कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २० / ६७ № 20 of 67 रचना २० / ६७
१५ जनवरी २०१३ 15 January 2013 १५ जनवरी २०१३

ऋतु बदली सूरज चला riitu badalee sooraj chalaa ऋतु बदली सूरज चला

ऋतु

बदली, सूरज चला, उतरायन की

ओर।

॥

तिल-तिल

दिन बढ़ने लगे, घटा

शीत का ज़ोर।

॥

ग्रह, तारे औ

राशियाँ,

सभी

प्रकृति के दास।

॥

सार

मनुज यदि जान ले, क्यों

फिर भोगे त्रास।

॥

मन

पतंग से बाँध लें, मानवता

की डोर।

॥

लिखें

इबारत प्रेम की, भेजें

चारों ओर।

॥

सजी

पतंगें उड़ चलीं, नील

गगन की ओर।

॥

बात

हवा से कर रही, संग

मनचली डोर।

॥

तिल

पपड़ी औ रेवड़ी, भाया

गुड का स्वाद।

॥

कटी

पतंगें देखकर, आया

बचपन याद।&

riitu

badalee, sooraj chalaa, utaraayan kee

or

·

til-til

din bढ़ne lage, ghataa

sheet kaa zor

·

grah, taare au

raashiyaan,

sabhee

prakriiti ke daas

·

saar

manuj yadi jaan le, kyon

phir bhoge traas

·

man

patang se baandh len, maanawataa

kee dor

·

likhen

ibaarat prem kee, bhejen

chaaron or

·

sajee

patangen ud chaleen, neel

gagan kee or

·

baat

hawaa se kar rahee, sang

manachalee dor

·

til

papadee au rewadee, bhaayaa

gud kaa svaad

·

katee

patangen dekhakar, aayaa

bachapan yaad&

ऋतु

बदली, सूरज चला, उतरायन की

ओर।

॥

तिल-तिल

दिन बढ़ने लगे, घटा

शीत का ज़ोर।

॥

ग्रह, तारे औ

राशियाँ,

सभी

प्रकृति के दास।

॥

सार

मनुज यदि जान ले, क्यों

फिर भोगे त्रास।

॥

मन

पतंग से बाँध लें, मानवता

की डोर।

॥

लिखें

इबारत प्रेम की, भेजें

चारों ओर।

॥

सजी

पतंगें उड़ चलीं, नील

गगन की ओर।

॥

बात

हवा से कर रही, संग

मनचली डोर।

॥

तिल

पपड़ी औ रेवड़ी, भाया

गुड का स्वाद।

॥

कटी

पतंगें देखकर, आया

बचपन याद।&

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗