कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२५ / १६३ № 125 of 163 रचना १२५ / १६३
२ सितम्बर २०१६ 2 September 2016 २ सितम्बर २०१६

आचार्य संजीव वर्मा सलिल जी की कलम से मेरे नवगीत संग्रह "खेतों ने खत लिखा"की समीक्षा aachaary sanjeew warmaa salil jee kee kalam se mere nawageet sangrah "kheton ne khat likhaa"kee sameekshaa आचार्य संजीव वर्मा सलिल जी की कलम से मेरे नवगीत संग्रह "खेतों ने खत लिखा"की समीक्षा

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गीत-नवगीत के मध्य भारत-पकिस्तान की तरह सरहद

खींचने पर उतारू और एक को दूसरे से श्रेष्ठ सिद्ध करने के दुष्प्रयास में जुटे

समीक्षक-समूह की अनदेखी कर मौन भाव से सतत सृजन-साधना में निमग्न रहकर अपनी रचनाओं

के माध्यम से उत्तर देने में विश्वास रखनेवाली कल्पना रामानी का यह दूसरा

गीत-नवगीत संग्रह आद्योपांत प्रकृति और पर्यावरण की व्यथा-कथा कहता है। आवरण पर

अंकित धरती के तिमिर को चीरता-उजास बिखेरता आशा

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geet-nawageet ke madhy bhaarat-pakistaan kee tarah sarahad

kheenchane par utaaroo aur ek ko doosare se shreshth siddh karane ke dushprayaas men jute

sameekshak-samooh kee anadekhee kar maun bhaaw se satat sriijan-saadhanaa men nimagn rahakar apanee rachanaaon

ke maadhyam se uttar dene men wishvaas rakhanewaalee kalpanaa raamaanee kaa yah doosaraa

geet-nawageet sangrah aadyopaant prakriiti aur paryaawaran kee wyathaa-kathaa kahataa hai aawaran par

ankit dharatee ke timir ko cheerataa-ujaas bikherataa aashaa

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गीत-नवगीत के मध्य भारत-पकिस्तान की तरह सरहद

खींचने पर उतारू और एक को दूसरे से श्रेष्ठ सिद्ध करने के दुष्प्रयास में जुटे

समीक्षक-समूह की अनदेखी कर मौन भाव से सतत सृजन-साधना में निमग्न रहकर अपनी रचनाओं

के माध्यम से उत्तर देने में विश्वास रखनेवाली कल्पना रामानी का यह दूसरा

गीत-नवगीत संग्रह आद्योपांत प्रकृति और पर्यावरण की व्यथा-कथा कहता है। आवरण पर

अंकित धरती के तिमिर को चीरता-उजास बिखेरता आशा

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗