जल बरसाओ मेघ रे jal barasaao megh re जल बरसाओ मेघ रे
जल बरसाओ मेघ रे, मुनिया बड़ी उदास।
कागज़ किश्ती उड़ चली, पानी की है आस।
मेघा हम तो चाहते, ना सूखा ना बाढ़।
सावन बरसे झूमके, भीगा हो आषाढ़।
तरस गए जल बूँद को, मेघ बुझाओ प्यास।
चार मास के पाहुने, बँधी तुम्हीं से आस।
नदिया पोखर मौन हैं, खोई है पहचान।
लोग नहीं अब पूजते, किया नहीं जल दान।
वसुधा राह निहारती, बादल सुनो पुकार।
सूरज ने वेधा बदन, दे दो शीतल धार।
तर हों
jal barasaao megh re, muniyaa badee udaas
kaagaz kishtee ud chalee, paanee kee hai aas
meghaa ham to chaahate, naa sookhaa naa baaढ़
saawan barase jhoomake, bheegaa ho aashaaढ़
taras gae jal boond ko, megh bujhaao pyaas
chaar maas ke paahune, bandhee tumheen se aas
nadiyaa pokhar maun hain, khoee hai pahachaan
log naheen ab poojate, kiyaa naheen jal daan
wasudhaa raah nihaaratee, baadal suno pukaar
sooraj ne wedhaa badan, de do sheetal dhaar
tar hon
जल बरसाओ मेघ रे, मुनिया बड़ी उदास।
कागज़ किश्ती उड़ चली, पानी की है आस।
मेघा हम तो चाहते, ना सूखा ना बाढ़।
सावन बरसे झूमके, भीगा हो आषाढ़।
तरस गए जल बूँद को, मेघ बुझाओ प्यास।
चार मास के पाहुने, बँधी तुम्हीं से आस।
नदिया पोखर मौन हैं, खोई है पहचान।
लोग नहीं अब पूजते, किया नहीं जल दान।
वसुधा राह निहारती, बादल सुनो पुकार।
सूरज ने वेधा बदन, दे दो शीतल धार।
तर हों