सुनो हे नाग देवता suno he naag dewataa सुनो हे नाग देवता
करना
है पयपान, सुनो हे नाग देवता!
पर
पहले जल-स्नान, सुनो हे नाग देवता!
आज
पर्व है नागपंचमी, तुम्हें पूजकर
माँगूँगी
वरदान, सुनो हे नाग देवता!
तुम्हें
साथ ले दीन सपेरे, बीन बजाकर
चले
माँगने दान, सुनो हे नाग देवता!
मुझे
पता है, सिर्फ तुम्हारी केंचुल काली
पर
मन तनिक न म्लान, सुनो हे नाग देवता!
सच
है, सोच समझ ही जग-हित, जीव-जीव को
रचता
दयानिधान, सुनो हे नाग देवता!
काल
नहीं तुम, मगर तुम्हें जो व्यर्थ सताते
वही
गँवाते जान, सुनो हे नाग देवता!
करते
हैं बदनाम तुम्हें, जो दंश देश के
कहलाते
इंसान, सुनो हे नाग देवता
ज़हर लोभ का, चूस ‘कल्पना’, शहर-शहर से
गाँवों
को दो प्राण, सुनो हे नाग देवता!
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
karanaa
hai payapaan, suno he naag dewataa!
par
pahale jal-snaan, suno he naag dewataa!
aaj
parv hai naagapanchamee, tumhen poojakar
maangoongee
waradaan, suno he naag dewataa!
tumhen
saath le deen sapere, been bajaakar
chale
maangane daan, suno he naag dewataa!
mujhe
pataa hai, sirph tumhaaree kenchul kaalee
par
man tanik n mlaan, suno he naag dewataa!
sach
hai, soch samajh hee jag-hit, jeew-jeew ko
rachataa
dayaanidhaan, suno he naag dewataa!
kaal
naheen tum, magar tumhen jo wyarth sataate
wahee
ganvaate jaan, suno he naag dewataa!
karate
hain badanaam tumhen, jo dansh desh ke
kahalaate
insaan, suno he naag dewataa
zahar lobh kaa, choos ‘kalpanaa’, shahar-shahar se
gaanvon
ko do praan, suno he naag dewataa!
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
करना
है पयपान, सुनो हे नाग देवता!
पर
पहले जल-स्नान, सुनो हे नाग देवता!
आज
पर्व है नागपंचमी, तुम्हें पूजकर
माँगूँगी
वरदान, सुनो हे नाग देवता!
तुम्हें
साथ ले दीन सपेरे, बीन बजाकर
चले
माँगने दान, सुनो हे नाग देवता!
मुझे
पता है, सिर्फ तुम्हारी केंचुल काली
पर
मन तनिक न म्लान, सुनो हे नाग देवता!
सच
है, सोच समझ ही जग-हित, जीव-जीव को
रचता
दयानिधान, सुनो हे नाग देवता!
काल
नहीं तुम, मगर तुम्हें जो व्यर्थ सताते
वही
गँवाते जान, सुनो हे नाग देवता!
करते
हैं बदनाम तुम्हें, जो दंश देश के
कहलाते
इंसान, सुनो हे नाग देवता
ज़हर लोभ का, चूस ‘कल्पना’, शहर-शहर से
गाँवों
को दो प्राण, सुनो हे नाग देवता!
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी