कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १०० / २०४ № 100 of 204 रचना १०० / २०४
११ अगस्त २०१५ 11 August 2015 ११ अगस्त २०१५

सुनो हे नाग देवता suno he naag dewataa सुनो हे नाग देवता

करना

है पयपान, सुनो हे नाग देवता!

पर

पहले जल-स्नान, सुनो हे नाग देवता!

आज

पर्व है नागपंचमी, तुम्हें पूजकर

माँगूँगी

वरदान, सुनो हे नाग देवता!

तुम्हें

साथ ले दीन सपेरे, बीन बजाकर

चले

माँगने दान, सुनो हे नाग देवता!

मुझे

पता है, सिर्फ तुम्हारी केंचुल काली

पर

मन तनिक न म्लान, सुनो हे नाग देवता!

सच

है, सोच समझ ही जग-हित, जीव-जीव को

रचता

दयानिधान, सुनो हे नाग देवता!

काल

नहीं तुम, मगर तुम्हें जो व्यर्थ सताते

वही

गँवाते जान, सुनो हे नाग देवता!

करते

हैं बदनाम तुम्हें, जो दंश देश के

कहलाते

इंसान, सुनो हे नाग देवता

ज़हर लोभ का, चूस ‘कल्पना’, शहर-शहर से

गाँवों

को दो प्राण, सुनो हे नाग देवता!

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

karanaa

hai payapaan, suno he naag dewataa!

·

par

pahale jal-snaan, suno he naag dewataa!

·

aaj

parv hai naagapanchamee, tumhen poojakar

·

maangoongee

waradaan, suno he naag dewataa!

·

tumhen

saath le deen sapere, been bajaakar

·

chale

maangane daan, suno he naag dewataa!

·

mujhe

pataa hai, sirph tumhaaree kenchul kaalee

·

par

man tanik n mlaan, suno he naag dewataa!

·

sach

hai, soch samajh hee jag-hit, jeew-jeew ko

·

rachataa

dayaanidhaan, suno he naag dewataa!

·

kaal

naheen tum, magar tumhen jo wyarth sataate

·

wahee

ganvaate jaan, suno he naag dewataa!

·

karate

hain badanaam tumhen, jo dansh desh ke

·

kahalaate

insaan, suno he naag dewataa

·

zahar lobh kaa, choos ‘kalpanaa’, shahar-shahar se

·

gaanvon

ko do praan, suno he naag dewataa!

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

करना

है पयपान, सुनो हे नाग देवता!

पर

पहले जल-स्नान, सुनो हे नाग देवता!

आज

पर्व है नागपंचमी, तुम्हें पूजकर

माँगूँगी

वरदान, सुनो हे नाग देवता!

तुम्हें

साथ ले दीन सपेरे, बीन बजाकर

चले

माँगने दान, सुनो हे नाग देवता!

मुझे

पता है, सिर्फ तुम्हारी केंचुल काली

पर

मन तनिक न म्लान, सुनो हे नाग देवता!

सच

है, सोच समझ ही जग-हित, जीव-जीव को

रचता

दयानिधान, सुनो हे नाग देवता!

काल

नहीं तुम, मगर तुम्हें जो व्यर्थ सताते

वही

गँवाते जान, सुनो हे नाग देवता!

करते

हैं बदनाम तुम्हें, जो दंश देश के

कहलाते

इंसान, सुनो हे नाग देवता

ज़हर लोभ का, चूस ‘कल्पना’, शहर-शहर से

गाँवों

को दो प्राण, सुनो हे नाग देवता!

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗