कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ४२ / ६३ № 42 of 63 रचना ४२ / ६३
७ अप्रैल २०१४ 7 April 2014 ७ अप्रैल २०१४

सिर पर जब सूरज चढ़े sir par jab sooraj chढ़e सिर पर जब सूरज चढ़े

सिर पर जब सूरज चढ़े, बाहर धरें न पाँव।पहनें सूती वस्त्र औ, बैठें शीतल छाँव।बैठें शीतल छाँव, कीजिये भोजन हल्काआधा करें अनाज, खूब हो सेवन फल का। कहनी इतनी बात, ताप से रहें सँभलकरबाहर धरें न पाँव, चढ़े जब सूरज सिर पर।

गर्मी का इक रूप ये, लगता बड़ा हसीन।

सुबह बुलाती बाग में, दुपहर घर में लीन।

दुपहर घर में लीन, सुलाते कूलर ए॰सी॰

उतना ही आनंद, जहाँ क्षमता हो

sir par jab sooraj chढ़e, baahar dharen n paanvpahanen sootee wastr au, baithen sheetal chaanvbaithen sheetal chaanv, keejiye bhojan halkaaaadhaa karen anaaj, khoob ho sewan phal kaa kahanee itanee baat, taap se rahen sanbhalakarabaahar dharen n paanv, chढ़e jab sooraj sir par

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garmee kaa ik roop ye, lagataa badaa haseen

subah bulaatee baag men, dupahar ghar men leen

dupahar ghar men leen, sulaate koolar e॰see॰

utanaa hee aanand, jahaan kshamataa ho

सिर पर जब सूरज चढ़े, बाहर धरें न पाँव।पहनें सूती वस्त्र औ, बैठें शीतल छाँव।बैठें शीतल छाँव, कीजिये भोजन हल्काआधा करें अनाज, खूब हो सेवन फल का। कहनी इतनी बात, ताप से रहें सँभलकरबाहर धरें न पाँव, चढ़े जब सूरज सिर पर।

गर्मी का इक रूप ये, लगता बड़ा हसीन।

सुबह बुलाती बाग में, दुपहर घर में लीन।

दुपहर घर में लीन, सुलाते कूलर ए॰सी॰

उतना ही आनंद, जहाँ क्षमता हो

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗