कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ४६ / ६३ № 46 of 63 रचना ४६ / ६३
२ मई २०१६ 2 May 2016 २ मई २०१६

गर्मी करे विहार garmee kare wihaar गर्मी करे विहार

गर्मी में देखो सखी, तरणताल का जोश।

लोहा लेने धूप से, खोला राहत-कोश।

खोला राहत-कोश, जानता है यह ज्ञानी

जल निगले जब काल, उसे बनना है दानी।

कितना सखी उदार, ताल यह सेवाकर्मी

बनकर शीत फुहार, हर रहा जन की गर्मी।

जब-जब आकर भूमि पर, गर्मी करे विहार

मित्रों तब उसका करें, मनचाहा सत्कार

मनचाहा सत्कार, सुराही जल भर लाएँ

फल सलाद के साथ, दही का पात्र सजाएँ

जो

garmee men dekho sakhee, taranataal kaa josh

·

lohaa lene dhoop se, kholaa raahat-kosh

·

kholaa raahat-kosh, jaanataa hai yah jnaanee

·

jal nigale jab kaal, use bananaa hai daanee

·

kitanaa sakhee udaar, taal yah sewaakarmee

·

banakar sheet phuhaar, har rahaa jan kee garmee

·

jab-jab aakar bhoomi par, garmee kare wihaar

·

mitron tab usakaa karen, manachaahaa satkaar

·

manachaahaa satkaar, suraahee jal bhar laaen

·

phal salaad ke saath, dahee kaa paatr sajaaen

·

jo

गर्मी में देखो सखी, तरणताल का जोश।

लोहा लेने धूप से, खोला राहत-कोश।

खोला राहत-कोश, जानता है यह ज्ञानी

जल निगले जब काल, उसे बनना है दानी।

कितना सखी उदार, ताल यह सेवाकर्मी

बनकर शीत फुहार, हर रहा जन की गर्मी।

जब-जब आकर भूमि पर, गर्मी करे विहार

मित्रों तब उसका करें, मनचाहा सत्कार

मनचाहा सत्कार, सुराही जल भर लाएँ

फल सलाद के साथ, दही का पात्र सजाएँ

जो

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗