कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ४२ / ११४ № 42 of 114 रचना ४२ / ११४
४ मार्च २०१७ 4 March 2017 ४ मार्च २०१७

अलौकिक आनंद alaukik aanand अलौकिक आनंद

“इस बार तो दादी आपको होली खेलनी ही पड़ेगी। आपने पिछली होली पर मुझसे प्रोमिस किया था न!”“हाँ वो तो किया था, लेकिन बच्ची, मुझे रंगों से सख्त एलर्जी है, अगर त्वचा पर खुजली और जलन होने लगेगी तो क्या तुम्हें अच्छा लगेगा?”वो भला उस मासूम को कैसे बताती कि उसने अपने जीवन में पति के शक्की स्वभाव के चलते उनके अलावा किसी मर्द को अपने गाल तो दूर, भाल पर भी गुलाल का टीका तक लगाने नहीं दिया। अब नए दौर के

“is baar to daadee aapako holee khelanee hee padegee aapane pichalee holee par mujhase promis kiyaa thaa n!”“haan wo to kiyaa thaa, lekin bachchee, mujhe rangon se sakht elarjee hai, agar tvachaa par khujalee aur jalan hone lagegee to kyaa tumhen achchaa lagegaa?”wo bhalaa us maasoom ko kaise bataatee ki usane apane jeewan men pati ke shakkee svabhaaw ke chalate unake alaawaa kisee mard ko apane gaal to door, bhaal par bhee gulaal kaa teekaa tak lagaane naheen diyaa ab nae daur ke

“इस बार तो दादी आपको होली खेलनी ही पड़ेगी। आपने पिछली होली पर मुझसे प्रोमिस किया था न!”“हाँ वो तो किया था, लेकिन बच्ची, मुझे रंगों से सख्त एलर्जी है, अगर त्वचा पर खुजली और जलन होने लगेगी तो क्या तुम्हें अच्छा लगेगा?”वो भला उस मासूम को कैसे बताती कि उसने अपने जीवन में पति के शक्की स्वभाव के चलते उनके अलावा किसी मर्द को अपने गाल तो दूर, भाल पर भी गुलाल का टीका तक लगाने नहीं दिया। अब नए दौर के

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗