पालकी बसंत की paalakee basant kee पालकी बसंत की
उगी पुनः नई सुप्रात तल्खियों के अंत की
ज़मीं पे आई व्योम
वेध पालकी
बसंत की।
फिज़ाओं में बहार के
अनेक रंग छा गए
हरेक पुष्प पेड़ ने
धरे वसन नए नए
उड़ा गुलाल ज्यों
खुली हो अंजुरी अनंत की
ज़मीं पे आई व्योम
वेध, पालकी
बसंत की।
दिखीं सुदूर
पीत-लाल
रश्मियाँ प्रकाश की
कि जंगलों में जी
उठी
पुनः प्रभा पलाश की
घुली दुआ दिगंत में
किसी फ़कीर-संत की
ज़मीं पे आई व्योम
वेध पालकी
ugee punah naee supraat talkhiyon ke ant kee
zameen pe aaee wyom
wedh paalakee
basant kee
phizaaon men bahaar ke
anek rang chaa gae
harek pushp ped ne
dhare wasan nae nae
udaa gulaal jyon
khulee ho anjuree anant kee
zameen pe aaee wyom
wedh, paalakee
basant kee
dikheen sudoor
peet-laal
rashmiyaan prakaash kee
ki jangalon men jee
uthee
punah prabhaa palaash kee
ghulee duaa digant men
kisee fakeer-sant kee
zameen pe aaee wyom
wedh paalakee
उगी पुनः नई सुप्रात तल्खियों के अंत की
ज़मीं पे आई व्योम
वेध पालकी
बसंत की।
फिज़ाओं में बहार के
अनेक रंग छा गए
हरेक पुष्प पेड़ ने
धरे वसन नए नए
उड़ा गुलाल ज्यों
खुली हो अंजुरी अनंत की
ज़मीं पे आई व्योम
वेध, पालकी
बसंत की।
दिखीं सुदूर
पीत-लाल
रश्मियाँ प्रकाश की
कि जंगलों में जी
उठी
पुनः प्रभा पलाश की
घुली दुआ दिगंत में
किसी फ़कीर-संत की
ज़मीं पे आई व्योम
वेध पालकी