कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०१ / १६४ № 101 of 164 रचना १०१ / १६४
२४ जनवरी २०१५ 24 January 2015 २४ जनवरी २०१५

पालकी बसंत की paalakee basant kee पालकी बसंत की

उगी पुनः नई सुप्रात तल्खियों के अंत की

॥

ज़मीं पे आई व्योम

वेध पालकी

॥

बसंत की।

॥

फिज़ाओं में बहार के

॥

अनेक रंग छा गए

॥

हरेक पुष्प पेड़ ने

॥

धरे वसन नए नए

॥

उड़ा गुलाल ज्यों

खुली हो अंजुरी अनंत की

॥

ज़मीं पे आई व्योम

वेध, पालकी

॥

बसंत की।

॥

दिखीं सुदूर

पीत-लाल

॥

रश्मियाँ प्रकाश की

॥

कि जंगलों में जी

उठी

॥

पुनः प्रभा पलाश की

॥

घुली दुआ दिगंत में

किसी फ़कीर-संत की

॥

ज़मीं पे आई व्योम

वेध पालकी

ugee punah naee supraat talkhiyon ke ant kee

·

zameen pe aaee wyom

wedh paalakee

·

basant kee

·

phizaaon men bahaar ke

·

anek rang chaa gae

·

harek pushp ped ne

·

dhare wasan nae nae

·

udaa gulaal jyon

khulee ho anjuree anant kee

·

zameen pe aaee wyom

wedh, paalakee

·

basant kee

·

dikheen sudoor

peet-laal

·

rashmiyaan prakaash kee

·

ki jangalon men jee

uthee

·

punah prabhaa palaash kee

·

ghulee duaa digant men

kisee fakeer-sant kee

·

zameen pe aaee wyom

wedh paalakee

उगी पुनः नई सुप्रात तल्खियों के अंत की

॥

ज़मीं पे आई व्योम

वेध पालकी

॥

बसंत की।

॥

फिज़ाओं में बहार के

॥

अनेक रंग छा गए

॥

हरेक पुष्प पेड़ ने

॥

धरे वसन नए नए

॥

उड़ा गुलाल ज्यों

खुली हो अंजुरी अनंत की

॥

ज़मीं पे आई व्योम

वेध, पालकी

॥

बसंत की।

॥

दिखीं सुदूर

पीत-लाल

॥

रश्मियाँ प्रकाश की

॥

कि जंगलों में जी

उठी

॥

पुनः प्रभा पलाश की

॥

घुली दुआ दिगंत में

किसी फ़कीर-संत की

॥

ज़मीं पे आई व्योम

वेध पालकी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗