कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०१ / २०५ № 101 of 205 रचना १०१ / २०५
११ अगस्त २०१५ 11 August 2015 ११ अगस्त २०१५

सुनो हे नाग देवता suno he naag dewataa सुनो हे नाग देवता

करना

है पयपान, सुनो हे नाग देवता!

॥

पर

पहले जल-स्नान, सुनो हे नाग देवता!

॥

आज

पर्व है नागपंचमी, तुम्हें पूजकर

॥

माँगूँगी

वरदान, सुनो हे नाग देवता!

॥

तुम्हें

साथ ले दीन सपेरे, बीन बजाकर

॥

चले

माँगने दान, सुनो हे नाग देवता!

॥

मुझे

पता है, सिर्फ तुम्हारी केंचुल काली

॥

पर

मन तनिक न म्लान, सुनो हे नाग देवता!

॥

सच

है, सोच समझ ही जग-हित, जीव-जीव को

॥

रचता

दयानिधान, सुनो हे नाग देवता!

॥

काल

नहीं तुम, मगर तुम्हें जो व्यर्थ सताते

॥

वही

गँवाते जान, सुनो हे नाग देवता!

॥

करते

हैं बदनाम तुम्हें, जो दंश देश के

॥

कहलाते

इंसान, सुनो हे नाग देवता

॥

ज़हर लोभ का, चूस ‘कल्पना’, शहर-शहर से

॥

गाँवों

को दो प्राण, सुनो हे नाग देवता!

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

karanaa

hai payapaan, suno he naag dewataa!

·

par

pahale jal-snaan, suno he naag dewataa!

·

aaj

parv hai naagapanchamee, tumhen poojakar

·

maangoongee

waradaan, suno he naag dewataa!

·

tumhen

saath le deen sapere, been bajaakar

·

chale

maangane daan, suno he naag dewataa!

·

mujhe

pataa hai, sirph tumhaaree kenchul kaalee

·

par

man tanik n mlaan, suno he naag dewataa!

·

sach

hai, soch samajh hee jag-hit, jeew-jeew ko

·

rachataa

dayaanidhaan, suno he naag dewataa!

·

kaal

naheen tum, magar tumhen jo wyarth sataate

·

wahee

ganvaate jaan, suno he naag dewataa!

·

karate

hain badanaam tumhen, jo dansh desh ke

·

kahalaate

insaan, suno he naag dewataa

·

zahar lobh kaa, choos ‘kalpanaa’, shahar-shahar se

·

gaanvon

ko do praan, suno he naag dewataa!

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

करना

है पयपान, सुनो हे नाग देवता!

॥

पर

पहले जल-स्नान, सुनो हे नाग देवता!

॥

आज

पर्व है नागपंचमी, तुम्हें पूजकर

॥

माँगूँगी

वरदान, सुनो हे नाग देवता!

॥

तुम्हें

साथ ले दीन सपेरे, बीन बजाकर

॥

चले

माँगने दान, सुनो हे नाग देवता!

॥

मुझे

पता है, सिर्फ तुम्हारी केंचुल काली

॥

पर

मन तनिक न म्लान, सुनो हे नाग देवता!

॥

सच

है, सोच समझ ही जग-हित, जीव-जीव को

॥

रचता

दयानिधान, सुनो हे नाग देवता!

॥

काल

नहीं तुम, मगर तुम्हें जो व्यर्थ सताते

॥

वही

गँवाते जान, सुनो हे नाग देवता!

॥

करते

हैं बदनाम तुम्हें, जो दंश देश के

॥

कहलाते

इंसान, सुनो हे नाग देवता

॥

ज़हर लोभ का, चूस ‘कल्पना’, शहर-शहर से

॥

गाँवों

को दो प्राण, सुनो हे नाग देवता!

॥

-कल्पना रामानी

॥

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗