कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५९ / ६७ № 59 of 67 रचना ५९ / ६७
१८ जुलाई २०१५ 18 July 2015 १८ जुलाई २०१५

जल बरसाओ मेघ रे jal barasaao megh re जल बरसाओ मेघ रे

जल बरसाओ मेघ रे, मुनिया बड़ी उदास।

॥

कागज़ किश्ती उड़ चली, पानी की है आस।

॥

मेघा हम तो चाहते, ना सूखा ना बाढ़।

॥

सावन बरसे झूमके, भीगा हो आषाढ़।

॥

तरस गए जल बूँद को, मेघ बुझाओ प्यास।

॥

चार मास के पाहुने, बँधी तुम्हीं से आस।

॥

नदिया पोखर मौन हैं, खोई है पहचान।

॥

लोग नहीं अब पूजते, किया नहीं जल दान।

॥

वसुधा राह निहारती, बादल सुनो पुकार।

॥

सूरज ने वेधा बदन, दे दो शीतल धार।

॥

तर हों

jal barasaao megh re, muniyaa badee udaas

·

kaagaz kishtee ud chalee, paanee kee hai aas

·

meghaa ham to chaahate, naa sookhaa naa baaढ़

·

saawan barase jhoomake, bheegaa ho aashaaढ़

·

taras gae jal boond ko, megh bujhaao pyaas

·

chaar maas ke paahune, bandhee tumheen se aas

·

nadiyaa pokhar maun hain, khoee hai pahachaan

·

log naheen ab poojate, kiyaa naheen jal daan

·

wasudhaa raah nihaaratee, baadal suno pukaar

·

sooraj ne wedhaa badan, de do sheetal dhaar

·

tar hon

जल बरसाओ मेघ रे, मुनिया बड़ी उदास।

॥

कागज़ किश्ती उड़ चली, पानी की है आस।

॥

मेघा हम तो चाहते, ना सूखा ना बाढ़।

॥

सावन बरसे झूमके, भीगा हो आषाढ़।

॥

तरस गए जल बूँद को, मेघ बुझाओ प्यास।

॥

चार मास के पाहुने, बँधी तुम्हीं से आस।

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नदिया पोखर मौन हैं, खोई है पहचान।

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लोग नहीं अब पूजते, किया नहीं जल दान।

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वसुधा राह निहारती, बादल सुनो पुकार।

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सूरज ने वेधा बदन, दे दो शीतल धार।

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तर हों

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗