कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ९९ / २०४ № 99 of 204 रचना ९९ / २०४
६ अगस्त २०१५ 6 August 2015 ६ अगस्त २०१५

मानसूनी बारिश के, क्या हसीन नज़ारे हैं maanasoonee baarish ke, kyaa haseen nazaare hain मानसूनी बारिश के, क्या हसीन नज़ारे हैं

मानसूनी बारिश के, क्या हसीं नज़ारे हैं।

रंग सारे धरती पर, इन्द्र ने उतारे हैं।

छा गया है बागों में, सुर्ख रंग कलियों

पर

तितलियों के भँवरों से, हो रहे इशारे

हैं।

सौंधी-सौंधी माटी में, रंग है उमंगों का

तर हुए किसानों के, खेत-खेत प्यारे हैं।

मेघों ने बिछाया है, श्याम रंग का आँचल

रात हर अमावस है, सो गए सितारे हैं।

सब्ज़ रंगी सावन ने, सींच दिया है जीवन

बूँद-बूँद बारिश ने, मन-चमन सँवारे हैं।

भर दिये हैं रिमझिम ने, प्रेम रंग जन-जन

में

मन को बहलाने के, ये सुखद सहारे हैं।

भाव रंग बरखा के, गा रहे सुमंगल गीत

धार-धार अमृत से, तृप्त स्रोत सारे हैं।

ज्यों बदलते मौसम हैं, रंग भी बदल जाते

‘कल्पना’ जुड़े इनसे, शुभ दिवस हमारे हैं।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

maanasoonee baarish ke, kyaa haseen nazaare hain

·

rang saare dharatee par, indr ne utaare hain

·

chaa gayaa hai baagon men, surkh rang kaliyon

par

·

titaliyon ke bhanvaron se, ho rahe ishaare

hain

·

saundhee-saundhee maatee men, rang hai umangon kaa

·

tar hue kisaanon ke, khet-khet pyaare hain

·

meghon ne bichaayaa hai, shyaam rang kaa aanchal

·

raat har amaawas hai, so gae sitaare hain

·

sabz rangee saawan ne, seench diyaa hai jeewan

·

boond-boond baarish ne, man-chaman sanvaare hain

·

bhar diye hain rimajhim ne, prem rang jan-jan

men

·

man ko bahalaane ke, ye sukhad sahaare hain

·

bhaaw rang barakhaa ke, gaa rahe sumangal geet

·

dhaar-dhaar amriit se, triipt srot saare hain

·

jyon badalate mausam hain, rang bhee badal jaate

·

‘kalpanaa’ jude inase, shubh diwas hamaare hain

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

मानसूनी बारिश के, क्या हसीं नज़ारे हैं।

रंग सारे धरती पर, इन्द्र ने उतारे हैं।

छा गया है बागों में, सुर्ख रंग कलियों

पर

तितलियों के भँवरों से, हो रहे इशारे

हैं।

सौंधी-सौंधी माटी में, रंग है उमंगों का

तर हुए किसानों के, खेत-खेत प्यारे हैं।

मेघों ने बिछाया है, श्याम रंग का आँचल

रात हर अमावस है, सो गए सितारे हैं।

सब्ज़ रंगी सावन ने, सींच दिया है जीवन

बूँद-बूँद बारिश ने, मन-चमन सँवारे हैं।

भर दिये हैं रिमझिम ने, प्रेम रंग जन-जन

में

मन को बहलाने के, ये सुखद सहारे हैं।

भाव रंग बरखा के, गा रहे सुमंगल गीत

धार-धार अमृत से, तृप्त स्रोत सारे हैं।

ज्यों बदलते मौसम हैं, रंग भी बदल जाते

‘कल्पना’ जुड़े इनसे, शुभ दिवस हमारे हैं।

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗