कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६६ / २०४ № 66 of 204 रचना ६६ / २०४
२३ जनवरी २०१५ 23 January 2015 २३ जनवरी २०१५

सवारी सूर्य की sawaaree soory kee सवारी सूर्य की

हो

गई मौसम बदलने, की मुनादी सूर्य की

चल

पड़ी उत्तर दिशा में, अब सवारी सूर्य की

गा

उठी हर इक दिशा,

बाँधा हवाओं ने समाँ

आज

होगी आसमाँ में, मुँह दिखाई सूर्य की

जीत

नभ उड़ती पतंगें देख पुलकित हो रहीं

डोर

कर में थामकर किरणें नवेली सूर्य की

रात

रख देगी रज़ाई, अब तहा तहख़ानों में

दिन

बढ़ेंगे देख तिल-तिल, रहनुमाई सूर्य की

जड़

बने सोए जो कल तक, ज़िंदगी के अंश थे

जाग

उठे हैं जानकर, अब मेहरबानी सूर्य की

युग-युगों

करती रहेंगी राज ऋतुएँ धरती पर

और

धरती परिक्रमा करती रहेगी सूर्य की

हाथ

तिल-गुड़, रेवड़ी ले, सुन रहे बच्चे मगन

जो

सुनाई ‘कल्पना’ मैंने कहानी सूर्य की

--कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

ho

gaee mausam badalane, kee munaadee soory kee

·

chal

padee uttar dishaa men, ab sawaaree soory kee

·

gaa

uthee har ik dishaa,

baandhaa hawaaon ne samaan

·

aaj

hogee aasamaan men, munh dikhaaee soory kee

·

jeet

nabh udatee patangen dekh pulakit ho raheen

·

dor

kar men thaamakar kiranen nawelee soory kee

·

raat

rakh degee razaaee, ab tahaa tahakaanon men

·

din

bढ़enge dekh til-til, rahanumaaee soory kee

·

jad

bane soe jo kal tak, zindagee ke ansh the

·

jaag

uthe hain jaanakar, ab meharabaanee soory kee

·

yug-yugon

karatee rahengee raaj riituen dharatee par

·

aur

dharatee parikramaa karatee rahegee soory kee

·

haath

til-gud, rewadee le, sun rahe bachche magan

·

jo

sunaaee ‘kalpanaa’ mainne kahaanee soory kee

·

--kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हो

गई मौसम बदलने, की मुनादी सूर्य की

चल

पड़ी उत्तर दिशा में, अब सवारी सूर्य की

गा

उठी हर इक दिशा,

बाँधा हवाओं ने समाँ

आज

होगी आसमाँ में, मुँह दिखाई सूर्य की

जीत

नभ उड़ती पतंगें देख पुलकित हो रहीं

डोर

कर में थामकर किरणें नवेली सूर्य की

रात

रख देगी रज़ाई, अब तहा तहख़ानों में

दिन

बढ़ेंगे देख तिल-तिल, रहनुमाई सूर्य की

जड़

बने सोए जो कल तक, ज़िंदगी के अंश थे

जाग

उठे हैं जानकर, अब मेहरबानी सूर्य की

युग-युगों

करती रहेंगी राज ऋतुएँ धरती पर

और

धरती परिक्रमा करती रहेगी सूर्य की

हाथ

तिल-गुड़, रेवड़ी ले, सुन रहे बच्चे मगन

जो

सुनाई ‘कल्पना’ मैंने कहानी सूर्य की

--कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗