कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४९ / २०५ № 49 of 205 रचना ४९ / २०५
१ जुलाई २०१४ 1 July 2014 १ जुलाई २०१४

व्योम में उड़ता तराना चाहिए wyom men udataa taraanaa chaahie व्योम में उड़ता तराना चाहिए

मुझको

तो गुज़रा ज़माना चाहिए।

॥

फिर

वही बचपन सुहाना चाहिए।

॥

जिस

जगह उनसे मिली पहली दफा,

॥

उस

गली का वो मुहाना चाहिए।

॥

तैरती

हों दुम हिलातीं मछलियाँ,

॥

वो

पुनः पोखर पुराना चाहिए।

॥

चुभ

रही आबोहवा शहरी बहुत,

॥

गाँव

में इक आशियाना चाहिए।

॥

भीड़

कोलाहल भरा ये कारवाँ,

॥

छोड़

जाने का बहाना चाहिए।

॥

सागरों

की रेत से अब जी भरा,

॥

घाट-पनघट, खिलखिलाना

चाहिए।

॥

घुट

रहा दम बंद पिंजड़ों में खुदा!

॥

व्योम

में उड़ता तराना चाहिए।

॥

थम

न जाए यह कलम ही ‘कल्पना’

॥

गीत

गज़लों का खज़ाना चाहिए।

॥

--------कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

mujhako

to guzaraa zamaanaa chaahie

·

phir

wahee bachapan suhaanaa chaahie

·

jis

jagah unase milee pahalee daphaa,

·

us

galee kaa wo muhaanaa chaahie

·

tairatee

hon dum hilaateen machaliyaan,

·

wo

punah pokhar puraanaa chaahie

·

chubh

rahee aabohawaa shaharee bahut,

·

gaanv

men ik aashiyaanaa chaahie

·

bheed

kolaahal bharaa ye kaarawaan,

·

chod

jaane kaa bahaanaa chaahie

·

saagaron

kee ret se ab jee bharaa,

·

ghaat-panaghat, khilakhilaanaa

chaahie

·

ghut

rahaa dam band pinjadon men khudaa!

·

wyom

men udataa taraanaa chaahie

·

tham

n jaae yah kalam hee ‘kalpanaa’

·

geet

gazalon kaa khazaanaa chaahie

·

--------kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

मुझको

तो गुज़रा ज़माना चाहिए।

॥

फिर

वही बचपन सुहाना चाहिए।

॥

जिस

जगह उनसे मिली पहली दफा,

॥

उस

गली का वो मुहाना चाहिए।

॥

तैरती

हों दुम हिलातीं मछलियाँ,

॥

वो

पुनः पोखर पुराना चाहिए।

॥

चुभ

रही आबोहवा शहरी बहुत,

॥

गाँव

में इक आशियाना चाहिए।

॥

भीड़

कोलाहल भरा ये कारवाँ,

॥

छोड़

जाने का बहाना चाहिए।

॥

सागरों

की रेत से अब जी भरा,

॥

घाट-पनघट, खिलखिलाना

चाहिए।

॥

घुट

रहा दम बंद पिंजड़ों में खुदा!

॥

व्योम

में उड़ता तराना चाहिए।

॥

थम

न जाए यह कलम ही ‘कल्पना’

॥

गीत

गज़लों का खज़ाना चाहिए।

॥

--------कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗