सोने की चिड़िया कभी sone kee chidiyaa kabhee सोने की चिड़िया कभी
सोने
की चिड़िया कभी, कहलाता
था देश
आँधी आई लोभ की, सोना बचा न शेष।
सोना बचा न शेष, पुनः अपनों ने लूटा।
भरे
विदेशी कोष,
देश
का ताला टूटा।
हुई
इस तरह खूब,
सफाई
हर कोने की
ढूँढ
रही अब डाल,
लुटी
चिड़िया सोने की।
------------------
जो रहते परदेस में, मन में बसता देश।
जोड़ा
अंतर्जाल ने, दुविधा
रही न शेष।
दुविधा
रही न शेष,
एक है कोना कोना
यही विश्व का मंच, यहीं सब साझा
sone
kee chidiyaa kabhee, kahalaataa
thaa desh
aandhee aaee lobh kee, sonaa bachaa n shesh
sonaa bachaa n shesh, punah apanon ne lootaa
bhare
wideshee kosh,
desh
kaa taalaa tootaa
huee
is tarah khoob,
saphaaee
har kone kee
dhoondh
rahee ab daal,
lutee
chidiyaa sone kee
------------------
jo rahate parades men, man men basataa desh
jodaa
antarjaal ne, duwidhaa
rahee n shesh
duwidhaa
rahee n shesh,
ek hai konaa konaa
yahee wishv kaa manch, yaheen sab saajhaa
सोने
की चिड़िया कभी, कहलाता
था देश
आँधी आई लोभ की, सोना बचा न शेष।
सोना बचा न शेष, पुनः अपनों ने लूटा।
भरे
विदेशी कोष,
देश
का ताला टूटा।
हुई
इस तरह खूब,
सफाई
हर कोने की
ढूँढ
रही अब डाल,
लुटी
चिड़िया सोने की।
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जो रहते परदेस में, मन में बसता देश।
जोड़ा
अंतर्जाल ने, दुविधा
रही न शेष।
दुविधा
रही न शेष,
एक है कोना कोना
यही विश्व का मंच, यहीं सब साझा