वाह रे सपूत waah re sapoot वाह रे सपूत
रुक्मिणी देवी अपने ६ माह के पोते को गोद में लेकर
बहला रही थी कि अचानक खाँसी का दौरा शुरू हो गया और वो बेदम होने लगी. आवाज़ सुनकर
उनका बेटा विनय वहाँ आ गया और चिंतातुर स्वर में बोला-
“माँ, लगता है तुम्हारी खाँसी बहुत बढ़ गई है”.
सुनकर रुक्मिणी देवी की बुझी-बुझी आँखों में यह
सोचकर चमक आ गई कि बेटे को आखिर मेरी सुध आ ही गई, मुश्किल से खाँसी रुकी तो बोली-
“हाँ बेटे, तुम देख
rukminee dewee apane 6 maah ke pote ko god men lekar
bahalaa rahee thee ki achaanak khaansee kaa dauraa shuroo ho gayaa aur wo bedam hone lagee aawaaz sunakar
unakaa betaa winay wahaan aa gayaa aur chintaatur svar men bolaa-
“maan, lagataa hai tumhaaree khaansee bahut bढ़ gaee hai”
sunakar rukminee dewee kee bujhee-bujhee aankhon men yah
sochakar chamak aa gaee ki bete ko aakhir meree sudh aa hee gaee, mushkil se khaansee rukee to bolee-
“haan bete, tum dekh
रुक्मिणी देवी अपने ६ माह के पोते को गोद में लेकर
बहला रही थी कि अचानक खाँसी का दौरा शुरू हो गया और वो बेदम होने लगी. आवाज़ सुनकर
उनका बेटा विनय वहाँ आ गया और चिंतातुर स्वर में बोला-
“माँ, लगता है तुम्हारी खाँसी बहुत बढ़ गई है”.
सुनकर रुक्मिणी देवी की बुझी-बुझी आँखों में यह
सोचकर चमक आ गई कि बेटे को आखिर मेरी सुध आ ही गई, मुश्किल से खाँसी रुकी तो बोली-
“हाँ बेटे, तुम देख