कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ६१ / ६३ № 61 of 63 रचना ६१ / ६३
२२ दिसम्बर २०१९ 22 December 2019 २२ दिसम्बर २०१९

देखी सुंदर भोर dekhee sundar bhor देखी सुंदर भोर

दस्तक से पलकें खुलीं,देखी सुंदर भोर।

शीत खड़ी थी सामने,कुहरा था पुरजोर।

कुहरा था पुरजोर, धुआँ ही धुआँ बिछा था।

भूगत होकर सूर्य, न जाने कहाँ छिपा था।

रहे ताकते राह, न आया दिनकर जब तक

देखी सुंदर भोर, हुई कुहरे की दस्तक।

शीत खड़ी है द्वार पर, धर कुहरे का ताज।

ऋतु रानी का आज से होगा एकल राज।

होगा एकल राज, व्यर्थ है छिपकर रहना

स्वागत करिए मीत, "कल्पना" का है कहना।

मिले पूर्व संकेत, सुखद यह बात बड़ी है

धर कुहरे का ताज, द्वार पर शीत खड़ी है।

dastak se palaken khuleen,dekhee sundar bhor

sheet khadee thee saamane,kuharaa thaa purajor

kuharaa thaa purajor, dhuaan hee dhuaan bichaa thaa

bhoogat hokar soory, n jaane kahaan chipaa thaa

rahe taakate raah, n aayaa dinakar jab tak

dekhee sundar bhor, huee kuhare kee dastak

·

sheet khadee hai dvaar par, dhar kuhare kaa taaj

riitu raanee kaa aaj se hogaa ekal raaj

hogaa ekal raaj, wyarth hai chipakar rahanaa

svaagat karie meet, "kalpanaa" kaa hai kahanaa

mile poorv sanket, sukhad yah baat badee hai

dhar kuhare kaa taaj, dvaar par sheet khadee hai

दस्तक से पलकें खुलीं,देखी सुंदर भोर।

शीत खड़ी थी सामने,कुहरा था पुरजोर।

कुहरा था पुरजोर, धुआँ ही धुआँ बिछा था।

भूगत होकर सूर्य, न जाने कहाँ छिपा था।

रहे ताकते राह, न आया दिनकर जब तक

देखी सुंदर भोर, हुई कुहरे की दस्तक।

शीत खड़ी है द्वार पर, धर कुहरे का ताज।

ऋतु रानी का आज से होगा एकल राज।

होगा एकल राज, व्यर्थ है छिपकर रहना

स्वागत करिए मीत, "कल्पना" का है कहना।

मिले पूर्व संकेत, सुखद यह बात बड़ी है

धर कुहरे का ताज, द्वार पर शीत खड़ी है।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗