नाग कभी दूध नहीं पीता naag kabhee doodh naheen peetaa नाग कभी दूध नहीं पीता
नाग को दे दो....
नाग
को दूध पिलाओ...
अभी
भोर का तारा भी नहीं डूबा था कि वातावरण में आवाज़ें और साथ में बीन के मधुर स्वर
गूँजने लगे। उस गरीब बस्ती में पौ फटते ही जाग हो जाती है और आज तो नागपंचमी है, सभी बच्चे नहा धोकर तैयार थे। नाग देखने की उत्सुकता सबके मन को रोमांचित कर
रही थी। महिलाएँ पूजा के लिए दूध की कटोरी के साथ पूजा की थालियाँ सजाने में
व्यस्त थीं। आवाज़ सुनते ही बच्चे दौड़ पड़े
naag ko de do
naag
ko doodh pilaao
abhee
bhor kaa taaraa bhee naheen doobaa thaa ki waataawaran men aawaazen aur saath men been ke madhur svar
goonjane lage us gareeb bastee men pau phatate hee jaag ho jaatee hai aur aaj to naagapanchamee hai, sabhee bachche nahaa dhokar taiyaar the naag dekhane kee utsukataa sabake man ko romaanchit kar
rahee thee mahilaaen poojaa ke lie doodh kee katoree ke saath poojaa kee thaaliyaan sajaane men
wyast theen aawaaz sunate hee bachche daud pade
नाग को दे दो....
नाग
को दूध पिलाओ...
अभी
भोर का तारा भी नहीं डूबा था कि वातावरण में आवाज़ें और साथ में बीन के मधुर स्वर
गूँजने लगे। उस गरीब बस्ती में पौ फटते ही जाग हो जाती है और आज तो नागपंचमी है, सभी बच्चे नहा धोकर तैयार थे। नाग देखने की उत्सुकता सबके मन को रोमांचित कर
रही थी। महिलाएँ पूजा के लिए दूध की कटोरी के साथ पूजा की थालियाँ सजाने में
व्यस्त थीं। आवाज़ सुनते ही बच्चे दौड़ पड़े