी
  14. आपने कुण्डलिया छंद तो बहुत पढ़े होंगे लेकिन विषयगत छंद लेखन कम लेखक ही कर पाते हैं. इस संग्रह में आपको लगभग हर विषय पर कुण्डलिया छंद पढने को मिलेंगे. चूंकि मेरे लेखन की शुरुवात ही छंद सीखने से हुई अतः मेरा पूरा ध्यान व समय इन्हें सहेजने-सँवारने में लग गया. लयबद्ध सरल भाषा में रचे गए ये छंद-गीत आपका मन मोह लेंगे. पाठकों से paathakon se पाठकों से
  15. आया उजला पाख धरा पर शरद पूर्णिमा दूध नहाई sharad poornimaa doodh nahaaee शरद पूर्णिमा दूध नहाई
  16. आशिमा बिटिया के विवाह के साथ ही अमिता के जीवन उस रात का डर /कहानी us raat kaa dar /kahaanee उस रात का डर /कहानी
  17. आशिमा बिटिया के विवाह के साथ ही अमिता के जीवन का उस रात का डर us raat kaa dar उस रात का डर
  18. आसमाँ से धुंध के लौट आए दिन बसंती laut aae din basantee लौट आए दिन बसंती
8
  1. “इतनी सारी सब्जियाँ! और ये मिठाइयाँ...क्या बात है जानेमन, फ्रिज को तो तुमने आज भंडार-गृह ही बना दिया है, मुँह में पानी आ गया”। सुबोध ने पत्नी सुजाता को खुले हुए फ्रिज के सामने विचारमग्न देखकर पूछा। मोह moh मोह
  2. “इस बार तो दादी आपको होली खेलनी ही पड़ेगी। आपने पिछली होली पर मुझसे प्रोमिस किया था न!”“हाँ वो तो किया था, लेकिन बच्ची, मुझे रंगों से सख्त एलर्जी है, अगर त्वचा पर खुजली और जलन होने लगेगी तो क्या तुम्हें अच्छा लगेगा?”वो भला उस मासूम को कैसे बताती कि उसने अपने जीवन में पति के शक्की स्वभाव के चलते उनके अलावा किसी मर्द को अपने गाल तो दूर, भाल पर भी गुलाल का टीका तक लगाने नहीं दिया। अब नए दौर के अलौकिक आनंद alaukik aanand अलौकिक आनंद
  3. इक तेरा मेरा प्यार सखी teraa meraa pyaar sakhee तेरा मेरा प्यार सखी
  4. इक अनजाने शहर में, मन ही केवल मीत। इक अनजाने शहर में ik anajaane shahar men इक अनजाने शहर में
  5. इन्द्र्देव ने भेज दिया धरती को पैगाम dharatee ko paigaam धरती को पैगाम
  6. इस एकांत कक्ष में निर्णायक मंडल के जज और चार सदस्यों में मीटिंग चल रही थी आज यहाँ दो महीने पहले घोषित ‘भारतीय संस्कृति बचाओ’ विषय पर राष्ट्र-स्तरीय काव्य प्रतियोगिता का अंतिम निर्णय होना था.. सदस्यों ने पूरे देश से आई हुई प्रविष्टियों का गहन अध्ययन करके उत्कृष्ट रचनाओं के, रचनाकारों के नाम सहित सूची-पत्र तैयार कर लिये थे. सबने अपनी-अपनी पसंद के अनुसार रचनाओं को १० दस्तखत - लघुकथा dastakhat - laghukathaa दस्तखत - लघुकथा
  7. इस कदर ख्वाब वे सजा बैठे। काश दिखलाए राह साल नया kaash dikhalaae raah saal nayaa काश दिखलाए राह साल नया
  8. इस जनम में अब नहीं अपमान अपना मैं सहूँगी। इस जनम में अब नहीं is janam men ab naheen इस जनम में अब नहीं
1
  1. ईश तुम्हारे द्वार पर, ये कैसा ईश तुम्हारे द्वार पर eesh tumhaare dvaar par ईश तुम्हारे द्वार पर
१५ 15 १५
  1. उगी पुनः नई सुप्रात तल्खियों के अंत की पालकी बसंत की paalakee basant kee पालकी बसंत की
  2. उच्च हिमालय पार कर, मैदानों की ओर। चली मुग्ध भागीरथी chalee mugdh bhaageerathee चली मुग्ध भागीरथी
  3. उड़ परिंदे! उड़ परिंदे ud parinde उड़ परिंदे
  4. उतरी उतरी गंगा स्वर्ग से utaree gangaa svarg se उतरी गंगा स्वर्ग से
  5. उत्तर अंतर्ध्यान हो गए उत्तर अंतर्ध्यान हो गए uttar antardhyaan ho gae उत्तर अंतर्ध्यान हो गए
  6. उनका ख़त आज डाकिया लाया। उनका ख़त आज डाकिया लाया{प्रेम) unakaa kat aaj daakiyaa laayaa{prem) उनका ख़त आज डाकिया लाया{प्रेम)
  7. उमंगों गुलाबी-गुलाबी हुआ आसमाँ है gulaabee-gulaabee huaa aasamaan hai गुलाबी-गुलाबी हुआ आसमाँ है
  8. उमंगों ने बाँधा कुछ ऐसा समाँ है गुलाबी गुलाबी ज़मीं आसमां है gulaabee gulaabee zameen aasamaan hai गुलाबी गुलाबी ज़मीं आसमां है
  9. उस निरुत्तर /लघुकथा niruttar /laghukathaa निरुत्तर /लघुकथा
  10. उस एकांत कक्ष में निर्णायक मंडल के जज और चार सदस्यों में मीटिंग चल रही थी. दस्तखत dastakhat दस्तखत
  11. उस घुमावदार गुफानुमा बाजार से तगड़ी खरीदारी करने के बाद पसीने से लथपथ होतीं सुधा और सुरुचि बेहद थक चुकी थीं. प्यास से बेहाल होकर बाहर आकर इधर उधर नज़र दौड़ाई तो आसपास कोई होटल नज़र नहीं आया, न ही उनमें ढूँढने की शक्ति बाकी थी लेकिन सड़क के उस पार छाया में एक कतार में कुछ ठेलागाड़ियाँ देखकर गला तर करने की उम्मीद लिए फुर्ती से उधर पहुँच गईं. नींबू-पानी, जल-जीरा, लस्सी आदि ठन्डे पेय देखते हुए उनकी नज़रें नारियल-पानी के ठेले पर ठहर गईं. नारियल पानी पीते ही उनकी थकान दूर होने के साथ ही भूख प्यास दोनों से राहत मिल गई. पैसे देते-देते सुधा अपनी आदत के अनुसार नारियल वाले से जानकारी जुटाने लग गई- निरुत्तर niruttar निरुत्तर
  12. उस छोटे से गाँव में इस बार मानसूनी वर्षा न होने से किसान बहुत दुखी और परेशान थे आसपास के जलाशय भी सूनी नज़रों से इस तरह आसमान को निहार रहे थे जैसे बादल उनकी दुर्दशा पर रहम खाकर उनकी प्यास बुझाने दौड़े आएँगे. ऐसी स्थिति तो कभी देखने में नहीं आई. जल की फुहार jal kee phuhaar जल की फुहार
  13. उस दिन सुप्रिया की अचानक आँख खुली तो दंग रह गई। यह क्या? रात के दो बज गए और वो अभी तक बिस्तर पर नहीं गई। उसे याद आया कि बर्तन धोते-धोते वो किसी भी बर्तन पर कभी राख से तो कभी पानी से गणित का सवाल भी हल करने में जुटी थी। कल गणित का मासिक पर्चा है, और वो एक सवाल हल नहीं कर पा रही थी। पिता हमेशा उसकी सहायता किया करते थे लेकिन समयाभाव के कारण उन्होंने भी कह दिया था कि मैं काफी सिखा चुका हूँ अब स्वयं कोशिश करो। उसने छुआ था भाग 2 usane chuaa thaa bhaag 2 उसने छुआ था भाग 2
  14. उस रावण को भूलें किसके हाथ जले रावण kisake haath jale raawan किसके हाथ जले रावण
  15. उसकी अंतरात्मा चीख-चीख कर कह रही थी- अन्नपूर्णा annapoornaa अन्नपूर्णा
3
  1. ऊँची ऊँची इमारतें है, महानगर में यौवन आया mahaanagar men yauwan aayaa महानगर में यौवन आया
  2. ऊँची नीची पगडंडी परचलते जाते पाँवयही हमारा गाँव। हमारा गाँव hamaaraa gaanv हमारा गाँव
  3. ऊँचे पद के मद में जिनके गाँवों में बस गीत रह गए gaanvon men bas geet rah gae गाँवों में बस गीत रह गए
3
  1. ऋतु ऋतु बदली सूरज चला riitu badalee sooraj chalaa ऋतु बदली सूरज चला
  2. ऋतु परिवर्तन अटल हैं, शीत बढ़े या ताप। ऋतु परिवर्तन अटल है riitu pariwartan atal hai ऋतु परिवर्तन अटल है
  3. ऋतु बसंत की आ गई, उत्सव का है दौर। बसंती दोहे basantee dohe बसंती दोहे
6
  1. “एक बात बताइए योगिता जी, जब हमारी शादी तय होकर सगाई की रस्म भी पूरी हो चुकी है, तो फिर आपके माँ-पिता ने हमें बाहर घूमने जाने की अनुमति क्यों नहीं दी? अगर उन्हें अपने होने वाले दामाद पर विश्वास नहीं तो विवाह के बाद अपनी बेटी के भविष्य के प्रति वे आश्वस्त कैसे हो सकते हैं?” ऐतराज़ aitaraaz ऐतराज़
  2. एक अपने अपने हिस्से की धूप apane apane hisse kee dhoop अपने अपने हिस्से की धूप
  3. एक छोटे से स्टेशन पर गाड़ी रुकी तो सामने ही गुमटी पर चाय बनती देखकर अभिनव नीचे उतरा. अपना छोटा सा बैग उसने हाथ में ही ले लिया था. चाय पीकर जैसे ही पैसे निकालने लगा, गाड़ी सरकने लग गई. चाय वाला चिल्लाया- अपने-अपने हिस्से की धूप (पुरस्कृत कहानी) apane-apane hisse kee dhoop (puraskriit kahaanee) अपने-अपने हिस्से की धूप (पुरस्कृत कहानी)
  4. एक पावन मंत्र गूँजा नव वर्ष आया naw warsh aayaa नव वर्ष आया
  5. एक साल के प्रियम पाहुने नवल वर्ष तव अभिनंदन nawal warsh taw abhinandan नवल वर्ष तव अभिनंदन
  6. एक सूरज सृष्टि  में एक सूरज सृष्टि में ek sooraj sriishti men एक सूरज सृष्टि में
1
  1. ओ निर्मोही! तुझे गाँव कुछ यादें दिला रहा है। gaanv kuch yaaden dilaa rahaa hai गाँव कुछ यादें दिला रहा है।
४३ 43 ४३
  1. “किसका फोन था सोनल? अरे, यह तुम्हारा चेहरा क्यों उतरा हुआ है, क्या हुआ?” अखबार समेटकर रखते हुए विशाल ने पत्नी की ओर देखते हुए पूछा। अपना खून apanaa khoon अपना खून
  2. “क्या सोच रही हो वाणी अम्मा! अब तुम्हारा सुपुत्र पीली साड़ी peelee saadee पीली साड़ी
  3. कंत फूल बेला के बिना phool belaa ke binaa फूल बेला के बिना
  4. कंत लौटा फूल बेला के बिना फूल बेला के बिना{प्रेम) phool belaa ke binaa{prem) फूल बेला के बिना{प्रेम)
  5. कथा जन्मे थे गोपाल janme the gopaal जन्मे थे गोपाल
  6. कब कब मिलोगे मीत kab miloge meet कब मिलोगे मीत
  7. कभी कभी दर बंद होते हैं... kabhee dar band hote hain कभी दर बंद होते हैं...
  8. कभी तो दिन वो आएगा कभी तो दिन वो आएगा kabhee to din wo aaegaa कभी तो दिन वो आएगा
  9. कमाल है! कमाल है kamaal hai कमाल है
  10. कर सखी री दीप जला sakhee ree deep jalaa सखी री दीप जला
  11. कर में बसते देवता, कर दर्शन नित प्रात कर में बसते देवता kar men basate dewataa कर में बसते देवता
  12. करना सुनो हे नाग देवता suno he naag dewataa सुनो हे नाग देवता
  13. करि सुहिणी, दियड़ो बार! suhinee, diyado baar! सुहिणी, दियड़ो बार!
  14. कर्म बोध से नज़र मन जोगी मत बन man jogee mat ban मन जोगी मत बन
  15. कल जंगलों का मातम, देखा क़रीब से। जंगलों का मातम jangalon kaa maatam जंगलों का मातम
  16. कल जंगलों का मातम, देखा क़रीब से। कल जंगलों का मातम, देखा करीब से kal jangalon kaa maatam, dekhaa kareeb se कल जंगलों का मातम, देखा करीब से
  17. कल तक कलकल गान सुनाता, बहता पानी छंद सब भूला पानी chand sab bhoolaa paanee छंद सब भूला पानी
  18. कल पुर्जों पर ही यह जीवन, नई सदी में ज़रा सोचिए naee sadee men zaraa sochie नई सदी में ज़रा सोचिए
  19. कल पुर्जों पर, ही यह जीवन खेत-खेत उपजेगा सोना khet-khet upajegaa sonaa खेत-खेत उपजेगा सोना
  20. कल हुआ जो वाक़या, अच्छा लगा। हाथ तेरा थामना अच्छा लगा haath teraa thaamanaa achchaa lagaa हाथ तेरा थामना अच्छा लगा
  21. कल हुआ जो वाक़या, अच्छा लगा। हाथ तेरा थामना{प्रेम) haath teraa thaamanaa{prem) हाथ तेरा थामना{प्रेम)
  22. कल्पना जी के इस काव्य संग्रह का पाठ एवं अनुशीलन अनुभूति के कई आयाम खोलता है जो जीवन के लगभग सभी सन्दर्भों को कहीं न कहीं स्पर्श करते प्रतीत होते हैं। यह स्पर्श भावनात्मक तो है ही संवेदना के उदात्त स्तरों को भी रेखांकित करता है। साफ सुथरा छन्द विधान और सुगठित शब्दयोजना कल्पना जी के काव्य प्रतिभा के सुव्यक्त हस्ताक्षर हैं। इनके प्रवाह में लयभंगता नहीं आने पाती जो गीतिकाव्य जीवन के विविध आयामों का भावनात्मक स्पर्श -समीक्षा / डॉ़ अमिताभ त्रिपाठी jeewan ke wiwidh aayaamon kaa bhaawanaatmak sparsh -sameekshaa / dॉ़ amitaabh tripaathee जीवन के विविध आयामों का भावनात्मक स्पर्श -समीक्षा / डॉ़ अमिताभ त्रिपाठी
  23. कल्पना रामानी कुमार रवीन्द्र का नवगीत संग्रह 'पंख बिखरे रेत पर'/शोध पत्र kumaar raweendr kaa nawageet sangrah 'pankh bikhare ret par'/shodh patr कुमार रवीन्द्र का नवगीत संग्रह 'पंख बिखरे रेत पर'/शोध पत्र
  24. कल्पना रामानी एक जीता जागता चमत्कार--पूर्णिमा वर्मन समीक्षा- पूर्णिमा वर्मन sameekshaa- poornimaa warman समीक्षा- पूर्णिमा वर्मन
  25. कल्पना रामानी जी इंटरनेट और वेब का एक जीता जागता चमत्कार हैं। अगर इंटरनेट न होता तो हम इस चमत्कार से वंचित रह जाते। एक ऐसा चमत्कार जो देखते ही देखते एक सामान्य गृहणी को जानी-मानी रचनाकार के रूप में हम सबके सामने प्रकट कर दे। ऐसा कहना उनके अपने श्रम को नकारना नहीं है, बेशक उनमें प्रतिभा, लगन और मेधा का बीज कहीं छुपा था जो इंटरनेट की विभिन्न धाराओं से सिंचकर पल्लवित हो गया। कल्पना रामानी एक जीता जागता चमत्कार--पूर्णिमा वर्मन//समीक्षा-"हौसलों के पंख" kalpanaa raamaanee ek jeetaa jaagataa chamatkaar--poornimaa warman//sameekshaa-"hausalon ke pankh" कल्पना रामानी एक जीता जागता चमत्कार--पूर्णिमा वर्मन//समीक्षा-"हौसलों के पंख"
  26. कल्ह हिक-हिक बूँद पियारयो पाणी hik-hik boond piyaarayo paanee हिक-हिक बूँद पियारयो पाणी
  27. कल्ह झंगलनि में jhangalani men झंगलनि में
  28. कह रहीं बहती हवाएँ, आज हैं आज़ाद आज हैं आज़ाद हम//ग़ज़ल// aaj hain aazaad ham//gazal// आज हैं आज़ाद हम//ग़ज़ल//
  29. कहते चम्पा पेड़ को, जंगल का सिरमौर। चलता रहता साल भर, गुल खिलने का दौर। इसके फूलों का बड़ा, अलग एक अंदाज़। एक वृंत पर हर सुमन, करता एकल राज। यूँ तो खिलते पुष्प ये, पूरे बारह मास। लेकिन अंत बसंत का, इनका मौसम खास। गर्मी इनकी मीत है, इन्हें धूप से नेह। निखरे तपकर ताप से, कंचन वर्णी देह। जन जीवन जब छेड़ता, धूप-स्वेद से जंग। वन्य जीव कहते चम्पा पेड़ को kahate champaa ped ko कहते चम्पा पेड़ को
  30. कागा रे! मुंडेर छोड़ दे कागा रे! kaagaa re! कागा रे!
  31. कालु मिठिड़ो अबाणो mithido abaano मिठिड़ो अबाणो
  32. किसे सुनाएँ व्यथा वतन की। किसे सुनाएँ व्यथा वतन की kise sunaaen wyathaa watan kee किसे सुनाएँ व्यथा वतन की
  33. कुंडलिया छंद जब अँधियारा पाप का jab andhiyaaraa paap kaa जब अँधियारा पाप का
  34. कुंडलिया छंद जगमग तारों से भरा jagamag taaron se bharaa जगमग तारों से भरा
  35. कुंडलिया छंद कथा पुरातन कह रहा kathaa puraatan kah rahaa कथा पुरातन कह रहा
  36. कुंडलिया छंद पत्र लिखा है पुत्र ने patr likhaa hai putr ne पत्र लिखा है पुत्र ने
  37. कुंडलिया छंद उत्सव खूब मनाइये utsaw khoob manaaiye उत्सव खूब मनाइये
  38. कुछ कुछ पा लेना सब कुछ खोने से अच्छा है kuch paa lenaa sab kuch khone se achchaa hai कुछ पा लेना सब कुछ खोने से अच्छा है
  39. कुण्डलिया छंद-विधान कुण्डलिया मात्रिक छंद है। यह एक दोहा और दो रोला के मेल से बनता है। इसके प्रथम दो चरण दोहा के होते हैं और बाद के चार चरण रोला छंद के होते हैं। इस प्रकार कुण्डलिया छह चरणों में लिखा जाता है और इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं, किन्तु इनका क्रम सभी चरणों में समान नहीं होता। दोहा के प्रथम एवं तृतीय चरण में जहाँ 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती कुण्डलिया छंद के मूलभूत नियम kundaliyaa chand ke moolabhoot niyam कुण्डलिया छंद के मूलभूत नियम
  40. कुदरत के कायदों कोपल में भुला दियाविष बीज बोके मानव!सावन सुखा दिया। क्या कुछ नहीं मिला था,पुरखों से आपको,अमृत कलश से सींचा,अपने विनाश को। जन्नत सी मेदिनी को,दोजख बना दिया। बूँदें बचा न पाये,बादल भी क्या करे?कब, क्यों, कहाँ वो बरसे,क्यों फिक्र वो करे? बल खाते निर्झरों को,निर्जल बना दिया। जग बन गया मशीनीमौसम धुआँ धुआँ,दम घोंटती हवाएँ,विष सावन सुखा दिया saawan sukhaa diyaa सावन सुखा दिया
  41. कोटि हस्ताक्षर हिन्दी के hastaakshar hindee ke हस्ताक्षर हिन्दी के
  42. क्या कभी सोचा कि क्या कभी सोचा? kyaa kabhee sochaa? क्या कभी सोचा?
  43. क्यों चले आए शहर, क्यों चले आए शहर kyon chale aae shahar क्यों चले आए शहर
२१ 21 २१
  1. खिल उठा गुलशन, खिल उठा गुलशन khil uthaa gulashan खिल उठा गुलशन
  2. खुद थामो पतवार बेटियों खुद थामों पतवार बेटियों khud thaamon patawaar betiyon खुद थामों पतवार बेटियों
  3. खुद थामो पतवार, खुद थामो पतवार बेटियों... khud thaamo patawaar betiyon खुद थामो पतवार बेटियों...
  4. खुदा खुदा से खुशी की लहर माँगती हूँ khudaa se khushee kee lahar maangatee hoon खुदा से खुशी की लहर माँगती हूँ
  5. खुदा हू ज़मानों घुराँ थी hoo zamaanon ghuraan thee हू ज़मानों घुराँ थी
  6. खुदा खाँ सदा मींहु सुख जो थी चाहियाँ उजालो थी चाहियाँ ujaalo thee chaahiyaan उजालो थी चाहियाँ
  7. खुदा से खुशी की लहर माँगती हूँ। खुदा से खुशी की khudaa se khushee kee खुदा से खुशी की
  8. खुदा से माँगा मेहर के सिवा कुछ और कुछ और नहीं kuch aur naheen कुछ और नहीं
  9. खुल खिड़की बाँस की khidakee baans kee खिड़की बाँस की
  10. खुली घुमण जी आ वेला ghuman jee aa welaa घुमण जी आ वेला
  11. खुलीं खुलीं पलकें भोर की khuleen palaken bhor kee खुलीं पलकें भोर की
  12. खुलीं पलकें भोर की  पग भ्रमण-पथ bhraman-path भ्रमण-पथ
  13. खुल्या मिल्यो खतु जो तुहिंजों milyo khatu jo tuhinjon मिल्यो खतु जो तुहिंजों
  14. खुशबू खुशबू देते कोमल फूलों जैसे रिश्ते khushaboo dete komal phoolon jaise rishte खुशबू देते कोमल फूलों जैसे रिश्ते
  15. खुशबू खुशबू से महकाओ मन khushaboo se mahakaao man खुशबू से महकाओ मन
  16. खुशबू से महकाओ मन, बागों की तरहा। ख़ुशबू से महकाओ मन kushaboo se mahakaao man ख़ुशबू से महकाओ मन
  17. खुशियों की नव-ज्योत जगाएँ, नए साल में। नए साल में nae saal men नए साल में
  18. खेतों ने ख़त लिखा खेतों ने ख़त लिखा सूर्य को kheton ne kat likhaa soory ko खेतों ने ख़त लिखा सूर्य को
  19. खेतों ने ख़त लिखा सूर्य को खेतों ने खत लिखा kheton ne khat likhaa खेतों ने खत लिखा
  20. खोलो खोलो मन के द्वार बंद क्यों kholo man ke dvaar band kyon खोलो मन के द्वार बंद क्यों
  21. ख्यात ख्यात हुए तो क्या हुआ khyaat hue to kyaa huaa ख्यात हुए तो क्या हुआ
३० 30 ३०
  1. गंध-माटी गर्व-गौरव सिन्धु, हिन्दी garv-gauraw sindhu, hindee गर्व-गौरव सिन्धु, हिन्दी
  2. गगन में छाए हैं बादल, गगन में छाए हैं बादल gagan men chaae hain baadal गगन में छाए हैं बादल
  3. गजल द्वार पर दस्तक हुई dvaar par dastak huee द्वार पर दस्तक हुई
  4. गणपति पूजन पर्व से, फैला जग में ओज। गणपति पूजन पर्व से ganapati poojan parv se गणपति पूजन पर्व से
  5. गरमी के महिला-मण्डल mahilaa-mandal महिला-मण्डल
  6. गर्दिशों के भूलकर शिकवे गिले, आस के नवगीत गाएँ aas ke nawageet gaaen आस के नवगीत गाएँ
  7. गर्दिशों के भूलकर शिकवे गिले, चलो नवगीत गाएँ chalo nawageet gaaen चलो नवगीत गाएँ
  8. गर्भ में ही काटकर बेटियाँ होंगी न जब/ग़ज़ल betiyaan hongee n jab/gazal बेटियाँ होंगी न जब/ग़ज़ल
  9. गर्भ में ही काटकर, अपनी बेटियाँ होंगी न जब betiyaan hongee n jab बेटियाँ होंगी न जब
  10. गर्म धूप में ढूँढ रहे पग नर्म छाँव का शीतल टुकड़ा। गर्म धूप में ढूँढ रहे पग.... garm dhoop men dhoondh rahe pag गर्म धूप में ढूँढ रहे पग....
  11. गर्मियों पेड़ पावन नीम का//गज़ल// ped paawan neem kaa//gazal// पेड़ पावन नीम का//गज़ल//
  12. गर्मियों की शान है, ठंडी हवा हर पेड़ की। ठंडी हवा हर पेड़ की thandee hawaa har ped kee ठंडी हवा हर पेड़ की
  13. गर्मी की स्वाद /लघुकथा svaad /laghukathaa स्वाद /लघुकथा
  14. गर्मी की एक शाम को रमा चौपाटी पर अपने पति अमित के साथ चाट का आनंद ले रही थी, तभी वहाँ एक ७-८ वर्षीय फटेहाल बालक आया और जूठी प्लेटों की ओर इशारा करके चाट वाले से बोला- “बाबूजी, ये प्लेटें धो दूँ? सुबह से भूखा हूँ लेकिन काम नहीं मिला”। स्वाद svaad स्वाद
  15. गर्मी में देखो सखी, तरणताल का जोश। गर्मी करे विहार garmee kare wihaar गर्मी करे विहार
  16. गहरे मेकअप और वज़नदार वस्त्राभूषणों से लदी-फँदी ये चारों सहेलियाँ वैसे तो मिलते ही चहकने लगती थीं और बातों से फुर्सत ही नहीं मिलती थी, लेकिन आज पास-पास बैठी होने के बावजूद इन्हें आपस में बातें करने की फुर्सत नहीं थी क्योंकि आज वे एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए आई थीं। लेकिन हाँ, बार-बार अपने पर्स से छोटा सा आइना निकालकर विभिन्न कोणों से खुद को निहारने के बाद कुछ सुनने की चाह में कनखियों से एक दूसरी को अवश्य देख लेती थीं। सहेलियाँ saheliyaan सहेलियाँ
  17. गाँवों के पंछी उदास हैं गाँवों के पंछी उदास हैं gaanvon ke panchee udaas hain गाँवों के पंछी उदास हैं
  18. गाड़ी आगे बढ़ी जा रही थी और विचारों में डूबी हुई सरला देवी के अंतर्मन का एक हिस्सा पीछे छूटती हुई वस्तुओं के साथ ही छूटा जा रहा था। उसने ठंडी साँस लेकर सीट पर पैर फैलाए ही थे कि बहू की आवाज़ से उसका ध्यान टूट गया. जहाँ हम जा रहे हैं jahaan ham jaa rahe hain जहाँ हम जा रहे हैं
  19. गाड़ी आगे बढ़ी जा रही थी और विचारों में डूबी हुई सरला देवी के अंतर्मन का एक हिस्सा पीछे छूटती हुई वस्तुओं के साथ ही छूटा जा रहा था। उसने ठंडी साँस लेकर सीट पर पैर फैलाए ही थे कि बहू की आवाज़ से उसका ध्यान टूट गया.“माँ जी, आप भोजन कर लीजिये, मैं अवि को खिला देती हूँ फिर उसे अपने पास ही सुला दीजियेगा...निखिल और मैं बाद में खा लेंगे”सरला देवी ने चुपचाप भोजन ग्रहण करके अपने छः वर्षीय पोते अविनाश कहानी अमन-वन की kahaanee aman-wan kee कहानी अमन-वन की
  20. गाड़ी जैसे ही प्लेटफोर्म पर रुकी, विचारों के जाल में उलझे मनोज ने तेज़ी से अपना बैग उठाकर कंधे पर टांगा और हाथ में एक पीले रंग की कपड़े की पोटली में बंधा हुआ मृत पिता का अस्थि-कलश सावधानी पूर्वक उठाकर तेज़ी से कदम बढ़ाए. उसके साथ उसका हम उमर ममेरा भाई भानु भी था. वो निकट के शहर से अपने माँ-पिता के साथ ही गमी में शामिल होने चला आया था ताकि पिता की अचानक मृत्यु से दुखी मनोज के साथ वापसी टिकट -कहानी waapasee tikat -kahaanee वापसी टिकट -कहानी
  21. गाड़ी जैसे ही प्लेटफोर्म पर रुकी, विचारों के जाल में उलझे मनोज ने तेज़ी से अपना बैग उठाकर कंधे पर टांगा और हाथ में एक पीले रंग की कपड़े की पोटली में बंधा हुआ मृत पिता का अस्थि-कलश सावधानी पूर्वक उठाकर तेज़ी से कदम बढ़ाए. उसके साथ उसका हम उमर ममेरा भाई भानु भी था. वो निकट के शहर से अपने माँ-पिता के साथ ही गमी में शामिल होने चला आया था ताकि पिता की अचानक मृत्यु से दुखी मनोज के साथ रहकर उसे सांत्वना देकर अवसादग्रस्त होने से बचा सके. कृषि-कर्मी माँ पिता का इकलौता पुत्र मनोज एक सीधा- सादा कम पढ़ा लिखा युवक था और अपने पिता के साथ खेतों पर काम करता था, जबकि भानु शहर के कोलेज में अध्ययन-रत द्वितीय वर्ष का छात्र था. उन्हें हरिद्वार पहुँचकर गंगा में अस्थि-विसर्जन करके अगली गाड़ी से वापस लौटना था. वापसी टिकट (पुरस्कृत कहानी ) waapasee tikat (puraskriit kahaanee ) वापसी टिकट (पुरस्कृत कहानी )
  22. गीत मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी main gazal kahatee rahoongee मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी
  23. गीत सुनो सलोनी -गीत suno salonee -geet सुनो सलोनी -गीत
  24. गीत मैं रचती रहूँगी, मीत मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी{प्रेम) main gazal kahatee rahoongee{prem) मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी{प्रेम)
  25. गुन स्वतन्त्रता गान, तिरंगा तिरंगा लहर लहर लहराया tirangaa lahar lahar laharaayaa तिरंगा लहर लहर लहराया
  26. गुल रंगों भरा मौसम rangon bharaa mausam रंगों भरा मौसम
  27. गुलमोहर की छाँव, गाँव में गुलमोहर की छाँव गाँव में gulamohar kee chaanv gaanv men गुलमोहर की छाँव गाँव में
  28. गोठु छदे कल्ह पहुतो नींगरु शहरि पराए पहुतो नींगरु शहरि पराए pahuto neengaru shahari paraae पहुतो नींगरु शहरि पराए
  29. ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी नीम की शीतल हवा neem kee sheetal hawaa नीम की शीतल हवा
  30. ग्रीष्म ऋतु में संगिनी सी, नीम की शीतल हवा नीम की शीतल हवा//गज़ल// neem kee sheetal hawaa//gazal// नीम की शीतल हवा//गज़ल//
5
  1. घटना बढ़ना दिन का दिनकर मेहनत की हुई डोर खफा mehanat kee huee dor khaphaa मेहनत की हुई डोर खफा
  2. घटे गुल खिले बसंती gul khile basantee गुल खिले बसंती
  3. घड़ा घड़ा देखकर प्यासा कौवा ghadaa dekhakar pyaasaa kauwaa घड़ा देखकर प्यासा कौवा
  4. घर हर खुशी तुमसे पिता har khushee tumase pitaa हर खुशी तुमसे पिता
  5. घर के तरह-तरह मातृ-मन maatrii-man मातृ-मन
9
  1. चर्चा घर-घर में चली, आया साल नवीन आया साल नवीन aayaa saal naween आया साल नवीन
  2. चलो सहेली बाग में, फागुन के दिन फागुन के दिन चार phaagun ke din chaar फागुन के दिन चार
  3. चलो हर कदम सँभल के, कहीं पग फिसल चलो हर कदम सँभलके//गज़ल// chalo har kadam sanbhalake//gazal// चलो हर कदम सँभलके//गज़ल//
  4. चवनि पया हथ बधी, असाँखाँ रामु रुठो आ। हिकु आईनो सभिनि दिनो आ hiku aaeeno sabhini dino aa हिकु आईनो सभिनि दिनो आ
  5. चारों तरफ अँधेरा छाया हुआ था, धुआँधार बारिश से नदी नाले उफान पर थे। बादल और बिजली के  गरजने-चमकने में होड़ लगी हुई थी। लगता था जैसे आज ही अपने सारे अरमान पूरे करने को उद्यत हों। सुप्रिया ने एक हाथ पर किताबों से भरा हुआ पोलीथिन का बैग जमाया और एक हाथ में छाता लिया फिर जल्दी जल्दी पग बढ़ाती हुई चल दी। उसने छुआ था भाग 3 usane chuaa thaa bhaag 3 उसने छुआ था भाग 3
  6. चाह चाह में जिसकी चले थे chaah men jisakee chale the चाह में जिसकी चले थे
  7. चाह हमारी हो चाह हमारी हो यही chaah hamaaree ho yahee चाह हमारी हो यही
  8. चीखें, रुदन, कराहें, आहें मद्य निषेध सजा पन्नों पर mady nishedh sajaa pannon par मद्य निषेध सजा पन्नों पर
  9. चुपके-चुपके चुपके-चुपके चैत ने chupake-chupake chait ne चुपके-चुपके चैत ने
१२ 12 १२
  1. छंद त्रिभंगी : एक परिचय छंद त्रिभंगी//एक परिचय chand tribhangee//ek parichay छंद त्रिभंगी//एक परिचय
  2. छंद रचे दोहे रचे, रचे अनगिनत गीत। बंजारा मन बढ़ चला... banjaaraa man bढ़ chalaa बंजारा मन बढ़ चला...
  3. छदे छदे ही शहरु वञु तूँ स्याणा पखीयड़ा chade hee shaharu wanu toon syaanaa pakheeyadaa छदे ही शहरु वञु तूँ स्याणा पखीयड़ा
  4. छन्न सार छंद-कल की पीड़ित नारी saar chand-kal kee peedit naaree सार छंद-कल की पीड़ित नारी
  5. छन्न सार छंद-यह सर्कस का खेला saar chand-yah sarkas kaa khelaa सार छंद-यह सर्कस का खेला
  6. छन्न पकैया, छन्न पकैया, उड़े रंग के बादल। सार छंद-छन्न पकैया,उड़े रंग के बादल saar chand-chann pakaiyaa,ude rang ke baadal सार छंद-छन्न पकैया,उड़े रंग के बादल
  7. छन्न पकैया, छन्न पकैया, दिन कैसे ये आए। सार छंद-दिन कैसे ये आए saar chand-din kaise ye aae सार छंद-दिन कैसे ये आए
  8. छाँव निगलकर हँसता सूरज, छाँव निगलकर हँसता सूरज chaanv nigalakar hansataa sooraj छाँव निगलकर हँसता सूरज
  9. छिपा हुआ रक्षाबंधन का, सार रेशमी प्यार रेशमी डोरी में pyaar reshamee doree men प्यार रेशमी डोरी में
  10. छीन सकता है भला नसीब naseeb नसीब
  11. छीन सकता है भला कोई किसी का क्या नसीब? छीन सकता है भला कोई किसी का क्या नसीब cheen sakataa hai bhalaa koee kisee kaa kyaa naseeb छीन सकता है भला कोई किसी का क्या नसीब
  12. छोड़ा गाँव, चले पाँव शहर, क्या होगा? क्या होगा? kyaa hogaa? क्या होगा?
४९ 49 ४९
  1. जंगल जंगल चीखा चली कुल्हाड़ी jangal cheekhaa chalee kulhaadee जंगल चीखा चली कुल्हाड़ी
  2. जंगल चीखा चली कुल्हाड़ी जंगल चीखा jangal cheekhaa जंगल चीखा
  3. जंगल में अतिक्रमण की, जब से सुलगी आग। जंगल में अतिक्रमण की... jangal men atikraman kee जंगल में अतिक्रमण की...
  4. जतन कब आएँगे अच्छे दिन kab aaenge achche din कब आएँगे अच्छे दिन
  5. जदहिं जदहिं सुबुह जी निंड्र खुले थी jadahin subuh jee nindr khule thee जदहिं सुबुह जी निंड्र खुले थी
  6. जनसंख्या जनसंख्या की वृद्धि का janasankhyaa kee wriiddhi kaa जनसंख्या की वृद्धि का
  7. जन्मदाता हे पिता तुम  भूमि पर वरदान हो जन्मदाता हे पिता janmadaataa he pitaa जन्मदाता हे पिता
  8. जब जब कलम को थामती मेरी गजल है jab kalam ko thaamatee meree gajal hai जब कलम को थामती मेरी गजल है
  9. जब वाह सुनने को अड़ा है आइना waah sunane ko adaa hai aainaa वाह सुनने को अड़ा है आइना
  10. जब जब ताप कभी न धूमिल होना चम्पा kabhee n dhoomil honaa champaa कभी न धूमिल होना चम्पा
  11. जब जब ताप बढ़ेगा चम्पा कभी न धूमिल होना चंपा kabhee n dhoomil honaa chanpaa कभी न धूमिल होना चंपा
  12. जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी jab talak hai dam, kalam chalatee rahegee जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी
  13. जब धरा पर जब धरा पर धूम से jab dharaa par dhoom se जब धरा पर धूम से
  14. जब ब्रह्मा ने था रचा, सुंदर यह संसार। नारी सदा महान naaree sadaa mahaan नारी सदा महान
  15. जब वनों में गुनगुनातीं, गर्मियाँ फूलों भरी। डालियाँ फूलों भरी daaliyaan phoolon bharee डालियाँ फूलों भरी
  16. जब वनों में गुनगुनातीं, गर्मियाँ फूलों भरी। डालियाँ फूलों भरी//गज़ल// daaliyaan phoolon bharee//gazal// डालियाँ फूलों भरी//गज़ल//
  17. जब से आए शहर में,लेकर धन का रोग खोए खोए लोग khoe khoe log खोए खोए लोग
  18. जब से कर ने गही लेखनी जब से कर ने गही लेखनी jab se kar ne gahee lekhanee जब से कर ने गही लेखनी
  19. जब से कर ने गही लेखनी सखी लेखनी sakhee lekhanee सखी लेखनी
  20. जब से डाला शीत ने, आकर पुनः पड़ाव। जलते हुए अलाव jalate hue alaaw जलते हुए अलाव
  21. जब-जब जब जब नींद बुलाऊँ, चलकर आतीं यादें jab jab neend bulaaoon, chalakar aateen yaaden जब जब नींद बुलाऊँ, चलकर आतीं यादें
  22. जल बरबाद न कीजिये, जानें इसका मोल। बूँद-बूँद अनमोल boond-boond anamol बूँद-बूँद अनमोल
  23. जल बरसाओ मेघ रे, मुनिया बड़ी उदास। जल बरसाओ मेघ रे jal barasaao megh re जल बरसाओ मेघ रे
  24. जहिंजे जहिंजे मन में सच जो सागरु jahinje man men sach jo saagaru जहिंजे मन में सच जो सागरु
  25. जागो जागो भारत वासियों jaago bhaarat waasiyon जागो भारत वासियों
  26. जाने कौन दिशा से आए सावन का सत्कार saawan kaa satkaar सावन का सत्कार
  27. जितनी सुबह की सैर subah kee sair सुबह की सैर
  28. जिनके जिनके मन में सच की सरिता बहती है jinake man men sach kee saritaa bahatee hai जिनके मन में सच की सरिता बहती है
  29. जिनके मन में सच की सरिता बहती है सच की सरिता sach kee saritaa सच की सरिता
  30. जिनसे जुड़तीं कई इमारतें जुड़े हुए फुटपाथों से jude hue phutapaathon se जुड़े हुए फुटपाथों से
  31. जिनसे जुड़तीं कई इमारतें फुटपाथों से phutapaathon se फुटपाथों से
  32. जिस घर सजती वाटिका, संग स्नेह के फूल। जिस घर सजती वाटिका jis ghar sajatee waatikaa जिस घर सजती वाटिका
  33. जिस तरह साहित्य एवं साहित्यकार/ मेरा परिचय सिंधु केसरी के चेटी-चंड विशेषांक में saahity ewan saahityakaar/ meraa parichay sindhu kesaree ke chetee-chand wisheshaank men साहित्य एवं साहित्यकार/ मेरा परिचय सिंधु केसरी के चेटी-चंड विशेषांक में
  34. जिसके जिसके कर कमलों से ये घर स्वर्ग सा बना jisake kar kamalon se ye ghar svarg saa banaa जिसके कर कमलों से ये घर स्वर्ग सा बना
  35. जिसके कर कमलों से यह घर मातृ-वंदना maatrii-wandanaa मातृ-वंदना
  36. जिसको चाहा था तुम वही हो क्या? जिसको चाहा था तुम वही हो क्या jisako chaahaa thaa tum wahee ho kyaa जिसको चाहा था तुम वही हो क्या
  37. जिसे पुरखों, वो अपनापन कहाँ है wo apanaapan kahaan hai वो अपनापन कहाँ है
  38. जिसे भूले, तुमको, वही ढूँढती है। ज़िंदगी ढूँढती है zindagee dhoondhatee hai ज़िंदगी ढूँढती है
  39. जींअ केदी सूँह वधाए धरती kedee soonh wadhaae dharatee केदी सूँह वधाए धरती
  40. जीवन भर जिसने दी छाया करनी का फल धरणी देगी karanee kaa phal dharanee degee करनी का फल धरणी देगी
  41. जूझती थी बेड़ियों से, जो कभी लाचार हिन्दी। पहला प्यार हिन्दी pahalaa pyaar hindee पहला प्यार हिन्दी
  42. जो ग़ज़लें रोज़ वही कहता है gazalen roz wahee kahataa hai ग़ज़लें रोज़ वही कहता है
  43. जो जो रस्ते क्रूर होते कंटकों वाले jo raste kroor hote kantakon waale जो रस्ते क्रूर होते कंटकों वाले
  44. जो दुश्मन से आंख मिलाते भारत मां के अमर जवान bhaarat maan ke amar jawaan भारत मां के अमर जवान
  45. जो बतियाते सिर्फ कलम से, अँधियारों में। चर्चित होंगे नाम विश्व में charchit honge naam wishv men चर्चित होंगे नाम विश्व में
  46. जो रस्मों को मन से माने, पावन होती प्रीत वही तो paawan hotee preet wahee to पावन होती प्रीत वही तो
  47. ज्यों ही मौसम में नमी होने लगी। खुशनुमा यह ज़िंदगी होने लगी khushanumaa yah zindagee hone lagee खुशनुमा यह ज़िंदगी होने लगी
  48. ज्योति-दीपक ज्योति-दीपक सौख्य का उपहार दीवाली jyoti-deepak saukhy kaa upahaar deewaalee ज्योति-दीपक सौख्य का उपहार दीवाली
  49. ज्योति-पर्व आया घर-घर दीप जले ghar-ghar deep jale घर-घर दीप जले
1
  1. झगड़ो टेरि काँग तूँ दिसी कुननि में teri kaang toon disee kunani men टेरि काँग तूँ दिसी कुननि में
4
  1. टिके जय बोले जो सत्य की jay bole jo saty kee जय बोले जो सत्य की
  2. टुकुर टुकुर कर नन्ही चिड़िया नन्ही आशा nanhee chidiyaa nanhee aashaa नन्ही चिड़िया नन्ही आशा
  3. टुकुर टुकुर कर ताके चिड़िया नन्हीं चिड़िया नन्हीं आशा nanheen chidiyaa nanheen aashaa नन्हीं चिड़िया नन्हीं आशा
  4. ट्राय   दो दिन बाद ही शुभदा का विवाह है, आज मेहंदी की रस्म के लिए आमंत्रित की हुई सखियाँ ढोलक की थाप पर झूम रही थीं, मंगल गीत गाए जा रहे थे. उसके सपनों का राजकुमार प्रभात बारात लेकर आएगा और शुभदा सात फेरों के बंधन में बंधकर हमेशा के लिए उसकी हो जाएगी. सखियों से घिरी शुभदा के हाथों व पैरों में मेहंदी रचाई जा रही थी. हाल में धीमा सा मधुर संगीत गूँज रहा था. खुशनुमा वातावरण में चाय-नाश्ता, सखियों का थिरकना मेहंदी रचवाना आदि सारे कार्य संपन्न हो रहे थे. शुभदा एक तरफ तो प्रिय-मिलन के सतरंगी सपनों में खोई हुई थी दूसरी तरफ इस शुभ अवसर पर अपनी प्रिय सखी लीना की अनुपस्थिति से उसके मन के एक कोने में उदासी की बदली सी छाई हुई थी. रह रहकर विचारों का सैलाब सा उठ रहा था कि आखिर क्या कारण है जो लीना उसकी शादी के महत्वपूर्ण आयोजन में भी शामिल न हो सकी. शुभदा ने उसे निमंत्रण पत्र भेजने के साथ ही एक सप्ताह पहले आने का अनुरोध किया था. फोन पर तो उसने उत्साहपूर्वक अपनी सहमति भी दी थी मगर जब दूसरी बार बात की तो उसने इतना ही कहा था- ससुराल नहीं जाऊँगी -1 sasuraal naheen jaaoongee -1 ससुराल नहीं जाऊँगी -1
5
  1. डाल से मुझको न तोड़ो, फूल कहता है। फूल कहता है phool kahataa hai फूल कहता है
  2. डाल-डाल पर गुल खिले,  बसंत आया है। बसंत आया है basant aayaa hai बसंत आया है
  3. डाल-डाल पर जब लद जाते सुमन सलोने गुलाब के suman salone gulaab ke सुमन सलोने गुलाब के
  4. डाल-डाल पर जब लद जाते, फूल सलोने गुलाब के फूल सलोने गुलाब के phool salone gulaab ke फूल सलोने गुलाब के
  5. डाली मोगरे की...मेरी नज़र में डाली मोगरे की-मेरी नज़र में (शायर नीरज गोस्वामी ) daalee mogare kee-meree nazar men (shaayar neeraj gosvaamee ) डाली मोगरे की-मेरी नज़र में (शायर नीरज गोस्वामी )
1
  1. ढाई ढाई अक्षर प्रेम के dhaaee akshar prem ke ढाई अक्षर प्रेम के
१२ 12 १२
  1. तनहाई, तुम इस जीवन में तनहाई तुम क्यों आई tanahaaee tum kyon aaee तनहाई तुम क्यों आई
  2. तपती देख धरा की काया। गुल कनेर यादों में छाया gul kaner yaadon men chaayaa गुल कनेर यादों में छाया
  3. तपे नचाए थी गर्मी nachaae thee garmee नचाए थी गर्मी
  4. तमन्ना ने तमन्ना tamannaa तमन्ना
  5. तिनका तिनका जोड़कर, पंछी बांधे नीड़। पंछी बाँधे नीड़ panchee baandhe need पंछी बाँधे नीड़
  6. तुम पथिक, आए कहाँ से तुम पथिक आए कहाँ से tum pathik aae kahaan se तुम पथिक आए कहाँ से
  7. तुम पथिक, आए कहाँ से, इस शहर के रास्तों पर is shahar ke raaston par इस शहर के रास्तों पर
  8. तुमने सब कुछ मुझे दे दिया कहलाऊँ तेरा सपूत kahalaaoon teraa sapoot कहलाऊँ तेरा सपूत
  9. तुमसे नज़रें मिलीं, मन मिलाना हुआ। और मौसम अचानक सुहाना हुआ aur mausam achaanak suhaanaa huaa और मौसम अचानक सुहाना हुआ
  10. तुमसे नज़रें मिलीं, मन मिलाना हुआ। तुमसे नज़रें मिलीं{प्रेम) tumase nazaren mileen{prem) तुमसे नज़रें मिलीं{प्रेम)
  11. तुलसी पालनहार है, कई गुणों की खान। तुलसी पालनहार है tulasee paalanahaar hai तुलसी पालनहार है
  12. तूँ छा चवाँ माँ chaa chawaan maan छा चवाँ माँ
1
  1. थधि बसंतु आयो basantu aayo बसंतु आयो
३३ 33 ३३
  1. दमयंती की आँखों के सामने चाहे स्वच्छ अनंत आसमान था, मगर उसके मनस्पटल पर घोर काले बादल उमड़-घुमड़ मचा रहे थे. सहसा बिजली सी कौंधी और बादल बरसने लगे. उसका हाथ बरबस ही भीगे हुए गालों पर चला गया. अचानक दमयंती के मनस्पटल पर एक चित्र उभरा और उसने खुद को अपनी उम्र की ४८ वीं सीढ़ी से नीचे उतरते पाया. हर सीढ़ी पर भूली बिसरी यादें अपना अपना अक्स दिखाती हुई गुजरने लगीं और वो ज्योंही १२ वीं सीढ़ी पर पहुँची, अधूरी मन्नत /कहानी adhooree mannat /kahaanee अधूरी मन्नत /कहानी
  2. दमयंती की आँखों के सामने चाहे स्वच्छ अनंत आसमान था, मगर उसके मनस्पoटल पर घोर काले बादल उमड़-घुमड़ मचा रहे थे. सहसा बिजली सी कौंधी और बादल बरसने लगे. उसका हाथ बरबस ही भीगे हुए गालों पर चला गया. अचानक दमयंती के मनस्पटल पर एक चित्र उभरा और उसने खुद को अपनी उम्र की ४८ वीं सीढ़ी से नीचे उतरते पाया. हर सीढ़ी पर भूली बिसरी यादें अपना अपना अक्स दिखाती हुई गुजरने लगीं और वो ज्योंही १२ वीं सीढ़ी पर पहुँची, उसे माँ की आवाज़ सुनाई दी जो उसी को पुकार रही थी. अधूरी मन्नत adhooree mannat अधूरी मन्नत
  3. दस्तक कुछ दिन भाया कोहरा kuch din bhaayaa koharaa कुछ दिन भाया कोहरा
  4. दस्तक से पलकें खुलीं,देखी सुंदर भोर। दस्तक से पलकें खुलीं dastak se palaken khuleen दस्तक से पलकें खुलीं
  5. दस्तक से पलकें खुलीं,देखी सुंदर भोर। देखी सुंदर भोर dekhee sundar bhor देखी सुंदर भोर
  6. दाँव ऐसा भी क्या aisaa bhee kyaa ऐसा भी क्या
  7. दानी! अपना वचन तज गर्जन घन, बरसो आओ! taj garjan ghan, baraso aao! तज गर्जन घन, बरसो आओ!
  8. दिठुमि त रस्तो, साफ़ु थिए थो। पुट्रिड़ो दर्शनु दियण अचे थो putrido darshanu diyan ache tho पुट्रिड़ो दर्शनु दियण अचे थो
  9. दिन कहता है करो बाकी अभी उजाला है baakee abhee ujaalaa hai बाकी अभी उजाला है
  10. दिन कहता है करो जतन कुछ जीवन को मत जंग लगाओ jeewan ko mat jang lagaao जीवन को मत जंग लगाओ
  11. दिन तिल तिल ज्यों बढ़ते जाते, दिनकर तेरी ज्योत बढ़े dinakar teree jyot bढ़e दिनकर तेरी ज्योत बढ़े
  12. दिनकर दीदे फाड़ तक रहा संध्या रानी जल्दी आओ sandhyaa raanee jaldee aao संध्या रानी जल्दी आओ
  13. दिनचर्या के गुणा-भाग रधिया ने नवगीत रचा radhiyaa ne nawageet rachaa रधिया ने नवगीत रचा
  14. दिल कुदरत वारा kudarat waaraa कुदरत वारा
  15. दिल की दुनिया पुनः बसाने, आओगे ना! आओगे ना! aaoge naa! आओगे ना!
  16. दिशा दिशा में धूम है, गूँज रहा संगीत। नया वर्ष, ईश्वर करे... nayaa warsh, eeshvar kare नया वर्ष, ईश्वर करे...
  17. दिसी धरती रोए थी dharatee roe thee धरती रोए थी
  18. दिसी सीअ जा तेवर सूरजु, ड्रिजण लगो सूरजु ड्रिजण लगो आ sooraju drijan lago aa सूरजु ड्रिजण लगो आ
  19. दीनों की दुनिया अलग, होती दीनों की दुनिया अलग deenon kee duniyaa alag दीनों की दुनिया अलग
  20. दीनों की दुनिया अलग, होती सबसे खास। ये बनफूल ye banaphool ये बनफूल
  21. दुनिया दुनिया बड़ी कमाल की duniyaa badee kamaal kee दुनिया बड़ी कमाल की
  22. दुनिया हुई हिक सिंधी बोली huee hik sindhee bolee हुई हिक सिंधी बोली
  23. दृग शाम ढल जाने के बाद shaam dhal jaane ke baad शाम ढल जाने के बाद
  24. देवता जागे, सजे मंडप, बजीं देवता जागे dewataa jaage देवता जागे
  25. देवों मंगल मूरत गणपति देवा mangal moorat ganapati dewaa मंगल मूरत गणपति देवा
  26. देवों से हमको मिला, संस्कृत का हिन्दी के सम्मान में hindee ke sammaan men हिन्दी के सम्मान में
  27. दो दिन बाद प्रभात के मुंबई से बाहर जाने पर शुभदा ने कुछ दिन ससुराल होते हुए कुछ दिन मायके में बिताने का विचार किया. प्रवास पर जाने से पहले प्रभात को मम्मी-पापा से मिलने जाना ही था, अतः उसने अपनी भी जाने की तैयारी कर ली. ससुराल नहीं जाऊँगी 8 sasuraal naheen jaaoongee 8 ससुराल नहीं जाऊँगी 8
  28. दो दिन बाद ही शुभदा का विवाह है, आज मेहंदी की रस्म के लिए आमंत्रित की हुई सखियाँ ढोलक की थाप पर झूम रही थीं, मंगल गीत गाए जा रहे थे. उसके सपनों का राजकुमार प्रभात बारात लेकर आएगा और शुभदा सात फेरों के बंधन में बंधकर हमेशा के लिए उसकी हो जाएगी. सखियों से घिरी शुभदा के हाथों व पैरों में मेहंदी रचाई जा रही थी. हाल में धीमा सा मधुर संगीत गूँज रहा था. खुशनुमा वातावरण में चाय-नाश्ता, ससुराल नहीं जाऊँगी sasuraal naheen jaaoongee ससुराल नहीं जाऊँगी
  29. दो दिलों के वादों को, दो दिलों के वादों को, वादियाँ समझती हैं do dilon ke waadon ko, waadiyaan samajhatee hain दो दिलों के वादों को, वादियाँ समझती हैं
  30. दोहा गीत दीप-लक्ष्मी दो हमें deep-lakshmee do hamen दीप-लक्ष्मी दो हमें
  31. दोहा प्रेमी पाठक यह तो जानते ही होंगे कि दोहा एक स्वतंत्र छंद है मगर मेरा यह संग्रह लीक से कुछ हटकर रचा गया है यानी एक ही विषय पर कुछ दोहे मिलकर गीत का रूप ले लेते हैं. ये गीत आपको विविध विषयों जैसे -प्रकृति,प्रेम,नीति,देश-प्रेम,संस्कृति आदि का प्रतिनिधत्व करते हुए नज़र आएँगे. आशा करती हूँ मेरा यह अनूठा संकलन आपको अवश्य पसंद आएगा. मेरा यह संकलन केवल ई बुक के रूप में (मूल्य- फ्री) उपलब्ध है. आप चाहें तो इस लिंक पर अवलोकन कर सकते हैं. https://www.smashwords.com/books/view/954164 पाठकों से paathakon se पाठकों से
  32. द्वार दिल के, तुमने पहरे तो बिठाए द्वार दिल के dvaar dil ke द्वार दिल के
  33. द्वार पर दस्तक हुई, आई दिवाली ज्योति पर्वों की जगी, आई दिवाली jyoti parvon kee jagee, aaee diwaalee ज्योति पर्वों की जगी, आई दिवाली
6
  1. “धरा बचाओ”आजकल, छिड़ा खूब मेरा देश महान meraa desh mahaan मेरा देश महान
  2. धरती हुई निहाल, बधाई दी अंबर धरती हुई निहाल dharatee huee nihaal धरती हुई निहाल
  3. धरे धीरु बिगड़ी, धरे धीरु बिगड़ी बणाए सघूँ था dhare dheeru bigadee banaae saghoon thaa धरे धीरु बिगड़ी बणाए सघूँ था
  4. धीरे-धीरे शीत की, लहर चली चहुं धीरे धीरे शीत की dheere dheere sheet kee धीरे धीरे शीत की
  5. धूप चदरिया बिछ गई, चलो भगाएँ शीत। धूप चदरिया बिछ गई dhoop chadariyaa bich gaee धूप चदरिया बिछ गई
  6. धूप, सखी! है विनती मेरी धूप सखी है विनती मेरी dhoop sakhee hai winatee meree धूप सखी है विनती मेरी
१९ 19 १९
  1. नई आज की बेटी aaj kee betee आज की बेटी
  2. नई रानी बिटिया raanee bitiyaa रानी बिटिया
  3. नए नए साल ने कहा नमस्ते nae saal ne kahaa namaste नए साल ने कहा नमस्ते
  4. नए साल की छूट है जिसकी जूती, उसी का सिर jisakee jootee, usee kaa sir जिसकी जूती, उसी का सिर
  5. नए साल के स्वागत में फिर, नए साल के स्वागत में nae saal ke svaagat men नए साल के स्वागत में
  6. नज़र-नज़र नज़र नज़र में जो हो जाए प्यार nazar nazar men jo ho jaae pyaar नज़र नज़र में जो हो जाए प्यार
  7. नज़र-नज़र में जो हो जाए नज़र-नज़र में जो{प्रेम) nazar-nazar men jo{prem) नज़र-नज़र में जो{प्रेम)
  8. नम हवा फुलवारियों की नम हवा फुलवारियों की nam hawaa phulawaariyon kee नम हवा फुलवारियों की
  9. नर-नारी दो चक्र हैं, जीवन रथ की शान। नर-नारी दो चक्र हैं nar-naaree do chakr hain नर-नारी दो चक्र हैं
  10. नर्म हुए दिन, रातें मधुरिम बेला महके belaa mahake बेला महके
  11. नव नव उमंगों से सजाकर.. naw umangon se sajaakar नव उमंगों से सजाकर..
  12. नव बेटी तुम betee tum बेटी तुम
  13. नव प्रभात की सूर्य किरण से बेटी तुम सबका दुलार हो betee tum sabakaa dulaar ho बेटी तुम सबका दुलार हो
  14. नवगीत परिसंवाद-२०१५ में पढ़ा गया शोध-पत्र धूप की विभिन्न छवियाँ dhoop kee wibhinn chhawiyaan धूप की विभिन्न छवियाँ
  15. नाग को दे दो.... नाग कभी दूध नहीं पीता naag kabhee doodh naheen peetaa नाग कभी दूध नहीं पीता
  16. नारी नारी अब तो उड़ चली naaree ab to ud chalee नारी अब तो उड़ चली
  17. नित्य अच्छा लगता है achchaa lagataa hai अच्छा लगता है
  18. निम्मो दीदी आ गई... मुआवजा muaawajaa मुआवजा
  19. निम्मो दीदी आ गई... पिकनिक/कहानी pikanik/kahaanee पिकनिक/कहानी
२१ 21 २१
  1. पंज-फुटी पिञिरन में पलंदा, घर दिठा सें। उभ में शहर ubh men shahar उभ में शहर
  2. पग लिपटे बंजर धरा, तन झुलसाती धूप। गर्मी का यह रूप garmee kaa yah roop गर्मी का यह रूप
  3. पत्र पत्रिका हुए पुरानेविश्वजाल पर छाना है। नई सोच के नए नज़ारे आया नया ज़माना है। सीढ़ी सरक गई साइड मेंलिफ्ट लपक ली खड़े खड़े। चले सैर को संग पालतू रिश्ते नाते हुए परे। गाँव दौड़कर शहर आ गएशहर चाँद पर जाना है। जीन्स पहनकर चले अकड़ से धूल धरा, धोती कुर्ता। पिज्जा, बर्गर अहा स्वाद क्या!दूर हुआ बैंगन भुरता। चौपाटी बन गई फेसबुकचाट चैट की खाना है। ट्राफिक जाम नया ज़माना nayaa zamaanaa नया ज़माना
  4. परिवर्तन का हुआ शत-शत वंदन सूर्य तुम्हारा shat-shat wandan soory tumhaaraa शत-शत वंदन सूर्य तुम्हारा
  5. पलकें ऋतु बसंत के संग riitu basant ke sang ऋतु बसंत के संग
  6. पसीने पसीने से जब-जब नहाती है गर्मी paseene se jab-jab nahaatee hai garmee पसीने से जब-जब नहाती है गर्मी
  7. पसीने से जब-जब नहाती है गर्मी पसीने से जब जब paseene se jab jab पसीने से जब जब
  8. पाणु तूँ ही तूँ आँ toon hee toon aan तूँ ही तूँ आँ
  9. पाप गठरी सिर धरे, गंगा नहाने आ गए। गंगा नहाने आ गए//गज़ल// gangaa nahaane aa gae//gazal// गंगा नहाने आ गए//गज़ल//
  10. पापा कहते हैं, मैं पढ़ लिख पापा मेरे करें न चिंता paapaa mere karen n chintaa पापा मेरे करें न चिंता
  11. पावस का इस बार देश पर, उत्तर यहीं अड़ा है uttar yaheen adaa hai उत्तर यहीं अड़ा है
  12. पीर धरती रोती है dharatee rotee hai धरती रोती है
  13. पुण्य जो मेलो लगो, सभु प्या मिड़नि गंगा किनारे gangaa kinaare गंगा किनारे
  14. पुत्र बसा परदेस में, पद का चढ़ा बुखार। पुत्र बसा परदेस में putr basaa parades men पुत्र बसा परदेस में
  15. पुनः जन्म लो कृष्ण जी, देखो कलियुग घोर पुनः जन्म लो कृष्ण जी punah janm lo kriishn jee पुनः जन्म लो कृष्ण जी
  16. पुनः प्रेम के साथ पाहुना आइये होली खेलें aaiye holee khelen आइये होली खेलें
  17. पुनर्जन्म हिन्दी की सेवा करूँ hindee kee sewaa karoon हिन्दी की सेवा करूँ
  18. पुरखों का नेक नाम, डुबाना कल से मिला वो आज गँवाना तो है नहीं kal se milaa wo aaj ganvaanaa to hai naheen कल से मिला वो आज गँवाना तो है नहीं
  19. पूर्ण कर अरमान, नूतन साल आया। नूतन साल आया nootan saal aayaa नूतन साल आया
  20. पेशावर में १७ दिसंबर २०१४ को आतंकी हमले में मारे गए स्कूली बच्चों के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप कुछ भाव भूल जाएगा ज़माना bhool jaaegaa zamaanaa भूल जाएगा ज़माना
  21. प्रखरतम धूप बन राहों में, मुझे पीपल बुलाता है mujhe peepal bulaataa hai मुझे पीपल बुलाता है
१९ 19 १९
  1. फगुण फगुण जूँ हवाऊँ phagun joon hawaaoon फगुण जूँ हवाऊँ
  2. फगुनाहट से जाग उठी है जाग उठी है जग में होली jaag uthee hai jag men holee जाग उठी है जग में होली
  3. फना ऋतु स्वतंत्रता की है riitu svatantrataa kee hai ऋतु स्वतंत्रता की है
  4. फना हुईं गुलामियाँ ऋतु स्वरांत्रता की है riitu svaraantrataa kee hai ऋतु स्वरांत्रता की है
  5. फागुन आया लिए साथ में, होली का संदेश। रंग भरे गुब्बारों में, हमजोली का संदेश। लुभा रहे मिष्ठान्न रँगीले। पूरनपोली पाक रसीले। स्वागत करती द्वार अल्पना, घुटी भंग के दौर नशीले। देख-देख मन लगा मचलने, सब्र नहीं अब शेष। मची युवाओं में धमाल है। मन अबीर केसर गुलाल है। ऋतु बसंत का न्यौता पाकर, उमड़ पड़ा जन जन कमाल है। तन रँगने को आतुर हैं गुल, टेसू बना विशेष। नव-वधुएँ भी रंग सँजोकर। होली का संदेश holee kaa sandesh होली का संदेश
  6. फागुन आया, फिर से खिले पलाश phir se khile palaash फिर से खिले पलाश
  7. फागुन लाया प्रेम की, सतरंगी बौछार। फागुन लाया प्रेम की... phaagun laayaa prem kee फागुन लाया प्रेम की...
  8. फिर वही बचपन फिर वही बचपन सुहाना चाहिए phir wahee bachapan suhaanaa chaahie फिर वही बचपन सुहाना चाहिए
  9. फिर सुनी पावन गाथा कृष्ण की//गज़ल// gaathaa kriishn kee//gazal// गाथा कृष्ण की//गज़ल//
  10. फिर से आओ कृष्ण जी, देखो कलियुग घोर। फिर से आओ कृष्ण जी phir se aao kriishn jee फिर से आओ कृष्ण जी
  11. फिर से आओ राम जी तुम्हें पुकारे फिर से आओ राम जी... phir se aao raam jee फिर से आओ राम जी...
  12. फिर से नई कोपलें फूटीं शुभारंभ है नए साल का shubhaaranbh hai nae saal kaa शुभारंभ है नए साल का
  13. फिरी नओं सालु आयो naon saalu aayo नओं सालु आयो
  14. फूल फूल हमेशा बगिया में ही... phool hameshaa bagiyaa men hee फूल हमेशा बगिया में ही...
  15. फूल तुम्हें मैं कहाँ सजाऊँ? फूल तुम्हें मैं कहाँ सजाऊँ phool tumhen main kahaan sajaaoon फूल तुम्हें मैं कहाँ सजाऊँ
  16. फूल मुरझाया हुआ, बाद सजाए न बने। फूल मुरझाया हुआ बाद सजाए न बने //गज़ल// phool murajhaayaa huaa baad sajaae n bane //gazal// फूल मुरझाया हुआ बाद सजाए न बने //गज़ल//
  17. फूलों फूलों से खुशबू लेकर phoolon se khushaboo lekar फूलों से खुशबू लेकर
  18. फूलों के मौसम में फिर फिर कनहल के फूल kanahal ke phool कनहल के फूल
  19. फूलों से हो दोस्ती, हरसिंगार harasingaar हरसिंगार
४२ 42 ४२
  1. “बेटे तनिक मेरी बात सुनो, ये दिन तुम्हारे स्कूल जाने के हैं, सुबह-सुबह यह कचरा बीनने का काम क्यों कर रहे हो?” रोटी के लिए rotee ke lie रोटी के लिए
  2. बंजर बंजर ज़मीं पे बाग बसाएँ तो बात है banjar zameen pe baag basaaen to baat hai बंजर ज़मीं पे बाग बसाएँ तो बात है
  3. बचपन में पौधा रोपा था कहाँ उगाऊँ हरसिंगार kahaan ugaaoon harasingaar कहाँ उगाऊँ हरसिंगार
  4. बच्चों ने मिलकर किया, बूँदों का घेराव। चली सुहानी सैर को, लो कागज़ की नाव chalee suhaanee sair ko, lo kaagaz kee naaw चली सुहानी सैर को, लो कागज़ की नाव
  5. बढ़े धूप के तेवर रूठी आँगन की तुलसी aangan kee tulasee आँगन की तुलसी
  6. बदन बदन ते सितारा सजाए चाँड्रोकी badan te sitaaraa sajaae chaandrokee बदन ते सितारा सजाए चाँड्रोकी
  7. बदनसीबों को बसाकर गोद घाट से मंदिर तलक ghaat se mandir talak घाट से मंदिर तलक
  8. बदरा गरजे, बिजुरी चमकी। पहली बरखा pahalee barakhaa पहली बरखा
  9. बदल सूर्य ने निज रथ-पथ भरे पुण्य मेले bhare puny mele भरे पुण्य मेले
  10. बदलती ऋतु की रागिनी, बुला रही फुहार है bulaa rahee phuhaar hai बुला रही फुहार है
  11. बदला मौसम फिर फूल तितलियों वाला उपवन phool titaliyon waalaa upawan फूल तितलियों वाला उपवन
  12. बदला मौसम, फिर बसंत का हुआ आगमन phir basant kaa huaa aagaman फिर बसंत का हुआ आगमन
  13. बदला मौसम, फिर बसंत का दिन बसंत के din basant ke दिन बसंत के
  14. बदले हो तुम, तो बदले हो तुम तो है क्या... badale ho tum to hai kyaa बदले हो तुम तो है क्या...
  15. बदिलि ज़मानो तिखो आ zamaano tikho aa ज़मानो तिखो आ
  16. बने रहें ये दिन बसंत के गीत कोकिला गाती रहना geet kokilaa gaatee rahanaa गीत कोकिला गाती रहना
  17. बरखा रानी विदा हुई बरखा रानी विदा हुई barakhaa raanee widaa huee बरखा रानी विदा हुई
  18. बरखा रानी! नाम तुम्हारे बरखा रानी नाम तुम्हारे barakhaa raanee naam tumhaare बरखा रानी नाम तुम्हारे
  19. बरसात का ये मौसम, कितना हसीन है! बरसात का ये मौसम,कितना हसीन है! barasaat kaa ye mausam,kitanaa haseen hai! बरसात का ये मौसम,कितना हसीन है!
  20. बरसे बरसे मेघ चलो तन धो लो barase megh chalo tan dho lo बरसे मेघ चलो तन धो लो
  21. बल भी उसके सामने निर्बल रहा है। नीड़ का निर्माण फिर फिर टल रहा है need kaa nirmaan phir phir tal rahaa hai नीड़ का निर्माण फिर फिर टल रहा है
  22. बस के टिमोरा पहुँचने की घोषणा होते ही ऊँघते हुए बाराती सजग होकर अपना अपना सामान सहेजते हुए हुलिया ठीक करने लगे। कुछ ही देर में बस टिमोरा के तीन-सितारा होटल के सामने थी। कुछ महिला पुरुष स्वागत के लिए बाहर तैयार खड़े थे। उसने छुआ था, अंतिम भाग usane chuaa thaa, antim bhaag उसने छुआ था, अंतिम भाग
  23. बहुत नारी जहाँ सताई जाए naaree jahaan sataaee jaae नारी जहाँ सताई जाए
  24. बहुत दिनों के बाद आज माँ गोल चाँद की रात gol chaand kee raat गोल चाँद की रात
  25. बाँसूरी बाँसुरी में सुर न हो तो baansuree men sur n ho to बाँसुरी में सुर न हो तो
  26. बादल आए दूर से, लेकर यह पैगाम। बादल आए दूर से baadal aae door se बादल आए दूर से
  27. बादल गरिज्या ऐं खिविणि खिली पहिरीं बरसात pahireen barasaat पहिरीं बरसात
  28. बार-बार समझाने के बावजूद जब विभा ने उसकी बात नहीं मानी तो जाने-माने साहित्यकारों के सम्मान समारोह में आमंत्रित प्रथम पंक्ति में अपनी सहेली के साथ बैठी हुई आभा अकेली ही उस मंच की ओर बढ़ गई जहाँ पीछे की तरफ कार्यक्रम के कार्यकर्ता साहित्यकारों को निर्धारित शुल्क पर हर श्रेणी के सम्मान बेचकर आगे मंचासीन करवा रहे थे। कुछ ही देर में आभा हाथ में श्रीफल, गले में गुलहार और कंधों पर शॉल लपेटे गर्व से सिर ऊँचा किए हुए ओजमय चेहरा लिए विभा के पास पहुँच गई लेकिन विभा ने उसे देखकर ऐसी मुखमुद्रा बनाई जैसे उसे पहचाना ही नहीं। वो विभा को झिंझोड़कर बोली- चेहरा cheharaa चेहरा
  29. बालकनी के कोने मैंनेजब से रखी बाँस की कुर्सी बाँस की कुर्सी baans kee kursee बाँस की कुर्सी
  30. बिखर चुकी है बेबस कमली बेबस कमली bebas kamalee बेबस कमली
  31. बिटिया देख रही वो सपना बिटिया देख रही वो सपना bitiyaa dekh rahee wo sapanaa बिटिया देख रही वो सपना
  32. बीत चुका वो कल दुखदाई कितनी गर्वित भारत माता kitanee garvit bhaarat maataa कितनी गर्वित भारत माता
  33. बीते दिन बरसात के आया फिर मधुमास। बीते दिन बरसात के beete din barasaat ke बीते दिन बरसात के
  34. बुधाँ पई, अजुकल्ह माण्हुनि में प्यारु न लगनि प्रेम जा मेला lagani prem jaa melaa लगनि प्रेम जा मेला
  35. बेटा अगर समझदार हो तो परिवार टूटने या माँ-पिता को अपमानित महसूस होने का सवाल ही नहीं उठता. इसी भाव को चित्रित करती हुई लघुकथा- समाधान samaadhaan समाधान
  36. बेटी का हक, अगर आपने छीना तो बेटी का हक़ अगर betee kaa haq agar बेटी का हक़ अगर
  37. बेटी का हक, अगर आपने छीना तो बेटी का हक़ betee kaa haq बेटी का हक़
  38. बेटी की बात सुनकर पिता, अरविन्द सिन्हा के चेहरे का रंग ही उड़ गया. हकबकाकर बोल पड़े- ससुराल नहीं जाऊँगी. 2 sasuraal naheen jaaoongee 2 ससुराल नहीं जाऊँगी. 2
  39. बोल बोल उठा भू का तन प्यासा bol uthaa bhoo kaa tan pyaasaa बोल उठा भू का तन प्यासा
  40. बोल उठी अन जन्मी बेटी बोल उठी अनजन्मी बेटी bol uthee anajanmee betee बोल उठी अनजन्मी बेटी
  41. बोल उठी अनजन्मी बेटी अनजन्मी बेटी anajanmee betee अनजन्मी बेटी
  42. ब्रह्म माँ की दुआ maan kee duaa माँ की दुआ
१२ 12 १२
  1. भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर bhakti-bhaaw kaa soory ugaa phir भक्ति-भाव का सूर्य उगा फिर
  2. भर्त्सना के भाव भर, कितनी भला कटुता लिखें? नर पिशाचों के लिए nar pishaachon ke lie नर पिशाचों के लिए
  3. भव्य चाँदनी हिन्दी हमारी chaandanee hindee hamaaree चाँदनी हिन्दी हमारी
  4. भव्य भारत के फ़लक की चाँदनी हिंदी हमारी- हिंदी ग़ज़ल chaandanee hindee hamaaree- hindee gazal चाँदनी हिंदी हमारी- हिंदी ग़ज़ल
  5. भाग ४ ससुराल नहीं जाऊँगी 4 sasuraal naheen jaaoongee 4 ससुराल नहीं जाऊँगी 4
  6. भाग 6 ससुराल नहीं जाऊँगी - 6 sasuraal naheen jaaoongee - 6 ससुराल नहीं जाऊँगी - 6
  7. भाग 7 ससुराल नहीं जाऊंगी 7 sasuraal naheen jaaoongee 7 ससुराल नहीं जाऊंगी 7
  8. भाग्य विधाता भारत की, पतवार भारती हिन्दी है patawaar bhaaratee hindee hai पतवार भारती हिन्दी है
  9. भारत भू पर राम थे त्रेता युग भारत भू पर राम थे.... bhaarat bhoo par raam the भारत भू पर राम थे....
  10. भूखों भूखों को रिझाते वे bhookhon ko rijhaate we भूखों को रिझाते वे
  11. भेद की बातें एक दीपक हम जलाएँ ek deepak ham jalaaen एक दीपक हम जलाएँ
  12. भोर की आँख खुलते ही यमुना ज्यों ही बाहर आई, देखा कि उसके घर की बाजू वाली ज़मीन पर प्रत्यारोपण pratyaaropan प्रत्यारोपण
५३ 53 ५३
  1. -माँ आज फिर? तकिया takiyaa तकिया
  2. "माँ, देखो न! जीतू ने फिर से गुलाब का फूल तोड़ लिया, आप उसे मना क्यों नहीं करतीं” संकल्पिता /कहानी sankalpitaa /kahaanee संकल्पिता /कहानी
  3. “माँ, देखो न! जीतू ने फिर से गुलाब का फूल तोड़ लिया, आप उसे मना क्यों नहीं करतीं” संकल्पिता sankalpitaa संकल्पिता
  4. “माँ, हम मूवी सबसे पहले हिन्दी/लघु-कहानी sabase pahale hindee/laghu-kahaanee सबसे पहले हिन्दी/लघु-कहानी
  5. “मित्रवर! कल हमारे गृह-प्रवेश के शुभ अवसर पर आयोजित स्नेह-भोज में तुम्हारी सपरिवार उपस्थिति अनिवार्य है...” कहते हुए विमल ने एक सुंदर सा निमंत्रण-पत्र कमल की ओर बढ़ा दिया। गृह-प्रवेश griih-prawesh गृह-प्रवेश
  6. “मिनी बेटे जल्दी आ जाओ नाश्ता लगा दिया है...” दासता के दाग /लघु कहानी daasataa ke daag /laghu kahaanee दासता के दाग /लघु कहानी
  7. मंगल-वर्षा ज्यों गिरी, मुदित हुआ मंगल-वर्षा ज्यों गिरी mangal-warshaa jyon giree मंगल-वर्षा ज्यों गिरी
  8. मंज़िलें आगे खड़ी हैं मंजिलें आगे खड़ी हैं manjilen aage khadee hain मंजिलें आगे खड़ी हैं
  9. मंज़िलें आगे खड़ी हैं, चल पड़ें, रुकना नहीं। मंज़िलें आगे खड़ी हैं manzilen aage khadee hain मंज़िलें आगे खड़ी हैं
  10. मई माह की जानलेवा गर्मी की प्रभात वेला में मुरुड़ बीच (महाराष्ट्र) पर स्थित होटल “डिवाइन होम स्टे” के अंदरूनी विशाल द्वार पर खड़ा आशीष अपने क़दमों में लोटते अनंत सागर की अथाह गहराई में खोया हुआ था कि अचानक उसकी मौन साधना को भंग करती हुई क़दमों की आहट उसके निकट ही आकर ठहर गई. पलटकर देखा तो एक १७- १८ वर्षीय प्यारी सी किशोर वय की बालिका मोबाइल हाथ में लिए उसी को निहार रही थी. जवाब दीजिये (प्रेम और अलगाव की अनोखी कथा) jawaab deejiye (prem aur alagaaw kee anokhee kathaa) जवाब दीजिये (प्रेम और अलगाव की अनोखी कथा)
  11. मई माह की जानलेवा गर्मी की प्रभात वेला में मुरुड़ बीच (महाराष्ट्र) पर स्थित होटल “डिवाइन होम स्टे” के अंदरूनी विशाल द्वार पर खड़ा आशीष अपने क़दमों में लोटते अनंत सागर की अथाह गहराई में खोया हुआ था कि अचानक उसकी मौन साधना को भंग करती हुई क़दमों की आहट उसके निकट ही आकर ठहर गई. पलटकर देखा तो एक १७- १८ वर्षीय प्यारी सी किशोर वय की बालिका मोबाइल हाथ में लिए उसी को निहार रही थी.आशीष के पलटते ही उसने अपना जवाब दीजिये- कहानी jawaab deejiye- kahaanee जवाब दीजिये- कहानी
  12. मध्यप्रदेश के एक औसत जनसंख्या वाले शहर शानपुर  की पाश कॉलोनी के शांत वातावरण में बने एक सुंदर से घर की चारदीवारी के अंदर आंगन में रसोई की तैयारी करती हुई सुप्रिया को उसके पति देवराज ने घर की बैठक से ही आवाज़ देकर बुलाया तो सुप्रिया कुछ झल्लाती बुदबुदाती हुई काम छोड़कर बैठक में आते हुए बोली, उसने छुआ था- भाग 1 (पुरस्कृत प्रेम कहानी) usane chuaa thaa- bhaag 1 (puraskriit prem kahaanee) उसने छुआ था- भाग 1 (पुरस्कृत प्रेम कहानी)
  13. मन पतंगों संग उड़ना चाहता है। मन पतंगों संग उड़ना चाहता है man patangon sang udanaa chaahataa hai मन पतंगों संग उड़ना चाहता है
  14. मन पतंगों संग उड़ना चाहता है। मन पतंगों संग man patangon sang मन पतंगों संग
  15. मन मेरा करता है पापा मन मेरा करता है पापा man meraa karataa hai paapaa मन मेरा करता है पापा
  16. मन मेरा करता है पापा पापा तुम्हारे लिए paapaa tumhaare lie पापा तुम्हारे लिए
  17. मनुष सौदो सच जो saudo sach jo सौदो सच जो
  18. महती महिमा योग की, जिसने जानी मीत महती महिमा योग की mahatee mahimaa yog kee महती महिमा योग की
  19. माँ माँ पूजा माँ आरती maan poojaa maan aaratee माँ पूजा माँ आरती
  20. माँ को आते देख, समझौता samajhautaa समझौता
  21. माँ तुम जीवन ज्योत्सना, तुम जन्मों का सार। माँ तुम जीवन ज्योत्सना maan tum jeewan jyotsanaa माँ तुम जीवन ज्योत्सना
  22. माँ बिन अपना कौन है माँ बिन अपना कौन है maan bin apanaa kaun hai माँ बिन अपना कौन है
  23. माँ मेरी, थकते तो होंगे फले मातृ-सुख द्वारे द्वारे phale maatrii-sukh dvaare dvaare फले मातृ-सुख द्वारे द्वारे
  24. माँ लक्ष्मी दे दो हमें, ऐसा तुम वरदान। माँ लक्ष्मी दे दो हमें maan lakshmee de do hamen माँ लक्ष्मी दे दो हमें
  25. माँ सम हिन्दी माँ सम हिन्दी भारती maan sam hindee bhaaratee माँ सम हिन्दी भारती
  26. माँ होती है और पिता तुम aur pitaa tum और पिता तुम
  27. माँ, तू माँ! तू कहाँ है माँ! maan! too kahaan hai maan! माँ! तू कहाँ है माँ!
  28. माँ, मेरी प्यारी माँ! नाखून naakhoon नाखून
  29. माँगकर माँगकर सम्मान पाने का चलन देखा यहाँ maangakar sammaan paane kaa chalan dekhaa yahaan माँगकर सम्मान पाने का चलन देखा यहाँ
  30. माउ सिजु नओं देखारि मूँखे siju naon dekhaari moonkhe सिजु नओं देखारि मूँखे
  31. मानसूनी बारिश के, क्या हसीं नज़ारे हैं। मानसूनी बारिश के, क्या हसीन नज़ारे हैं maanasoonee baarish ke, kyaa haseen nazaare hain मानसूनी बारिश के, क्या हसीन नज़ारे हैं
  32. मानुष जन्म मानुष जन्म मिला तुम्हें maanush janm milaa tumhen मानुष जन्म मिला तुम्हें
  33. माया जोड़ें क्यों भला, यदि है पूत सपूत। यदि है पूत सपूत yadi hai poot sapoot यदि है पूत सपूत
  34. मित्रो, उम्मीद करती हूं आपको यह कहानी अवश्य पसंद आएगी एक रात का साथ ek raat kaa saath एक रात का साथ
  35. मिलता है बहु पुण्य से मिलता है बहु पुण्य से milataa hai bahu puny se मिलता है बहु पुण्य से
  36. मीरा ने ज्योंही रसोई का कचरा डालने के लिए घर के पिछवाड़े का द्वार खोला, सामने एक सुदर्शन युवक को उसी तरफ घूरता पाकर सकपका गई. उसने बिना इधर-उधर देखे जल्दी से ढेर पर कचरा डाला और अन्दर जाकर तुरंत द्वार बंद कर दिया. बड़ी मुश्किल से अपनी बढ़ी हुई धड़कनों पर काबू पाया. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वो कौन है और उसे इस तरह क्यों घूर रहा था...पहले तो कभी उसे वहाँ नहीं देखा. परिणय के बाद parinay ke baad परिणय के बाद
  37. मीरा ने ज्योंही रसोई का कचरा डालने के लिए घर के पिछवाड़े का द्वार खोला, सामने एक सुदर्शन युवक को उसी तरफ घूरता पाकर सकपका गई. उसने बिना इधर-उधर देखे जल्दी से ढेर पर कचरा डाला और अन्दर जाकर तुरंत द्वार बंद कर दिया. बड़ी मुश्किल से अपनी बढ़ी हुई धड़कनों पर काबू पाया. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वो कौन है और उसे इस तरह क्यों घूर रहा था...पहले तो कभी उसे वहाँ नहीं देखा. परिणय के बाद ( अनूठी प्रेम कहानी ) parinay ke baad ( anoothee prem kahaanee ) परिणय के बाद ( अनूठी प्रेम कहानी )
  38. मुझको व्योम में उड़ता तराना चाहिए wyom men udataa taraanaa chaahie व्योम में उड़ता तराना चाहिए
  39. मुश्किलों हौसलों के पंख hausalon ke pankh हौसलों के पंख
  40. मुस्कान मुस्कान देख मेरी है मुस्कुराता मौसम muskaan dekh meree hai muskuraataa mausam मुस्कान देख मेरी है मुस्कुराता मौसम
  41. मूँखे हू साथी घुरिजे hoo saathee ghurije हू साथी घुरिजे
  42. मूल जगत का बेटियाँ, जगती पर उपकार। मूल जगत का बेटियाँ mool jagat kaa betiyaan मूल जगत का बेटियाँ
  43. मृदु-मधुर बेला खिले belaa khile बेला खिले
  44. मेरी मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो meraa pyaar mujhase judaa n ho मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो
  45. मेरी एक छोटी सी भूल की मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो{प्रेम) meraa pyaar mujhase judaa n ho{prem) मेरा प्यार मुझसे जुदा न हो{प्रेम)
  46. मेरी प्यारी भोली बिटिया। भोली बिटिया bholee bitiyaa भोली बिटिया
  47. मेरे ग़ज़ल संग्रह "मैं  ग़ज़ल कहती रहूँगी" की  समीक्षा पाठकों से paathakon se पाठकों से
  48. मेला मान बढ़ाओ देश का कर नारी का मान /दोहा मुक्तक maan bढ़aao desh kaa kar naaree kaa maan /dohaa muktak मान बढ़ाओ देश का कर नारी का मान /दोहा मुक्तक
  49. मेला है नवरात्रि का, फैला परम प्रकाश। नवरात्रि के दोहा-मुक्तक navaraatri ke dohaa-muktak नवरात्रि के दोहा-मुक्तक
  50. मोट्यो मोट्यो मींहु अबाणे motyo meenhu abaane मोट्यो मींहु अबाणे
  51. मौज के मेले जहाँ हों इक जहाँ ऐसा भी हो ik jahaan aisaa bhee ho इक जहाँ ऐसा भी हो
  52. मौसम बदला,गीत सलोने मौसम बदला, गीत सलोने mausam badalaa, geet salone मौसम बदला, गीत सलोने
  53. मौसम है बरसात का, बूँदों की बारात। बदरा कारे badaraa kaare बदरा कारे
7
  1. “यहाँ क्यों खड़े हो बच्चे, बाल-श्रम /लघुकथा baal-shram /laghukathaa बाल-श्रम /लघुकथा
  2. “यहाँ क्यों खड़े हो बच्चे, तुम्हेंक्या चाहिए?” कहते हुए गाँव के दो कमरों वाले उस एकमात्र सरकारी विद्या-मंदिर के एक मात्र शिक्षक रमाकांत ने सवालिया नज़रों से उस भिखारी से दिखने वाले बालक से पूछा। नेकी का नतीजा nekee kaa nateejaa नेकी का नतीजा
  3. यह घर हमारा रहबर, यह घर है दिलबरों का yah ghar hai dilabaron kaa यह घर है दिलबरों का
  4. यह भूमि अहा! मम भारत की। जय भारत माँ! jay bhaarat maan! जय भारत माँ!
  5. याद बहुत आता है मुझको प्यारे हरसिंगार pyaare harasingaar प्यारे हरसिंगार
  6. युग बीते, महका- महका mahakaa- mahakaa महका- महका
  7. योग स्वास्थ्य का मूल है, प्रात भ्रमण है प्राण। योग स्वास्थ्य का मूल है yog svaasthy kaa mool hai योग स्वास्थ्य का मूल है
२२ 22 २२
  1. रंग भीगा हुआ फागुन सखी bheegaa huaa phaagun sakhee भीगा हुआ फागुन सखी
  2. रंग रंग नए जब भू पर छाएँ, फागुन होता rang nae jab bhoo par chaaen, phaagun hotaa रंग नए जब भू पर छाएँ, फागुन होता
  3. रंग चले निज गेह, सिखाकर खुशबू के पल भीने से khushaboo ke pal bheene se खुशबू के पल भीने से
  4. रंग बिखरे, बाग निखरे खिल उठे प्यारे शिरीष khil uthe pyaare shireesh खिल उठे प्यारे शिरीष
  5. रंग बिखरे, बाग निखरे, खिल उठे प्यारे प्यारे शिरीष pyaare shireesh प्यारे शिरीष
  6. रंग में भीगी हवा रंग में भीगी हवा rang men bheegee hawaa रंग में भीगी हवा
  7. रंग सारे भूमि पर आकर मिले हैं क्यों न मन फागुन बने kyon n mun phaagun bane क्यों न मन फागुन बने
  8. रंग-रँगीले रथ पर चढ़कर। फिर बसंत आया phir basant aayaa फिर बसंत आया
  9. रक्षा बंधन पर्व पर, बहना आई गाँव। हाथों में मेहँदी रची, और महावर पाँव। और महावर पाँव, चूड़ियों सजी कलाई। नैहर का लख नेह, भाग्य निज पर इतराई। बाँध रेशमी डोर, किया भाई का वंदन। बहना आई गाँव, मनाने रक्षा बंधन।आता सावन में सखी, राखी का त्यौहार। हर धागे से झाँकता, भ्रात-बहन का प्यार। भ्रात-बहन का प्यार, बाँध बहना खुश होतीरेशम की यह डोर, कीमती सबसे रक्षा बंधन पर्व पर rakshaa bandhan parv par रक्षा बंधन पर्व पर
  10. रच लो कलम गहो हलधर kalam gaho haladhar कलम गहो हलधर
  11. रचनाधर्मिता हौसलों के पंख-सर्जना की उड़ान-यश मालवीय hausalon ke pankh-sarjanaa kee udaan-yash maalaweey हौसलों के पंख-सर्जना की उड़ान-यश मालवीय
  12. रसमय स्नेह-सुधा बरसाने, सावन आया रक्षा-बंधन पर्व मनाने सावन आया rakshaa-bandhan parv manaane saawan aayaa रक्षा-बंधन पर्व मनाने सावन आया
  13. रात के १२ बज चुके थे मगर मनीष की आँखों से नींद गायब थी. उसकी अधूरी प्रेम कहानी आगे बढ़ने का नाम ही नहीं ले रही थी. पेशे से तो वो इंजीनियर था मगर उसे कहानी लेखन का भी बड़ा शौक था. हर विषय पर उसकी पकड़ थी और उसके धाराप्रवाह लेखन का मुकाबला कम लेखक ही कर पाते थे. स्तरीय पत्रिकाओं में उसकी कहानियों की माँग बनी ही रहती थी. फलस्वरूप प्रकाशकों से उचित मानदेय भी उसे मिल जाता था. अधूरी प्रेम कहानी adhooree prem kahaanee अधूरी प्रेम कहानी
  14. रात दिन जो एक करते एक रोटी के लिए ek rotee ke lie एक रोटी के लिए
  15. रात पर जय प्राप्त कर जब, बागों बुलाती है सुबह baagon bulaatee hai subah बागों बुलाती है सुबह
  16. रामजी, भारत की भू पर, फिर से आओ एक बार। रामजी भारत की भू पर raamajee bhaarat kee bhoo par रामजी भारत की भू पर
  17. रिश्तों में सबसे प्यारी  लगती है दोस्ती। रिश्तों में सबसे प्यारी rishton men sabase pyaaree रिश्तों में सबसे प्यारी
  18. रीस रीस भली करि, साड़ु न रखु तूँ rees bhalee kari, saadu n rakhu toon रीस भली करि, साड़ु न रखु तूँ
  19. रुक्मिणी देवी अपने ६ माह के पोते को गोद में लेकर वाह रे सपूत waah re sapoot वाह रे सपूत
  20. रेशमी कटौती katautee कटौती
  21. रोक कर चुभती हवा वैसाख की तत्पर खड़ा है नीम tatpar khadaa hai neem तत्पर खड़ा है नीम
  22. रोपें हरित क्रांति की ओर harit kraanti kee or हरित क्रांति की ओर
3
  1. लघुकथा सबसे पहले हिंदी sabase pahale hindee सबसे पहले हिंदी
  2. लघुकथा दासता के दाग दासता के दाग( पुरस्कृत कहानी ) daasataa ke daag( puraskriit kahaanee ) दासता के दाग( पुरस्कृत कहानी )
  3. लदे बौर, शाखें सजीं ऋतु बसंत आई riitu basant aaee ऋतु बसंत आई
२३ 23 २३
  1. “वृद्धाश्रम...??? ओह बेटे, तुमने यह सोच भी कैसे लिया कि मैं इसके लिए तैयार हो जाऊँगी...?” ग्रीन सिग्नल green signal ग्रीन सिग्नल
  2. वण-टिण सावणु आयो saawanu aayo सावणु आयो
  3. वतन को जान हम जानें, हमारी जाँ वतन में हो। वतन को जान हम जानें watan ko jaan ham jaanen वतन को जान हम जानें
  4. वधंदड़ि विथी मिटायूँ साथी। अचु गदिजी गाल्हायूँ साथी achu gadijee gaalhaayoon saathee अचु गदिजी गाल्हायूँ साथी
  5. वन-वन को अतिक्रमण खा रहा आओ मित्रो पेड़ बचाएँ aao mitro ped bachaaen आओ मित्रो पेड़ बचाएँ
  6. वन-वन को अतिक्रमण खा रहा आओ मित्रों पेड़ बचाएँ aao mitron ped bachaaen आओ मित्रों पेड़ बचाएँ
  7. वनज-पलाशों की तलाश घोलेगा जब रंग टेसुआ gholegaa jab rang tesuaa घोलेगा जब रंग टेसुआ
  8. वर्तमान विजय फलक पर wijay phalak par विजय फलक पर
  9. वसुंधरा मीत जागते रहो meet jaagate raho मीत जागते रहो
  10. वह शिकारी बड़ी देर से आश्चर्यचकित होकर उस चिड़िया को देख रहा था जो उसके बिछाए जाल में दाने न चुगकर चारों तरफ घूम-घूम कर जाल के कोने चोंच से उठा-उठा कर कुछ दूरी पर अपने चूजों की तरफ देखती हुई चीं-चीं कर रही थी। शिकारी सिर्फ चिड़िया ही नहीं, उन चूजों को भी उदरस्थ करना चाहता था, अतः उसे इंतज़ार था कि कब वे चूज़े दाने चुगने आएँ और वो... लालच laalach लालच
  11. वहाँ महल में जश्न दिदिया के दो हाथ didiyaa ke do haath दिदिया के दो हाथ
  12. वाह अर्चना! कहानी संग्रह 'लेखक की आत्मा'/मेरी नज़र में kahaanee sangrah 'lekhak kee aatmaa'/meree nazar men कहानी संग्रह 'लेखक की आत्मा'/मेरी नज़र में
  13. विगत विलीन,उदित है आगत नूतन वर्ष तुम्हारा स्वागत nootan warsh tumhaaraa svaagat नूतन वर्ष तुम्हारा स्वागत
  14. विजया दशमी पर्व का, अर्थ बहुत है गूढ। विजया दशमी पर्व का wijayaa dashamee parv kaa विजया दशमी पर्व का
  15. विदा होकर जाते-जाते बरस बीता कह गया baras beetaa kah gayaa बरस बीता कह गया
  16. विनी ने घर पहुँचते ही देखा कि आँगन में एक डायन कहाँ है daayan kahaan hai डायन कहाँ है
  17. विवाह समारोह निर्विघ्न संपन्न हो गया और शुभदा दुल्हन बनकर ससुराल आ गई. देर रात तक विवाह के बाद होने वाली रस्में निभाते-निभाते थक चुकी शुभदा को सुगन्धित फूलों से सजे-धजे शयन कक्ष में पहुँचा दिया गया. यह उसकी सुहागरात थी और वो सिकुड़ी सिमटी सुहाग सेज पर बेसब्री से प्रभात के आने का इंतजार कर रही थी. उसका मन मन में सौ-सौ शंकाएँ-कुशंकाएँ लिए स्वयं से ही तर्क-वितर्क में उलझा हुआ था. ससुराल नहीं जाऊँगी - 3 sasuraal naheen jaaoongee - 3 ससुराल नहीं जाऊँगी - 3
  18. विशु के बापू, कसाईखाना kasaaeekhaanaa कसाईखाना
  19. विशु के बापू, ज़रा सुनना तो...नानकी ने बान की झोल खाती हुई खटिया पर सोए बेटे विशाल को मैली-सी पुरानी चादर उढ़ाते हुए आवाज़ लगाई। कसाईखाना(पुरस्कृत कहानी) kasaaeekhaanaa(puraskriit kahaanee) कसाईखाना(पुरस्कृत कहानी)
  20. विहँस रहा है बुत रावण विजय का दीप wijay kaa deep विजय का दीप
  21. वृद्धाश्रम में शाम के समय तीन बुजुर्ग महिलाओं में नसीब अपना अपना naseeb apanaa apanaa नसीब अपना अपना
  22. वे सुना है चाँद पर बस्ती बसाना चाहते। विश्व में आका हमारे यश कमाना चाहते//गज़ल// wishv men aakaa hamaare yash kamaanaa chaahate//gazal// विश्व में आका हमारे यश कमाना चाहते//गज़ल//
  23. वो लगातार पाँच दिनों से शोभना के व्यवहार तुलसी का चौंरा tulasee kaa chaunraa तुलसी का चौंरा
१६ 16 १६
  1. शक्ति का बुझ न पाए अब दिया विश्वास का bujh n paae ab diyaa wishvaas kaa बुझ न पाए अब दिया विश्वास का
  2. शाम को चाय का कप लेकर तनुजा लॉन में बैठी ही थी कि डोर-बेल बजी। कप रखकर उसने दरवाजा खोला तो बेटी तान्या के साथ आई हुई महिलाओं को देखकर सवालिया नज़रों से तान्या की ओर देखा- महिला-विमर्श mahilaa-wimarsh महिला-विमर्श
  3. शाम को चाय का कप लेकर दक्षा लॉन में बैठी ही थी कि डोर-बेल बजी। कप रखकर उसने दरवाजा खोला तो बेटी तान्या के साथ आई हुई महिलाओं को देखकर सवालिया नज़रों से तान्या की ओर देखा- कल की नारी kal kee naaree कल की नारी
  4. शीत लहर चल पड़ी यही चित्र स्वाधीन देश का yahee chitr svaadheen desh kaa यही चित्र स्वाधीन देश का
  5. शीतल शीतल ऋतु आई सखी sheetal riitu aaee sakhee शीतल ऋतु आई सखी
  6. शीतल ऋतु के नैन खुले, मौसम नैनों का नूर शीतल ऋतु के नैन खुले sheetal riitu ke nain khule शीतल ऋतु के नैन खुले
  7. शीतल किरणें चंद्र की, बिखरीं चारों ओर। शीतल किरणें चंद्र की sheetal kiranen chandr kee शीतल किरणें चंद्र की
  8. शीतल रानी मैं तुम्हें, दूँगी अपना वोट। शीतल रानी मैं तुम्हें... sheetal raanee main tumhen शीतल रानी मैं तुम्हें...
  9. शुद्ध हवा को लील रही हैं विस्मित कुदरत पूछ रही है wismit kudarat pooch rahee hai विस्मित कुदरत पूछ रही है
  10. शुभ शुभ दीवाली आ गई shubh deewaalee aa gaee शुभ दीवाली आ गई
  11. शुभ दिन आया साथियो, आज तिरंगे संग। शुभ दिन आया साथियों shubh din aayaa saathiyon शुभ दिन आया साथियों
  12. शुभ्र वसना दुग्ध सी रात-रानी चंद्रिका- ग़ज़ल raat-raanee chandrikaa- gazal रात-रानी चंद्रिका- ग़ज़ल
  13. शुभ्र वसना दुग्ध सी, मन मुग्ध करती चंद्रिका। रात रानी चंद्रिका raat raanee chandrikaa रात रानी चंद्रिका
  14. शैशव को बस चाहिए, सहज शैशव को बस चाहिए shaishaw ko bas chaahie शैशव को बस चाहिए
  15. शॉल लपेटे चली सैर को याद आ गया गुज़रा दौर yaad aa gayaa guzaraa daur याद आ गया गुज़रा दौर
  16. श्री गणेश हो शुभ कर्मों का श्री गणेश हो शुभ कर्मों का shree ganesh ho shubh karmon kaa श्री गणेश हो शुभ कर्मों का
७१ 71 ७१
  1. “सुन तो सुनन्दा…!” दिये जगमगा उठे diye jagamagaa uthe दिये जगमगा उठे
  2. “सुनो नीलू डियर, आज अनोखा उपहार anokhaa upahaar अनोखा उपहार
  3. सकल मातृ-शक्ति की छाँव अपरिमित maatrii-shakti kee chaanv aparimit मातृ-शक्ति की छाँव अपरिमित
  4. सकल मातृ-शक्ति की छाँव maatrii-shakti kee chaanv मातृ-शक्ति की छाँव
  5. सखि चैत्र गया अब ताप बढ़ा। सखि नीम तले वर्णिक छंद में रचित गीत sakhi neem tale warnik chand men rachit geet सखि नीम तले वर्णिक छंद में रचित गीत
  6. सखि,चैत्र सखि, नीम तले sakhi, neem tale सखि, नीम तले
  7. सच कहता है आइना, देखें जितनी बार। सच कहता है आइना sach kahataa hai aainaa सच कहता है आइना
  8. सड़क किनारे के सभी, सोच रहे थे पेड़ सोच रहे थे पेड़ soch rahe the ped सोच रहे थे पेड़
  9. सतायल लवें काँगु कहिं दरि lawen kaangu kahin dari लवें काँगु कहिं दरि
  10. सदस्य टीम प्रबंधन चौपाई //मूलभूत नियम chaupaaee //moolabhoot niyam चौपाई //मूलभूत नियम
  11. सदस्य टीम प्रबंधन चौपई छंद//मूलभूत नियम chaupaee chand//moolabhoot niyam चौपई छंद//मूलभूत नियम
  12. सदस्य टीम प्रबंधन दोहा छंद-मूलभूत नियम dohaa chand-moolabhoot niyam दोहा छंद-मूलभूत नियम
  13. सदस्य टीम प्रबंधन कामरूप छंद//मूलभूत नियम kaamaroop chand//moolabhoot niyam कामरूप छंद//मूलभूत नियम
  14. सदस्य टीम प्रबंधन कह-मुकरी//नियम व उदाहरण kah-mukaree//niyam w udaaharan कह-मुकरी//नियम व उदाहरण
  15. सदस्य टीम प्रबंधन कुण्डलिया//मूलभूत नियम kundaliyaa//moolabhoot niyam कुण्डलिया//मूलभूत नियम
  16. सदस्य टीम प्रबंधन रोला छंद-मूलभूत नियम rolaa chand-moolabhoot niyam रोला छंद-मूलभूत नियम
  17. सदस्य टीम प्रबंधन सार छंद//छन्न पकैया/परिचय saar chand//chann pakaiyaa/parichay सार छंद//छन्न पकैया/परिचय
  18. सदस्य टीम प्रबंधन उल्लाला छंद//मूलभूत नियम ullaalaa chand//moolabhoot niyam उल्लाला छंद//मूलभूत नियम
  19. सदा सदा सद्भाव हों मन में sadaa sadbhaaw hon man men सदा सद्भाव हों मन में
  20. सदा दुआ माउ जी duaa maau jee दुआ माउ जी
  21. सदियों से अबला कहलाई आज की नारी aaj kee naaree आज की नारी
  22. सफरु सफरु ज़िंदगीअ जो sapharu zindageea jo सफरु ज़िंदगीअ जो
  23. सम, दम, चल, घर, पल, कल आदि शाश्वत दो मात्रिक हैं गज़ल में मात्रा गिराने के नियम gazal men maatraa giraane ke niyam गज़ल में मात्रा गिराने के नियम
  24. समय चक्र चलता रहा, घड़ियाँ भी गतिमान। समय चक्र चलता रहा samay chakr chalataa rahaa समय चक्र चलता रहा
  25. समय हमें क्या दिखा रहा है। समय हमें क्या दिखा रहा है samay hamen kyaa dikhaa rahaa hai समय हमें क्या दिखा रहा है
  26. सर्द हवा ने बिस्तर बाँधा दिवस हो चले कोमल कोमल diwas ho chale komal komal दिवस हो चले कोमल कोमल
  27. सांध्य-सूरज की तरह डरने लगी है ज़िन्दगी darane lagee hai zindagee डरने लगी है ज़िन्दगी
  28. सांध्य-सूरज की तरह, ढलने लगी है ज़िंदगी। ढलने लगी है ज़िन्दगी dhalane lagee hai zindagee ढलने लगी है ज़िन्दगी
  29. साज, सुर, आवाज़, सरगम गीत मन के मीत geet man ke meet गीत मन के मीत
  30. साजन साजन तोखे वेठी सारियाँ saajan tokhe wethee saariyaan साजन तोखे वेठी सारियाँ
  31. सात शान से फिर आई होली shaan se phir aaee holee शान से फिर आई होली
  32. सार छंद- छन्न पकैया सार छंद, छन्न पकैया saar chand, chann pakaiyaa सार छंद, छन्न पकैया
  33. साल साल तो आया नवल saal to aayaa nawal साल तो आया नवल
  34. सावन का फर्ज़ की डोर pharz kee dor फर्ज़ की डोर
  35. सावन का महीना लगते ही मेघा के कानों में पड़ने वाली हर आवाज़ घुँघरुओं की रुनझुन में बदल जाती है और ज्यों ज्यों राखी पर्व निकट आने लगता है, यह आवाज़ तेज़ होती जाती है। फ़र्ज़ की डोर(रक्षाबंधन विशेष) farz kee dor(rakshaabandhan wishesh) फ़र्ज़ की डोर(रक्षाबंधन विशेष)
  36. सावन बरसा, गाँव हमारे सावन बरसा गाँव हमारे saawan barasaa gaanv hamaare सावन बरसा गाँव हमारे
  37. सितारों नए साल की भोर लो मुस्कुराई nae saal kee bhor lo muskuraaee नए साल की भोर लो मुस्कुराई
  38. सिर पर जब सूरज चढ़े, बाहर धरें न पाँव।पहनें सूती वस्त्र औ, बैठें शीतल छाँव।बैठें शीतल छाँव, कीजिये भोजन हल्काआधा करें अनाज, खूब हो सेवन फल का। कहनी इतनी बात, ताप से रहें सँभलकरबाहर धरें न पाँव, चढ़े जब सूरज सिर पर। सिर पर जब सूरज चढ़े sir par jab sooraj chढ़e सिर पर जब सूरज चढ़े
  39. सिर्फ गुलामी की गाँठ gulaamee kee gaanth गुलामी की गाँठ
  40. सिर्फ १५ दिन शेष हैं ‘हिन्दी दिवस’ में... । गुलामी की गाँठ(हिंदी विशेष) gulaamee kee gaanth(hindee wishesh) गुलामी की गाँठ(हिंदी विशेष)
  41. सीमा रक्षा हित खड़े, सीना तान जवान। सीमा रक्षा हित खड़े सीना तान जवान seemaa rakshaa hit khade seenaa taan jawaan सीमा रक्षा हित खड़े सीना तान जवान
  42. सुख उभ में उदणु सुठो आ ubh men udanu sutho aa उभ में उदणु सुठो आ
  43. सुगम-काल नया कैलेण्डर nayaa kailendar नया कैलेण्डर
  44. सुनहरी भोर बागों में ओस की बूंदें os kee boonden ओस की बूंदें
  45. सुनहरी भोर बागों में, बिछाती ओस की बूँदें! सुनहरी भोर बागों में sunaharee bhor baagon men सुनहरी भोर बागों में
  46. सुनो कुहुक रही होगी कोयलिया kuhuk rahee hogee koyaliyaa कुहुक रही होगी कोयलिया
  47. सुनो माँ...! मुझे जल्दी से उन सब नामों की सूची दे लकीर /कहानी lakeer /kahaanee लकीर /कहानी
  48. सुनो माँ...! मुझे जल्दी से उन सब नामों की सूची दे दो जिनको आरआर-पत्र भेजने हैं। स्वाति ने माँ को आवाज़ लगाते हुए कहा। रसोई में व्यस्त सुनयना ने जल्दी से हाथ धोए और अलमारी से सूची वाली कॉपी निकालकर बेटी को दे दी। लकीर lakeer लकीर
  49. सुनो स्वदेश प्रेमियों, भुला न दो अतीत को। सुनो स्वदेश प्रेमियो suno svadesh premiyo सुनो स्वदेश प्रेमियो
  50. सुप्रिया ने इस मुलाकात को सामान्य रूप में लिया और सोचा कि विनोद तो उस किस्से को भूल ही चुका होगा...उसे भी सब कुछ भुलाकर आगे की सुध लेनी चाहिए. लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था. अगले दिन से विनोद के दुकान पर बैठने का समय बढ़ चुका था और वो अब अक्सर अपने पिता के वापस आने के बाद वापस न जाकर वहीँ बैठा रहता था और देर रात को अपने पिता के साथ ही घर जाता था. उसके पिता पुत्र की कार्य में रूचि देखकर संतुष्ट थे तो विनोद की नज़रें खिड़की के पास बजते हुए रेडियो से सुप्रिया की उपस्थिति भांपकर अपनी संतुष्टि का सामान तलाशने लगती थीं. सुप्रिया अब दिन में भी झपकी नहीं ले पाती थी. कोई न कोई किताब लेकर देर तक बैठक में ही बनी रहती थी और खिड़की से खिड़की तक नज़रें मिलाने और झुकाने का सिलसिला जारी रहता था. उसने छुआ था 5 usane chuaa thaa 5 उसने छुआ था 5
  51. सुबह साँवली शाम सी, दिन हैं रात सुबह साँवली शाम सी subah saanvalee shaam see सुबह साँवली शाम सी
  52. सुबह सुबह कानों में आकर सुबह सुबह... subah subah सुबह सुबह...
  53. सुबह-सुबह जब हमें बुलाते बाग-बगीचे hamen bulaate baag-bageeche हमें बुलाते बाग-बगीचे
  54. सुबह-सुबह लान में टहलते हुए दिवाकर रॉय के मन में तकलीफ takaleeph तकलीफ
  55. सुमन ने जब से बिस्तर पकड़ा, उसकी जैसे दुनिया ही बदल गई। एक तो वृद्धावस्था, युक्ति yukti युक्ति
  56. सुर बिन साज़ बजाना कैसा सुर बिन साज़ बजाना कैसा sur bin saaz bajaanaa kaisaa सुर बिन साज़ बजाना कैसा
  57. सुविधा आसमान भी रोता होगा aasamaan bhee rotaa hogaa आसमान भी रोता होगा
  58. सूरज सूरज उगलता आग जो बागान से गया sooraj ugalataa aag jo baagaan se gayaa सूरज उगलता आग जो बागान से गया
  59. सूरज निकला सैर को, बड़े जोश के साथ। सूरज निकला सैर को sooraj nikalaa sair ko सूरज निकला सैर को
  60. सूरज ने जाने कहाँ, किरणें दी हैं सूरज ने जाने कहाँ... sooraj ne jaane kahaan सूरज ने जाने कहाँ...
  61. सूर्य देवा! सूर्य देवा! soory dewaa! सूर्य देवा!
  62. सेवा सेवा हमपर मुग्ध हुई हम सेवा मुक्त हुए sewaa hamapar mugdh huee ham sewaa mukt hue सेवा हमपर मुग्ध हुई हम सेवा मुक्त हुए
  63. सो रही थी नींद में रात आई रात रानी ख्वाब में raat aaee raat raanee khvaab men रात आई रात रानी ख्वाब में
  64. सोच में डूबा हुआ मन जंगलों में jangalon men जंगलों में
  65. सोचा सोचा है यही उनसे मिलकर हम sochaa hai yahee unase milakar ham सोचा है यही उनसे मिलकर हम
  66. सोचा है यही उससे मिलकर हम अपनी कहानी कह देंगे{प्रेम) ham apanee kahaanee kah denge{prem) हम अपनी कहानी कह देंगे{प्रेम)
  67. सोने सोने की चिड़िया कभी sone kee chidiyaa kabhee सोने की चिड़िया कभी
  68. स्कूल छूट गया था. टिमोरा में कोलेज होता तो वो जैसे तैसे घर के सारे कार्य करने की शर्त पर माँ को मना लेती. मगर अब आगे पढ़ने की उम्मीद करना ही व्यर्थ था. वैसे भी उसकी बिरादरी की सभी लडकियाँ बड़े बुजुर्गों के पुराने विचारों के कारण प्रायमरी से आगे नहीं पढ़ सकी थीं. उसने छुआ था भाग 4 usane chuaa thaa bhaag 4 उसने छुआ था भाग 4
  69. स्नेह सुधा बरसाओ मेघा स्नेह सुधा बरसाओ मेघा sneh sudhaa barasaao meghaa स्नेह सुधा बरसाओ मेघा
  70. स्वतंत्रता प्यारा अमर निशान pyaaraa amar nishaan प्यारा अमर निशान
  71. स्वर्ग के सुख त्यागकर, भू को चली भागीरथी भू को चली भागीरथी bhoo ko chalee bhaageerathee भू को चली भागीरथी
३३ 33 ३३
  1. "हौसलों के पंख" आदरणीय कल्पना रामानी जी का प्रथम प्रकाशित काव्य संग्रह होते वीरेश अरोड़ा "वीर"द्वारा नवगीत संग्रह "हौसलों के पंख" पर की हुई समीक्षा weeresh arodaa "weer"dvaaraa nawageet sangrah "hausalon ke pankh" par kee huee sameekshaa वीरेश अरोड़ा "वीर"द्वारा नवगीत संग्रह "हौसलों के पंख" पर की हुई समीक्षा
  2. हक़ किसी का छीनकर, कैसे सुफल पाएँगे आप? कैसे सुफल पाएँगे आप kaise suphal paaenge aap कैसे सुफल पाएँगे आप
  3. हक़ से हर अधिकार पाने, बेटियों आगे बढ़ो betiyon aage bढ़o बेटियों आगे बढ़ो
  4. हज़ार गीत सावनी, रचे सखी फुहार ने हज़ार गीत सावनी hazaar geet saawanee हज़ार गीत सावनी
  5. हम हम सेवा मुक्त होते ही क्या-क्या न बन गए ham sewaa mukt hote hee kyaa-kyaa n ban gae हम सेवा मुक्त होते ही क्या-क्या न बन गए
  6. हम बच्चे इस देश के, नन्हें सजग सपूत। हम बच्चे इस देश के ham bachche is desh ke हम बच्चे इस देश के
  7. हम बच्चे वे फूल हैं, जिनसे महके बाग। हम बच्चे वे फूल हैं ham bachche we phool hain हम बच्चे वे फूल हैं
  8. हमसे रखो न खार, किताबें कहती हैं kitaaben kahatee hain किताबें कहती हैं
  9. हमें दिये वरदान,तुम्हें हम, तुम्हें हम क्या दें गंगा माँ! tumhen ham kyaa den gangaa maan! तुम्हें हम क्या दें गंगा माँ!
  10. हर मौसमु-बसंती mausamu-basantee मौसमु-बसंती
  11. हर सिक जो सूरजु आखिर उगंदो sik jo sooraju aakhir ugando सिक जो सूरजु आखिर उगंदो
  12. हर दिन दूने रात चौगुने नेताजी कुछ कहो netaajee kuch kaho नेताजी कुछ कहो
  13. हर दिन दूने रात चौगुने, भूख-प्यास के दाम हुए। नेताजी कुछ कहो तुम्हारे... netaajee kuch kaho tumhaare नेताजी कुछ कहो तुम्हारे...
  14. हरजाई दिल तोड़ गया है। कहमुकरियाँ 36 से 40 kahamukariyaan 36 se 40 कहमुकरियाँ 36 से 40
  15. हरियाली में घुल गए, पीले पीले रंग। हरियाली में घुल गए hariyaalee men ghul gae हरियाली में घुल गए
  16. हरी हमें रसातल दिखा रही कुदरत hamen rasaatal dikhaa rahee kudarat हमें रसातल दिखा रही कुदरत
  17. हरी चदरिया तहा रही कुदरत कुदरत kudarat कुदरत
  18. हरे है अकेला आदमी hai akelaa aadamee है अकेला आदमी
  19. हरेक हरेक बात पे सौ बार जब विचार करो harek baat pe sau baar jab wichaar karo हरेक बात पे सौ बार जब विचार करो
  20. हलु हलु त सजण halu t sajan हलु त सजण
  21. हवा विषैली हो चली, चलो विहग उस गाँव चलो विहग उस गाँव chalo wihag us gaanv चलो विहग उस गाँव
  22. हवाओं का पैगाम पाकर फिज़ा से पतंगों के मेले patangon ke mele पतंगों के मेले
  23. हालत पहिंजी जदहिं दिसे थो पिपिलु पिपिलु पुराणो pipilu puraano पिपिलु पुराणो
  24. हिक जे जग में ममता न हुजे हाँ je jag men mamataa n huje haan जे जग में ममता न हुजे हाँ
  25. हिन इन्साफु किथे आ insaaphu kithe aa इन्साफु किथे आ
  26. हिन्दी हिन्दी की मशाल hindee kee mashaal हिन्दी की मशाल
  27. हिन्दी भाषा श्रेष्ठतम, अद्भुत इसकी शान। हिंदी भाषा श्रेष्ठतम hindee bhaashaa shreshthatam हिंदी भाषा श्रेष्ठतम
  28. हुई चलो मीत मिलजुल के होली मनाएँ chalo meet milajul ke holee manaaen चलो मीत मिलजुल के होली मनाएँ
  29. हुई विदाई ग्रीष्म की, आया वर्षा काल। हुई विदाई ग्रीष्म की huee widaaee greeshm kee हुई विदाई ग्रीष्म की
  30. है ज़रा सा मुस्कुराइए zaraa saa muskuraaie ज़रा सा मुस्कुराइए
  31. हो सवारी सूर्य की sawaaree soory kee सवारी सूर्य की
  32. हो चला हर दिन मधुरतम, साथ तुम हो। साथ तुम हो saath tum ho साथ तुम हो
  33. हौसलों के पंख - कल्पना रामानी पुस्तक समीक्षा/हौसलों के पंख-आचार्य संजीव सलिल pustak sameekshaa/hausalon ke pankh-aachaary sanjeew salil पुस्तक समीक्षा/हौसलों के पंख-आचार्य संजीव सलिल
३० 30 ३०
  1. --- गागर में सागर-५ लघुकथाएँ gaagar men saagar-5 laghukathaaen गागर में सागर-५ लघुकथाएँ
  2. * आचार्य संजीव वर्मा सलिल जी की कलम से मेरे नवगीत संग्रह "खेतों ने खत लिखा"की समीक्षा aachaary sanjeew warmaa salil jee kee kalam se mere nawageet sangrah "kheton ne khat likhaa"kee sameekshaa आचार्य संजीव वर्मा सलिल जी की कलम से मेरे नवगीत संग्रह "खेतों ने खत लिखा"की समीक्षा
  3. *गाँव-शहर* गाँव - शहर gaanv - shahar गाँव - शहर
  4. ### अध्याय 1 प्रलय से परिणय तक pralay se parinay tak प्रलय से परिणय तक
  5. 1) कहमुकरियाँ/1 से 10 kahamukariyaan/1 se 10 कहमुकरियाँ/1 से 10
  6. 1) कह-मुकरियाँ 1से 5 kah-mukariyaan 1se 5 कह-मुकरियाँ 1से 5
  7. 11) कह मुकरियाँ /11से 20 kah mukariyaan /11se 20 कह मुकरियाँ /11से 20
  8. 11) कह-मुकरियाँ ११ से १५ kah-mukariyaan 11 se 15 कह-मुकरियाँ ११ से १५
  9. 16) कह-मुकरियाँ १६ से २० kah-mukariyaan 16 se 20 कह-मुकरियाँ १६ से २०
  10. 21) कह मुकरियाँ /21से 30 kah mukariyaan /21se 30 कह मुकरियाँ /21से 30
  11. 21) कह-मुकरियाँ 21 से 25 kah-mukariyaan 21 se 25 कह-मुकरियाँ 21 से 25
  12. 26) कह-मुकरियाँ 26से 30 kah-mukariyaan 26se 30 कह-मुकरियाँ 26से 30
  13. 31) कह मुकरियाँ-31 से 40 kah mukariyaan-31 se 40 कह मुकरियाँ-31 से 40
  14. 31) कह-मुकरियाँ 31से 35 kah-mukariyaan 31se 35 कह-मुकरियाँ 31से 35
  15. 41) कह मुकरियाँ-41 से 54 kah mukariyaan-41 se 54 कह मुकरियाँ-41 से 54
  16. ४१) कह -मुकरियाँ 41 से 45 kah -mukariyaan 41 se 45 कह -मुकरियाँ 41 से 45
  17. 46) कह-मुकरियाँ 46 से 54 kah-mukariyaan 46 se 54 कह-मुकरियाँ 46 से 54
  18. ससुराल नहीं जाऊंगी- 5 sasuraal naheen jaaoongee- 5 ससुराल नहीं जाऊंगी- 5
  19. ६) कह-मुकरियाँ ६ से १० kah-mukariyaan 6 se 10 कह-मुकरियाँ ६ से १०
  20. ६) लघुकथाएँ-गागर में सागर ६ से १२ laghukathaaen-gaagar men saagar 6 se 12 लघुकथाएँ-गागर में सागर ६ से १२
  21. ख़ुशबुओं के बंद सब बाज़ार हैं खुशबुओं के बंद सब khushabuon ke band sab खुशबुओं के बंद सब
  22. ख़ुशबुओं के बंद सब बाज़ार हैं ख़ुशबुओं के बंद सब बाज़ार हैं kushabuon ke band sab baazaar hain ख़ुशबुओं के बंद सब बाज़ार हैं
  23. ज़मीं से उठाकर फ़लक पर बिठाएँ। बेटी बचाएँ betee bachaaen बेटी बचाएँ
  24. ज़रा पूछिए इन लोगों से, कैसे बीते काले दिन kaise beete kaale din कैसे बीते काले दिन
  25. ज़िक्र त्याग का हुआ ज़िक्र त्याग का हुआ जहाँ, माँ! zikr tyaag kaa huaa jahaan, maan! ज़िक्र त्याग का हुआ जहाँ, माँ!
  26. ज़िन्दगी बुत शहर में बोलते इंसान भी तो हैं! but shahar men bolate insaan bhee to hain! बुत शहर में बोलते इंसान भी तो हैं!
  27. ज़िन्दगी से सवाल तुम वही हो क्या tum wahee ho kyaa तुम वही हो क्या
  28. Add गीतिका छंद//मूलभूत नियम geetikaa chand//moolabhoot niyam गीतिका छंद//मूलभूत नियम
  29. Ramkishore Dahiya वाट्सएप पर नवगीत साहित्य विचार समूह के बुधवारीय विशेषांक 'आज का रचनाकार' में मेरे गीत परिचय सहित waatsaep par nawageet saahity wichaar samooh ke budhawaareey wisheshaank 'aaj kaa rachanaakaar' men mere geet parichay sahit वाट्सएप पर नवगीत साहित्य विचार समूह के बुधवारीय विशेषांक 'आज का रचनाकार' में मेरे गीत परिचय सहित
  30. T“सुन तो सुनन्दा…!” दिए जगमगा उठे die jagamagaa uthe दिए जगमगा उठे

कुछ और तरीक़ों से ढूँढें— Other ways to browse— कुजहु बीअ तरीक़ा सां—