कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना २२ / ६३ № 22 of 63 रचना २२ / ६३
१५ जनवरी २०१३ 15 January 2013 १५ जनवरी २०१३

सूरज निकला सैर को sooraj nikalaa sair ko सूरज निकला सैर को

सूरज निकला सैर को, बड़े जोश के साथ।

॥

सहमी सहमी शीत ने, जोड़ लिए अब हाथ।

॥

जोड़ लिए अब हाथ, विदाई सबसे माँगी

॥

फि आने की बात,कही, ज़िद अपनीत्यागी।

॥

समय हुआ अनुकूल, दिवस का पारा

उछला,

॥

बड़े जोश के साथ, सैर को सूरज

निकला।

॥

राहत दे दी सूर्य ने, आहत है अब ठंड।

॥

बोरा बिस्तर बाँधके, छोड़ा राज अखंड।

॥

छोड़ा राज अखंड, चली अपने घर

वापस,

॥

नव किरणों के साथ, उमंगें लाया

तापस।

॥

सरल हुए सब काम,

sooraj nikalaa sair ko, bade josh ke saath

·

sahamee sahamee sheet ne, jod lie ab haath

·

jod lie ab haath, widaaee sabase maangee

·

phi aane kee baat,kahee, zid apaneetyaagee

·

samay huaa anukool, diwas kaa paaraa

uchalaa,

·

bade josh ke saath, sair ko sooraj

nikalaa

·

raahat de dee soory ne, aahat hai ab thand

·

boraa bistar baandhake, chodaa raaj akhand

·

chodaa raaj akhand, chalee apane ghar

waapas,

·

naw kiranon ke saath, umangen laayaa

taapas

·

saral hue sab kaam,

सूरज निकला सैर को, बड़े जोश के साथ।

॥

सहमी सहमी शीत ने, जोड़ लिए अब हाथ।

॥

जोड़ लिए अब हाथ, विदाई सबसे माँगी

॥

फि आने की बात,कही, ज़िद अपनीत्यागी।

॥

समय हुआ अनुकूल, दिवस का पारा

उछला,

॥

बड़े जोश के साथ, सैर को सूरज

निकला।

॥

राहत दे दी सूर्य ने, आहत है अब ठंड।

॥

बोरा बिस्तर बाँधके, छोड़ा राज अखंड।

॥

छोड़ा राज अखंड, चली अपने घर

वापस,

॥

नव किरणों के साथ, उमंगें लाया

तापस।

॥

सरल हुए सब काम,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗