ऋतु बदली सूरज चला riitu badalee sooraj chalaa ऋतु बदली सूरज चला
ऋतु
बदली, सूरज चला, उतरायन की
ओर।
तिल-तिल
दिन बढ़ने लगे, घटा
शीत का ज़ोर।
ग्रह, तारे औ
राशियाँ,
सभी
प्रकृति के दास।
सार
मनुज यदि जान ले, क्यों
फिर भोगे त्रास।
मन
पतंग से बाँध लें, मानवता
की डोर।
लिखें
इबारत प्रेम की, भेजें
चारों ओर।
सजी
पतंगें उड़ चलीं, नील
गगन की ओर।
बात
हवा से कर रही, संग
मनचली डोर।
तिल
पपड़ी औ रेवड़ी, भाया
गुड का स्वाद।
कटी
पतंगें देखकर, आया
बचपन याद।&
riitu
badalee, sooraj chalaa, utaraayan kee
or
til-til
din bढ़ne lage, ghataa
sheet kaa zor
grah, taare au
raashiyaan,
sabhee
prakriiti ke daas
saar
manuj yadi jaan le, kyon
phir bhoge traas
man
patang se baandh len, maanawataa
kee dor
likhen
ibaarat prem kee, bhejen
chaaron or
sajee
patangen ud chaleen, neel
gagan kee or
baat
hawaa se kar rahee, sang
manachalee dor
til
papadee au rewadee, bhaayaa
gud kaa svaad
katee
patangen dekhakar, aayaa
bachapan yaad&
ऋतु
बदली, सूरज चला, उतरायन की
ओर।
तिल-तिल
दिन बढ़ने लगे, घटा
शीत का ज़ोर।
ग्रह, तारे औ
राशियाँ,
सभी
प्रकृति के दास।
सार
मनुज यदि जान ले, क्यों
फिर भोगे त्रास।
मन
पतंग से बाँध लें, मानवता
की डोर।
लिखें
इबारत प्रेम की, भेजें
चारों ओर।
सजी
पतंगें उड़ चलीं, नील
गगन की ओर।
बात
हवा से कर रही, संग
मनचली डोर।
तिल
पपड़ी औ रेवड़ी, भाया
गुड का स्वाद।
कटी
पतंगें देखकर, आया
बचपन याद।&