कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १३७ / २०४ № 137 of 204 रचना १३७ / २०४
३ सितम्बर २०१६ 3 September 2016 ३ सितम्बर २०१६

अच्छा लगता है achchaa lagataa hai अच्छा लगता है

नित्य

नवेली भोर, टहलना अच्छा लगता है

चिड़ियों सँग, चहुँ ओर, चहकना अच्छा लगता है

जब

बहार हो, रस फुहार हो, वन-बागों के बीच

मुस्काती

कलियों से मिलना, अच्छा लगता है

गोद

प्रकृति की, हरी वादियाँ, जहाँ दिखाई दें

बैठ

पुरानी यादें बुनना, अच्छा लगता है

झील

किनारे, बरखा-बूँदों में सखियों के साथ

इसकी

उसकी, चुगली करना, अच्छा लगता है

सूर्योदय, सूर्यास्त

काल में, सागर तट जाकर

शंख-सीपियाँ, चुनना-गिनना, अच्छा लगता है

चाह, भरी महफिल में कोई मुझको भी गाए

गीत-गज़ल

का हिस्सा बनना, अच्छा लगता है

दिया

‘कल्पना’ तूने जो भी, हर ऋतु

में उपहार

कुदरत

तेरा वो हर गहना,

अच्छा लगता है।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

nity

nawelee bhor, tahalanaa achchaa lagataa hai

·

chidiyon sang, chahun or, chahakanaa achchaa lagataa hai

·

jab

bahaar ho, ras phuhaar ho, wan-baagon ke beech

·

muskaatee

kaliyon se milanaa, achchaa lagataa hai

·

god

prakriiti kee, haree waadiyaan, jahaan dikhaaee den

·

baith

puraanee yaaden bunanaa, achchaa lagataa hai

·

jheel

kinaare, barakhaa-boondon men sakhiyon ke saath

·

isakee

usakee, chugalee karanaa, achchaa lagataa hai

·

sooryoday, sooryaast

kaal men, saagar tat jaakar

·

shankh-seepiyaan, chunanaa-ginanaa, achchaa lagataa hai

·

chaah, bharee mahaphil men koee mujhako bhee gaae

·

geet-gazal

kaa hissaa bananaa, achchaa lagataa hai

·

diyaa

‘kalpanaa’ toone jo bhee, har riitu

men upahaar

·

kudarat

teraa wo har gahanaa,

achchaa lagataa hai

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

नित्य

नवेली भोर, टहलना अच्छा लगता है

चिड़ियों सँग, चहुँ ओर, चहकना अच्छा लगता है

जब

बहार हो, रस फुहार हो, वन-बागों के बीच

मुस्काती

कलियों से मिलना, अच्छा लगता है

गोद

प्रकृति की, हरी वादियाँ, जहाँ दिखाई दें

बैठ

पुरानी यादें बुनना, अच्छा लगता है

झील

किनारे, बरखा-बूँदों में सखियों के साथ

इसकी

उसकी, चुगली करना, अच्छा लगता है

सूर्योदय, सूर्यास्त

काल में, सागर तट जाकर

शंख-सीपियाँ, चुनना-गिनना, अच्छा लगता है

चाह, भरी महफिल में कोई मुझको भी गाए

गीत-गज़ल

का हिस्सा बनना, अच्छा लगता है

दिया

‘कल्पना’ तूने जो भी, हर ऋतु

में उपहार

कुदरत

तेरा वो हर गहना,

अच्छा लगता है।

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗