कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना १९ / ६५ № 19 of 65 रचना १९ / ६५
१५ जनवरी २०१३ 15 January 2013 १५ जनवरी २०१३

ऋतु बदली सूरज चला riitu badalee sooraj chalaa ऋतु बदली सूरज चला

ऋतु

बदली, सूरज चला, उतरायन की

ओर।

तिल-तिल

दिन बढ़ने लगे, घटा

शीत का ज़ोर।

ग्रह, तारे औ

राशियाँ,

सभी

प्रकृति के दास।

सार

मनुज यदि जान ले, क्यों

फिर भोगे त्रास।

मन

पतंग से बाँध लें, मानवता

की डोर।

लिखें

इबारत प्रेम की, भेजें

चारों ओर।

सजी

पतंगें उड़ चलीं, नील

गगन की ओर।

बात

हवा से कर रही, संग

मनचली डोर।

तिल

पपड़ी औ रेवड़ी, भाया

गुड का स्वाद।

कटी

पतंगें देखकर, आया

बचपन याद।&

riitu

badalee, sooraj chalaa, utaraayan kee

or

·

til-til

din bढ़ne lage, ghataa

sheet kaa zor

·

grah, taare au

raashiyaan,

sabhee

prakriiti ke daas

·

saar

manuj yadi jaan le, kyon

phir bhoge traas

·

man

patang se baandh len, maanawataa

kee dor

·

likhen

ibaarat prem kee, bhejen

chaaron or

·

sajee

patangen ud chaleen, neel

gagan kee or

·

baat

hawaa se kar rahee, sang

manachalee dor

·

til

papadee au rewadee, bhaayaa

gud kaa svaad

·

katee

patangen dekhakar, aayaa

bachapan yaad&

ऋतु

बदली, सूरज चला, उतरायन की

ओर।

तिल-तिल

दिन बढ़ने लगे, घटा

शीत का ज़ोर।

ग्रह, तारे औ

राशियाँ,

सभी

प्रकृति के दास।

सार

मनुज यदि जान ले, क्यों

फिर भोगे त्रास।

मन

पतंग से बाँध लें, मानवता

की डोर।

लिखें

इबारत प्रेम की, भेजें

चारों ओर।

सजी

पतंगें उड़ चलीं, नील

गगन की ओर।

बात

हवा से कर रही, संग

मनचली डोर।

तिल

पपड़ी औ रेवड़ी, भाया

गुड का स्वाद।

कटी

पतंगें देखकर, आया

बचपन याद।&

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗