जिनके मन में सच की सरिता बहती है jinake man men sach kee saritaa bahatee hai जिनके मन में सच की सरिता बहती है
जिनके
मन में सच की सरिता बहती है
उनकी
कुदरत भी होती हमजोली है
जब-जब
बढ़ते लोभ, पाप, संत्रास, तमस
तब-तब
कविता मुखरित होकर बोली है
शब्द, इबारत, कागज़ चाहे चुराए कोई
गुण, भावों की
होती कभी न चोरी है
होते
वे ही जलील जहाँ के तानों से
बेच
ज़मीर जिन्होंने ‘वाह’ बटोरी है
खोदें
खल बुनियाद लाख अच्छाई की
इस
ज़मीन में बंधु! बहुत बल बाकी है
बनी
कौन सी सुई? सिये जो सच के होंठ
किए
जिन्होंने जतन, मात ही खाई है
पानी
मरता देख कुटिल बेशर्मों का
माँ
धरती भी हुई शर्म से पानी है
कलम
‘कल्पना’ है निर्दोष रसित जिसकी
रचना
उसकी खुद विज्ञापन होती है
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
jinake
man men sach kee saritaa bahatee hai
unakee
kudarat bhee hotee hamajolee hai
jab-jab
bढ़te lobh, paap, santraas, tamas
tab-tab
kawitaa mukharit hokar bolee hai
shabd, ibaarat, kaagaz chaahe churaae koee
gun, bhaawon kee
hotee kabhee n choree hai
hote
we hee jaleel jahaan ke taanon se
bech
zameer jinhonne ‘waah’ batoree hai
khoden
khal buniyaad laakh achchaaee kee
is
zameen men bandhu! bahut bal baakee hai
banee
kaun see suee? siye jo sach ke honth
kie
jinhonne jatan, maat hee khaaee hai
paanee
marataa dekh kutil besharmon kaa
maan
dharatee bhee huee sharm se paanee hai
kalam
‘kalpanaa’ hai nirdosh rasit jisakee
rachanaa
usakee khud wijnaapan hotee hai
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
जिनके
मन में सच की सरिता बहती है
उनकी
कुदरत भी होती हमजोली है
जब-जब
बढ़ते लोभ, पाप, संत्रास, तमस
तब-तब
कविता मुखरित होकर बोली है
शब्द, इबारत, कागज़ चाहे चुराए कोई
गुण, भावों की
होती कभी न चोरी है
होते
वे ही जलील जहाँ के तानों से
बेच
ज़मीर जिन्होंने ‘वाह’ बटोरी है
खोदें
खल बुनियाद लाख अच्छाई की
इस
ज़मीन में बंधु! बहुत बल बाकी है
बनी
कौन सी सुई? सिये जो सच के होंठ
किए
जिन्होंने जतन, मात ही खाई है
पानी
मरता देख कुटिल बेशर्मों का
माँ
धरती भी हुई शर्म से पानी है
कलम
‘कल्पना’ है निर्दोष रसित जिसकी
रचना
उसकी खुद विज्ञापन होती है
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी