कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६७ / २०५ № 67 of 205 रचना ६७ / २०५
२३ जनवरी २०१५ 23 January 2015 २३ जनवरी २०१५

सवारी सूर्य की sawaaree soory kee सवारी सूर्य की

हो

गई मौसम बदलने, की मुनादी सूर्य की

॥

चल

पड़ी उत्तर दिशा में, अब सवारी सूर्य की

॥

गा

उठी हर इक दिशा,

बाँधा हवाओं ने समाँ

॥

आज

होगी आसमाँ में, मुँह दिखाई सूर्य की

॥

जीत

नभ उड़ती पतंगें देख पुलकित हो रहीं

॥

डोर

कर में थामकर किरणें नवेली सूर्य की

॥

रात

रख देगी रज़ाई, अब तहा तहख़ानों में

॥

दिन

बढ़ेंगे देख तिल-तिल, रहनुमाई सूर्य की

॥

जड़

बने सोए जो कल तक, ज़िंदगी के अंश थे

॥

जाग

उठे हैं जानकर, अब मेहरबानी सूर्य की

॥

युग-युगों

करती रहेंगी राज ऋतुएँ धरती पर

॥

और

धरती परिक्रमा करती रहेगी सूर्य की

॥

हाथ

तिल-गुड़, रेवड़ी ले, सुन रहे बच्चे मगन

॥

जो

सुनाई ‘कल्पना’ मैंने कहानी सूर्य की

॥

--कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

ho

gaee mausam badalane, kee munaadee soory kee

·

chal

padee uttar dishaa men, ab sawaaree soory kee

·

gaa

uthee har ik dishaa,

baandhaa hawaaon ne samaan

·

aaj

hogee aasamaan men, munh dikhaaee soory kee

·

jeet

nabh udatee patangen dekh pulakit ho raheen

·

dor

kar men thaamakar kiranen nawelee soory kee

·

raat

rakh degee razaaee, ab tahaa tahakaanon men

·

din

bढ़enge dekh til-til, rahanumaaee soory kee

·

jad

bane soe jo kal tak, zindagee ke ansh the

·

jaag

uthe hain jaanakar, ab meharabaanee soory kee

·

yug-yugon

karatee rahengee raaj riituen dharatee par

·

aur

dharatee parikramaa karatee rahegee soory kee

·

haath

til-gud, rewadee le, sun rahe bachche magan

·

jo

sunaaee ‘kalpanaa’ mainne kahaanee soory kee

·

--kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हो

गई मौसम बदलने, की मुनादी सूर्य की

॥

चल

पड़ी उत्तर दिशा में, अब सवारी सूर्य की

॥

गा

उठी हर इक दिशा,

बाँधा हवाओं ने समाँ

॥

आज

होगी आसमाँ में, मुँह दिखाई सूर्य की

॥

जीत

नभ उड़ती पतंगें देख पुलकित हो रहीं

॥

डोर

कर में थामकर किरणें नवेली सूर्य की

॥

रात

रख देगी रज़ाई, अब तहा तहख़ानों में

॥

दिन

बढ़ेंगे देख तिल-तिल, रहनुमाई सूर्य की

॥

जड़

बने सोए जो कल तक, ज़िंदगी के अंश थे

॥

जाग

उठे हैं जानकर, अब मेहरबानी सूर्य की

॥

युग-युगों

करती रहेंगी राज ऋतुएँ धरती पर

॥

और

धरती परिक्रमा करती रहेगी सूर्य की

॥

हाथ

तिल-गुड़, रेवड़ी ले, सुन रहे बच्चे मगन

॥

जो

सुनाई ‘कल्पना’ मैंने कहानी सूर्य की

॥

--कल्पना रामानी

॥

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗