कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना २ / ६३ № 2 of 63 रचना २ / ६३
१४ जुलाई २०१२ 14 July 2012 १४ जुलाई २०१२

हरसिंगार harasingaar हरसिंगार

फूलों से हो दोस्ती,

कुदरत से हो प्यार।

एक पात्र मिट्टी भरें,

रोपें हरसिंगार।

रोपें हरसिंगार,

सींचिए नित्य सलिल से,

महकाएँ घर द्वार,

मिले खुशबू हर पल से।

करें प्रकृति को मुक्त,

प्रदूषित कटु शूलों से,

कुदरत से हो प्यार,

दोस्ती हो फूलों से।

नाम तुम्हारे हैं कई,

प्यारे हरसिंगार।

बगिया में सबसे अलग,

तेरी महक अपार।

तेरी महक अपार,

रूप की शान निराली,

दुलराकर हर रोज़,

करूँ मन से रखवाली।&

phoolon se ho dostee,

kudarat se ho pyaar

ek paatr mittee bharen,

ropen harasingaar

ropen harasingaar,

seenchie nity salil se,

mahakaaen ghar dvaar,

mile khushaboo har pal se

karen prakriiti ko mukt,

pradooshit katu shoolon se,

kudarat se ho pyaar,

dostee ho phoolon se

·

naam tumhaare hain kaee,

pyaare harasingaar

bagiyaa men sabase alag,

teree mahak apaar

teree mahak apaar,

roop kee shaan niraalee,

dularaakar har roz,

karoon man se rakhawaalee&

फूलों से हो दोस्ती,

कुदरत से हो प्यार।

एक पात्र मिट्टी भरें,

रोपें हरसिंगार।

रोपें हरसिंगार,

सींचिए नित्य सलिल से,

महकाएँ घर द्वार,

मिले खुशबू हर पल से।

करें प्रकृति को मुक्त,

प्रदूषित कटु शूलों से,

कुदरत से हो प्यार,

दोस्ती हो फूलों से।

नाम तुम्हारे हैं कई,

प्यारे हरसिंगार।

बगिया में सबसे अलग,

तेरी महक अपार।

तेरी महक अपार,

रूप की शान निराली,

दुलराकर हर रोज़,

करूँ मन से रखवाली।&

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗