कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना १८ / ११४ № 18 of 114 रचना १८ / ११४
५ मई २०१६ 5 May 2016 ५ मई २०१६

डायन कहाँ है daayan kahaan hai डायन कहाँ है

विनी ने घर पहुँचते ही देखा कि आँगन में एक

साधु-वेशधारी बाबा मौजूद हैं, निकट ही

उनका बड़ा सा थैला रखा हुआ था और उसकी माँ तथा मुहल्ले की कुछ औरतें-बच्चे उसे घेरे

हुए हैं। माँ के हाथ में एक चादर भी थी। वो समझ गई कि आज फिर कोई ठग इन भोली भाली

महिलाओं को चकमा देने उनकी बस्ती में पहुँच गया है। यह एक गाँव के सीधे-साधे लोगों

की बस्ती थी, जहाँ आए दिन घर के बड़े बच्चों के

स्कूल

winee ne ghar pahunchate hee dekhaa ki aangan men ek

saadhu-weshadhaaree baabaa maujood hain, nikat hee

unakaa badaa saa thailaa rakhaa huaa thaa aur usakee maan tathaa muhalle kee kuch auraten-bachche use ghere

hue hain maan ke haath men ek chaadar bhee thee wo samajh gaee ki aaj phir koee thag in bholee bhaalee

mahilaaon ko chakamaa dene unakee bastee men pahunch gayaa hai yah ek gaanv ke seedhe-saadhe logon

kee bastee thee, jahaan aae din ghar ke bade bachchon ke

skool

विनी ने घर पहुँचते ही देखा कि आँगन में एक

साधु-वेशधारी बाबा मौजूद हैं, निकट ही

उनका बड़ा सा थैला रखा हुआ था और उसकी माँ तथा मुहल्ले की कुछ औरतें-बच्चे उसे घेरे

हुए हैं। माँ के हाथ में एक चादर भी थी। वो समझ गई कि आज फिर कोई ठग इन भोली भाली

महिलाओं को चकमा देने उनकी बस्ती में पहुँच गया है। यह एक गाँव के सीधे-साधे लोगों

की बस्ती थी, जहाँ आए दिन घर के बड़े बच्चों के

स्कूल

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗