कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ५ / ११४ № 5 of 114 रचना ५ / ११४
२२ मई २०१५ 22 May 2015 २२ मई २०१५

प्रत्यारोपण pratyaaropan प्रत्यारोपण

भोर की आँख खुलते ही यमुना ज्यों ही बाहर आई, देखा कि उसके घर की बाजू वाली ज़मीन पर

अधिकार कर लिया गया है और उसकी बगिया की कंटीली बाड़ हटाकर खुदाई की जा रही है। उसके सामने मिट्टी का ढेर पड़ा हुआ

था और उसे अपने सपने मिट्टी होते हुए दिख रहे थे। अनेक वर्षों से इसी मिट्टी ने

उसके लिए दो जून की रोटी जुटाई है। क्यारियों में लगे हुए फूलों के पौधों ने उसकी

गृहस्थी की बगिया को प्राण दिये

bhor kee aankh khulate hee yamunaa jyon hee baahar aaee, dekhaa ki usake ghar kee baajoo waalee zameen par

adhikaar kar liyaa gayaa hai aur usakee bagiyaa kee kanteelee baad hataakar khudaaee kee jaa rahee hai usake saamane mittee kaa dher padaa huaa

thaa aur use apane sapane mittee hote hue dikh rahe the anek warshon se isee mittee ne

usake lie do joon kee rotee jutaaee hai kyaariyon men lage hue phoolon ke paudhon ne usakee

griihasthee kee bagiyaa ko praan diye

भोर की आँख खुलते ही यमुना ज्यों ही बाहर आई, देखा कि उसके घर की बाजू वाली ज़मीन पर

अधिकार कर लिया गया है और उसकी बगिया की कंटीली बाड़ हटाकर खुदाई की जा रही है। उसके सामने मिट्टी का ढेर पड़ा हुआ

था और उसे अपने सपने मिट्टी होते हुए दिख रहे थे। अनेक वर्षों से इसी मिट्टी ने

उसके लिए दो जून की रोटी जुटाई है। क्यारियों में लगे हुए फूलों के पौधों ने उसकी

गृहस्थी की बगिया को प्राण दिये

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗