कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४८ / २०४ № 48 of 204 रचना ४८ / २०४
१ जुलाई २०१४ 1 July 2014 १ जुलाई २०१४

व्योम में उड़ता तराना चाहिए wyom men udataa taraanaa chaahie व्योम में उड़ता तराना चाहिए

मुझको

तो गुज़रा ज़माना चाहिए।

फिर

वही बचपन सुहाना चाहिए।

जिस

जगह उनसे मिली पहली दफा,

उस

गली का वो मुहाना चाहिए।

तैरती

हों दुम हिलातीं मछलियाँ,

वो

पुनः पोखर पुराना चाहिए।

चुभ

रही आबोहवा शहरी बहुत,

गाँव

में इक आशियाना चाहिए।

भीड़

कोलाहल भरा ये कारवाँ,

छोड़

जाने का बहाना चाहिए।

सागरों

की रेत से अब जी भरा,

घाट-पनघट, खिलखिलाना

चाहिए।

घुट

रहा दम बंद पिंजड़ों में खुदा!

व्योम

में उड़ता तराना चाहिए।

थम

न जाए यह कलम ही ‘कल्पना’

गीत

गज़लों का खज़ाना चाहिए।

--------कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

mujhako

to guzaraa zamaanaa chaahie

·

phir

wahee bachapan suhaanaa chaahie

·

jis

jagah unase milee pahalee daphaa,

·

us

galee kaa wo muhaanaa chaahie

·

tairatee

hon dum hilaateen machaliyaan,

·

wo

punah pokhar puraanaa chaahie

·

chubh

rahee aabohawaa shaharee bahut,

·

gaanv

men ik aashiyaanaa chaahie

·

bheed

kolaahal bharaa ye kaarawaan,

·

chod

jaane kaa bahaanaa chaahie

·

saagaron

kee ret se ab jee bharaa,

·

ghaat-panaghat, khilakhilaanaa

chaahie

·

ghut

rahaa dam band pinjadon men khudaa!

·

wyom

men udataa taraanaa chaahie

·

tham

n jaae yah kalam hee ‘kalpanaa’

·

geet

gazalon kaa khazaanaa chaahie

·

--------kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

मुझको

तो गुज़रा ज़माना चाहिए।

फिर

वही बचपन सुहाना चाहिए।

जिस

जगह उनसे मिली पहली दफा,

उस

गली का वो मुहाना चाहिए।

तैरती

हों दुम हिलातीं मछलियाँ,

वो

पुनः पोखर पुराना चाहिए।

चुभ

रही आबोहवा शहरी बहुत,

गाँव

में इक आशियाना चाहिए।

भीड़

कोलाहल भरा ये कारवाँ,

छोड़

जाने का बहाना चाहिए।

सागरों

की रेत से अब जी भरा,

घाट-पनघट, खिलखिलाना

चाहिए।

घुट

रहा दम बंद पिंजड़ों में खुदा!

व्योम

में उड़ता तराना चाहिए।

थम

न जाए यह कलम ही ‘कल्पना’

गीत

गज़लों का खज़ाना चाहिए।

--------कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗