कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ४४ / ११४ № 44 of 114 रचना ४४ / ११४
१३ मार्च २०१७ 13 March 2017 १३ मार्च २०१७

पिकनिक/कहानी pikanik/kahaanee पिकनिक/कहानी

निम्मो दीदी आ गई...

निम्मो दीदी आ गई...

दूर

से ही ताँगे की आवाज़ सुनकर एक ने दूसरे के,

दूसरे ने तीसरे के कानों में उड़-उड़ कर खबर फूँकी और पलक झपकते ही बच्चों की ख़ासी

वानर सेना किसान कॉलोनी के उपाध्याय-भवन के गेट के पास एकत्र हो गई।

ज्योंही

ताँगा रुका सभी बच्चे कूद फाँद कर सामान उतारने लग गए और निर्मला जब तक ताँगे वाले

को पैसे देती, उसका सामान अंदर भी पहुँच गया और

उसे इसका

nimmo deedee aa gaee

·

nimmo deedee aa gaee

·

door

se hee taange kee aawaaz sunakar ek ne doosare ke,

doosare ne teesare ke kaanon men ud-ud kar khabar phoonkee aur palak jhapakate hee bachchon kee kaasee

waanar senaa kisaan kॉlonee ke upaadhyaay-bhawan ke get ke paas ekatr ho gaee

·

jyonhee

taangaa rukaa sabhee bachche kood phaand kar saamaan utaarane lag gae aur nirmalaa jab tak taange waale

ko paise detee, usakaa saamaan andar bhee pahunch gayaa aur

use isakaa

निम्मो दीदी आ गई...

निम्मो दीदी आ गई...

दूर

से ही ताँगे की आवाज़ सुनकर एक ने दूसरे के,

दूसरे ने तीसरे के कानों में उड़-उड़ कर खबर फूँकी और पलक झपकते ही बच्चों की ख़ासी

वानर सेना किसान कॉलोनी के उपाध्याय-भवन के गेट के पास एकत्र हो गई।

ज्योंही

ताँगा रुका सभी बच्चे कूद फाँद कर सामान उतारने लग गए और निर्मला जब तक ताँगे वाले

को पैसे देती, उसका सामान अंदर भी पहुँच गया और

उसे इसका

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗