कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ९० / २०४ № 90 of 204 रचना ९० / २०४
२४ मई २०१५ 24 May 2015 २४ मई २०१५

खोलो मन के द्वार बंद क्यों kholo man ke dvaar band kyon खोलो मन के द्वार बंद क्यों

खोलो

मन के द्वार बंद क्यों?

संवादों

के तार बंद क्यों?

अहंकार

की खुली मुट्ठियाँ

प्रेम-पुष्प

उपहार बंद क्यों?

क्या

चुनाव फिर चलकर आए?

सर्पों

की फुफकार बंद क्यों?

मदिरा

के पट खुले बारहा

रोटी

के बाज़ार बंद क्यों?

सत्य

कहें जो उन मुद्दों का

करती

मुख सरकार बंद क्यों?

जब

भी तुमसे मिलने आएँ

मिलते

दर हर बार बंद क्यों?

शूलों

के पहरे में आखिर

फूलों

के परिवार बंद क्यों?

फर्ज़, जन्म देना

औरत का

मिले

जन्म, अधिकार बंद क्यों?

दीनों

हित दहलीज “कल्पना”

तेरी

हे करतार! बंद क्यों?

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

kholo

man ke dvaar band kyon?

·

sanvaadon

ke taar band kyon?

·

ahankaar

kee khulee mutthiyaan

·

prem-pushp

upahaar band kyon?

·

kyaa

chunaaw phir chalakar aae?

·

sarpon

kee phuphakaar band kyon?

·

madiraa

ke pat khule baarahaa

·

rotee

ke baazaar band kyon?

·

saty

kahen jo un muddon kaa

·

karatee

mukh sarakaar band kyon?

·

jab

bhee tumase milane aaen

·

milate

dar har baar band kyon?

·

shoolon

ke pahare men aakhir

·

phoolon

ke pariwaar band kyon?

·

pharz, janm denaa

aurat kaa

·

mile

janm, adhikaar band kyon?

·

deenon

hit dahaleej “kalpanaa”

·

teree

he karataar! band kyon?

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

खोलो

मन के द्वार बंद क्यों?

संवादों

के तार बंद क्यों?

अहंकार

की खुली मुट्ठियाँ

प्रेम-पुष्प

उपहार बंद क्यों?

क्या

चुनाव फिर चलकर आए?

सर्पों

की फुफकार बंद क्यों?

मदिरा

के पट खुले बारहा

रोटी

के बाज़ार बंद क्यों?

सत्य

कहें जो उन मुद्दों का

करती

मुख सरकार बंद क्यों?

जब

भी तुमसे मिलने आएँ

मिलते

दर हर बार बंद क्यों?

शूलों

के पहरे में आखिर

फूलों

के परिवार बंद क्यों?

फर्ज़, जन्म देना

औरत का

मिले

जन्म, अधिकार बंद क्यों?

दीनों

हित दहलीज “कल्पना”

तेरी

हे करतार! बंद क्यों?

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗