कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०० / २०५ № 100 of 205 रचना १०० / २०५
६ अगस्त २०१५ 6 August 2015 ६ अगस्त २०१५

मानसूनी बारिश के, क्या हसीन नज़ारे हैं maanasoonee baarish ke, kyaa haseen nazaare hain मानसूनी बारिश के, क्या हसीन नज़ारे हैं

मानसूनी बारिश के, क्या हसीं नज़ारे हैं।

॥

रंग सारे धरती पर, इन्द्र ने उतारे हैं।

॥

छा गया है बागों में, सुर्ख रंग कलियों

पर

॥

तितलियों के भँवरों से, हो रहे इशारे

हैं।

॥

सौंधी-सौंधी माटी में, रंग है उमंगों का

॥

तर हुए किसानों के, खेत-खेत प्यारे हैं।

॥

मेघों ने बिछाया है, श्याम रंग का आँचल

॥

रात हर अमावस है, सो गए सितारे हैं।

॥

सब्ज़ रंगी सावन ने, सींच दिया है जीवन

॥

बूँद-बूँद बारिश ने, मन-चमन सँवारे हैं।

॥

भर दिये हैं रिमझिम ने, प्रेम रंग जन-जन

में

॥

मन को बहलाने के, ये सुखद सहारे हैं।

॥

भाव रंग बरखा के, गा रहे सुमंगल गीत

॥

धार-धार अमृत से, तृप्त स्रोत सारे हैं।

॥

ज्यों बदलते मौसम हैं, रंग भी बदल जाते

॥

‘कल्पना’ जुड़े इनसे, शुभ दिवस हमारे हैं।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

maanasoonee baarish ke, kyaa haseen nazaare hain

·

rang saare dharatee par, indr ne utaare hain

·

chaa gayaa hai baagon men, surkh rang kaliyon

par

·

titaliyon ke bhanvaron se, ho rahe ishaare

hain

·

saundhee-saundhee maatee men, rang hai umangon kaa

·

tar hue kisaanon ke, khet-khet pyaare hain

·

meghon ne bichaayaa hai, shyaam rang kaa aanchal

·

raat har amaawas hai, so gae sitaare hain

·

sabz rangee saawan ne, seench diyaa hai jeewan

·

boond-boond baarish ne, man-chaman sanvaare hain

·

bhar diye hain rimajhim ne, prem rang jan-jan

men

·

man ko bahalaane ke, ye sukhad sahaare hain

·

bhaaw rang barakhaa ke, gaa rahe sumangal geet

·

dhaar-dhaar amriit se, triipt srot saare hain

·

jyon badalate mausam hain, rang bhee badal jaate

·

‘kalpanaa’ jude inase, shubh diwas hamaare hain

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

मानसूनी बारिश के, क्या हसीं नज़ारे हैं।

॥

रंग सारे धरती पर, इन्द्र ने उतारे हैं।

॥

छा गया है बागों में, सुर्ख रंग कलियों

पर

॥

तितलियों के भँवरों से, हो रहे इशारे

हैं।

॥

सौंधी-सौंधी माटी में, रंग है उमंगों का

॥

तर हुए किसानों के, खेत-खेत प्यारे हैं।

॥

मेघों ने बिछाया है, श्याम रंग का आँचल

॥

रात हर अमावस है, सो गए सितारे हैं।

॥

सब्ज़ रंगी सावन ने, सींच दिया है जीवन

॥

बूँद-बूँद बारिश ने, मन-चमन सँवारे हैं।

॥

भर दिये हैं रिमझिम ने, प्रेम रंग जन-जन

में

॥

मन को बहलाने के, ये सुखद सहारे हैं।

॥

भाव रंग बरखा के, गा रहे सुमंगल गीत

॥

धार-धार अमृत से, तृप्त स्रोत सारे हैं।

॥

ज्यों बदलते मौसम हैं, रंग भी बदल जाते

॥

‘कल्पना’ जुड़े इनसे, शुभ दिवस हमारे हैं।

॥

-कल्पना रामानी

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗