कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना २१ / ११४ № 21 of 114 रचना २१ / ११४
१० सितम्बर २०१६ 10 September 2016 १० सितम्बर २०१६

दासता के दाग /लघु कहानी daasataa ke daag /laghu kahaanee दासता के दाग /लघु कहानी

“मिनी बेटे जल्दी आ जाओ नाश्ता लगा दिया है...”

कहते हुए रवीना ने टेबल पर आलू-सैंडविच के साथ अलग-अलग दो प्रकार की चटनी की प्यालियाँ सजा दीं, अपनी सास सुवर्णा को उनके कमरे में नाश्ता देकर आई और पति असीम को भी आवाज़ लगाकर कुर्सी खींचकर बैठ गई।

असीम का सरकारी जॉब है और रवीना एक कॉनवेंट स्कूल में हिन्दी की शिक्षिका है। आज हिन्दी-दिवस है, रवीना सफ़ेद साड़ी और उसी के स्कूल की पहली कक्षा की छात्रा

“minee bete jaldee aa jaao naashtaa lagaa diyaa hai”

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kahate hue raweenaa ne tebal par aaloo-saindawich ke saath alag-alag do prakaar kee chatanee kee pyaaliyaan sajaa deen, apanee saas suwarnaa ko unake kamare men naashtaa dekar aaee aur pati aseem ko bhee aawaaz lagaakar kursee kheenchakar baith gaee

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aseem kaa sarakaaree jॉb hai aur raweenaa ek kॉnawent skool men hindee kee shikshikaa hai aaj hindee-diwas hai, raweenaa safed saadee aur usee ke skool kee pahalee kakshaa kee chaatraa

“मिनी बेटे जल्दी आ जाओ नाश्ता लगा दिया है...”

कहते हुए रवीना ने टेबल पर आलू-सैंडविच के साथ अलग-अलग दो प्रकार की चटनी की प्यालियाँ सजा दीं, अपनी सास सुवर्णा को उनके कमरे में नाश्ता देकर आई और पति असीम को भी आवाज़ लगाकर कुर्सी खींचकर बैठ गई।

असीम का सरकारी जॉब है और रवीना एक कॉनवेंट स्कूल में हिन्दी की शिक्षिका है। आज हिन्दी-दिवस है, रवीना सफ़ेद साड़ी और उसी के स्कूल की पहली कक्षा की छात्रा

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗