कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२६ / १६३ № 126 of 163 रचना १२६ / १६३
११ सितम्बर २०१६ 11 September 2016 ११ सितम्बर २०१६

बाँसुरी में सुर न हो तो baansuree men sur n ho to बाँसुरी में सुर न हो तो

बाँसूरी

में सुर न हो तो

प्राण, धुन कैसे

बुनेंगे?

जो

हुए तरुवर पुराने

छोड़ना

निज स्थान होगा

पौध-नूतन-जन्म

से ही

सर्व

का उत्थान होगा

अंकुरण

फिर-फिर न हों तो

फल

सरस कैसे

उगेंगे?

सुर

कहें यदि श्रेष्ठ हम ही

राग

का अपमान है ये

जानकर

अंजान बनता

क्योंकि

मन, नादान है ये

रागिनी

में रस न हो तो

साज़

फिर कैसे

बजेंगे?

है

ज़रूरी आरियाँ जानें

सुई

भी कीमती

baansooree

men sur n ho to

·

praan, dhun kaise

·

bunenge?

·

jo

hue taruwar puraane

·

chodanaa

nij sthaan hogaa

·

paudh-nootan-janm

se hee

·

sarv

kaa utthaan hogaa

·

ankuran

phir-phir n hon to

·

phal

saras kaise

·

ugenge?

·

sur

kahen yadi shreshth ham hee

·

raag

kaa apamaan hai ye

·

jaanakar

anjaan banataa

·

kyonki

man, naadaan hai ye

·

raaginee

men ras n ho to

·

saaz

phir kaise

·

bajenge?

·

hai

zarooree aariyaan jaanen

·

suee

bhee keematee

बाँसूरी

में सुर न हो तो

प्राण, धुन कैसे

बुनेंगे?

जो

हुए तरुवर पुराने

छोड़ना

निज स्थान होगा

पौध-नूतन-जन्म

से ही

सर्व

का उत्थान होगा

अंकुरण

फिर-फिर न हों तो

फल

सरस कैसे

उगेंगे?

सुर

कहें यदि श्रेष्ठ हम ही

राग

का अपमान है ये

जानकर

अंजान बनता

क्योंकि

मन, नादान है ये

रागिनी

में रस न हो तो

साज़

फिर कैसे

बजेंगे?

है

ज़रूरी आरियाँ जानें

सुई

भी कीमती

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗