कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना १ / ६३ № 1 of 63 रचना १ / ६३
१३ जुलाई २०१२ 13 July 2012 १३ जुलाई २०१२

चाह हमारी हो यही chaah hamaaree ho yahee चाह हमारी हो यही

चाह हमारी हो

यही, करे तरक्की देश।

कदम बढ़ाएँ साथ

में, अलग लाख परिवेश।

अलग लाख परिवेश,एकजुट हो हर कोना

बोएँ ऐसे बीज, कि धरती उगले सोना।

कहनी इतनी बात, भुला कर निजता सारी

करे तरक्की देश, यही हो चाह हमारी।

.........................

जन-जन को

शिक्षित करें, शिक्षा है

वरदान

देकर पाएँ दो

गुना, विद्या ऐसा दान।

विद्या ऐसा दान, कभी भी व्यर्थ न जाए

उन्नत बने समाज, आप का

chaah hamaaree ho

yahee, kare tarakkee desh

kadam bढ़aaen saath

men, alag laakh pariwesh

alag laakh pariwesh,ekajut ho har konaa

boen aise beej, ki dharatee ugale sonaa

kahanee itanee baat, bhulaa kar nijataa saaree

kare tarakkee desh, yahee ho chaah hamaaree

·

jan-jan ko

shikshit karen, shikshaa hai

waradaan

dekar paaen do

gunaa, widyaa aisaa daan

widyaa aisaa daan, kabhee bhee wyarth n jaae

unnat bane samaaj, aap kaa

चाह हमारी हो

यही, करे तरक्की देश।

कदम बढ़ाएँ साथ

में, अलग लाख परिवेश।

अलग लाख परिवेश,एकजुट हो हर कोना

बोएँ ऐसे बीज, कि धरती उगले सोना।

कहनी इतनी बात, भुला कर निजता सारी

करे तरक्की देश, यही हो चाह हमारी।

.........................

जन-जन को

शिक्षित करें, शिक्षा है

वरदान

देकर पाएँ दो

गुना, विद्या ऐसा दान।

विद्या ऐसा दान, कभी भी व्यर्थ न जाए

उन्नत बने समाज, आप का

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗