कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ४४ / ६३ № 44 of 63 रचना ४४ / ६३
११ अगस्त २०१५ 11 August 2015 ११ अगस्त २०१५

सोने की चिड़िया कभी sone kee chidiyaa kabhee सोने की चिड़िया कभी

सोने

की चिड़िया कभी, कहलाता

था देश

आँधी आई लोभ की, सोना बचा न शेष।

सोना बचा न शेष, पुनः अपनों ने लूटा।

भरे

विदेशी कोष,

देश

का ताला टूटा।

हुई

इस तरह खूब,

सफाई

हर कोने की

ढूँढ

रही अब डाल,

लुटी

चिड़िया सोने की।

------------------

जो रहते परदेस में, मन में बसता देश।

जोड़ा

अंतर्जाल ने, दुविधा

रही न शेष।

दुविधा

रही न शेष,

एक है कोना कोना

यही विश्व का मंच, यहीं सब साझा

sone

kee chidiyaa kabhee, kahalaataa

thaa desh

aandhee aaee lobh kee, sonaa bachaa n shesh

·

sonaa bachaa n shesh, punah apanon ne lootaa

·

bhare

wideshee kosh,

desh

kaa taalaa tootaa

·

huee

is tarah khoob,

saphaaee

har kone kee

·

dhoondh

rahee ab daal,

lutee

chidiyaa sone kee

·

------------------

·

jo rahate parades men, man men basataa desh

·

jodaa

antarjaal ne, duwidhaa

rahee n shesh

·

duwidhaa

rahee n shesh,

ek hai konaa konaa

·

yahee wishv kaa manch, yaheen sab saajhaa

सोने

की चिड़िया कभी, कहलाता

था देश

आँधी आई लोभ की, सोना बचा न शेष।

सोना बचा न शेष, पुनः अपनों ने लूटा।

भरे

विदेशी कोष,

देश

का ताला टूटा।

हुई

इस तरह खूब,

सफाई

हर कोने की

ढूँढ

रही अब डाल,

लुटी

चिड़िया सोने की।

------------------

जो रहते परदेस में, मन में बसता देश।

जोड़ा

अंतर्जाल ने, दुविधा

रही न शेष।

दुविधा

रही न शेष,

एक है कोना कोना

यही विश्व का मंच, यहीं सब साझा

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗