कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १३८ / २०५ № 138 of 205 रचना १३८ / २०५
३ सितम्बर २०१६ 3 September 2016 ३ सितम्बर २०१६

अच्छा लगता है achchaa lagataa hai अच्छा लगता है

नित्य

नवेली भोर, टहलना अच्छा लगता है

॥

चिड़ियों सँग, चहुँ ओर, चहकना अच्छा लगता है

॥

जब

बहार हो, रस फुहार हो, वन-बागों के बीच

॥

मुस्काती

कलियों से मिलना, अच्छा लगता है

॥

गोद

प्रकृति की, हरी वादियाँ, जहाँ दिखाई दें

॥

बैठ

पुरानी यादें बुनना, अच्छा लगता है

॥

झील

किनारे, बरखा-बूँदों में सखियों के साथ

॥

इसकी

उसकी, चुगली करना, अच्छा लगता है

॥

सूर्योदय, सूर्यास्त

काल में, सागर तट जाकर

॥

शंख-सीपियाँ, चुनना-गिनना, अच्छा लगता है

॥

चाह, भरी महफिल में कोई मुझको भी गाए

॥

गीत-गज़ल

का हिस्सा बनना, अच्छा लगता है

॥

दिया

‘कल्पना’ तूने जो भी, हर ऋतु

में उपहार

॥

कुदरत

तेरा वो हर गहना,

अच्छा लगता है।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

nity

nawelee bhor, tahalanaa achchaa lagataa hai

·

chidiyon sang, chahun or, chahakanaa achchaa lagataa hai

·

jab

bahaar ho, ras phuhaar ho, wan-baagon ke beech

·

muskaatee

kaliyon se milanaa, achchaa lagataa hai

·

god

prakriiti kee, haree waadiyaan, jahaan dikhaaee den

·

baith

puraanee yaaden bunanaa, achchaa lagataa hai

·

jheel

kinaare, barakhaa-boondon men sakhiyon ke saath

·

isakee

usakee, chugalee karanaa, achchaa lagataa hai

·

sooryoday, sooryaast

kaal men, saagar tat jaakar

·

shankh-seepiyaan, chunanaa-ginanaa, achchaa lagataa hai

·

chaah, bharee mahaphil men koee mujhako bhee gaae

·

geet-gazal

kaa hissaa bananaa, achchaa lagataa hai

·

diyaa

‘kalpanaa’ toone jo bhee, har riitu

men upahaar

·

kudarat

teraa wo har gahanaa,

achchaa lagataa hai

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

नित्य

नवेली भोर, टहलना अच्छा लगता है

॥

चिड़ियों सँग, चहुँ ओर, चहकना अच्छा लगता है

॥

जब

बहार हो, रस फुहार हो, वन-बागों के बीच

॥

मुस्काती

कलियों से मिलना, अच्छा लगता है

॥

गोद

प्रकृति की, हरी वादियाँ, जहाँ दिखाई दें

॥

बैठ

पुरानी यादें बुनना, अच्छा लगता है

॥

झील

किनारे, बरखा-बूँदों में सखियों के साथ

॥

इसकी

उसकी, चुगली करना, अच्छा लगता है

॥

सूर्योदय, सूर्यास्त

काल में, सागर तट जाकर

॥

शंख-सीपियाँ, चुनना-गिनना, अच्छा लगता है

॥

चाह, भरी महफिल में कोई मुझको भी गाए

॥

गीत-गज़ल

का हिस्सा बनना, अच्छा लगता है

॥

दिया

‘कल्पना’ तूने जो भी, हर ऋतु

में उपहार

॥

कुदरत

तेरा वो हर गहना,

अच्छा लगता है।

॥

-कल्पना रामानी

॥

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗