कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ४३ / ११४ № 43 of 114 रचना ४३ / ११४
१२ मार्च २०१७ 12 March 2017 १२ मार्च २०१७

काश! बेटियाँ होतीं kaash! betiyaan hoteen काश! बेटियाँ होतीं

अरे छाया! तुम यहाँ?

“हाँ ज्योति, मेरा विवाह इसी शहर में हुआ है लेकिन

तुम...?

“मेरा भी, छाया...”, ज्योति हँसकर बोली।

बचपन

की सहेलियाँ छाया और ज्योति इस समय शहर के माल में अपने-अपने पति के साथ खरीदारी

करने आई हुई थीं, और एक ही स्टॉल पर खरीददारी करते हुए

ज्योति की नज़र छाया पर पड़ गई। खड़े खड़े ही खूब बातें हुईं फिर दोनों ने अपने-अपने

पतियों का परिचय भी अपनी-अपनी सहेली से करवाया और एक दूसरे

are chaayaa! tum yahaan?

·

“haan jyoti, meraa wiwaah isee shahar men huaa hai lekin

tum?

·

“meraa bhee, chaayaa”, jyoti hansakar bolee

·

bachapan

kee saheliyaan chaayaa aur jyoti is samay shahar ke maal men apane-apane pati ke saath khareedaaree

karane aaee huee theen, aur ek hee stॉl par khareedadaaree karate hue

jyoti kee nazar chaayaa par pad gaee khade khade hee khoob baaten hueen phir donon ne apane-apane

patiyon kaa parichay bhee apanee-apanee sahelee se karawaayaa aur ek doosare

अरे छाया! तुम यहाँ?

“हाँ ज्योति, मेरा विवाह इसी शहर में हुआ है लेकिन

तुम...?

“मेरा भी, छाया...”, ज्योति हँसकर बोली।

बचपन

की सहेलियाँ छाया और ज्योति इस समय शहर के माल में अपने-अपने पति के साथ खरीदारी

करने आई हुई थीं, और एक ही स्टॉल पर खरीददारी करते हुए

ज्योति की नज़र छाया पर पड़ गई। खड़े खड़े ही खूब बातें हुईं फिर दोनों ने अपने-अपने

पतियों का परिचय भी अपनी-अपनी सहेली से करवाया और एक दूसरे

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗