कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०१ / १६३ № 101 of 163 रचना १०१ / १६३
२४ जनवरी २०१५ 24 January 2015 २४ जनवरी २०१५

पालकी बसंत की paalakee basant kee पालकी बसंत की

उगी पुनः नई सुप्रात तल्खियों के अंत की

ज़मीं पे आई व्योम

वेध पालकी

बसंत की।

फिज़ाओं में बहार के

अनेक रंग छा गए

हरेक पुष्प पेड़ ने

धरे वसन नए नए

उड़ा गुलाल ज्यों

खुली हो अंजुरी अनंत की

ज़मीं पे आई व्योम

वेध, पालकी

बसंत की।

दिखीं सुदूर

पीत-लाल

रश्मियाँ प्रकाश की

कि जंगलों में जी

उठी

पुनः प्रभा पलाश की

घुली दुआ दिगंत में

किसी फ़कीर-संत की

ज़मीं पे आई व्योम

वेध पालकी

ugee punah naee supraat talkhiyon ke ant kee

·

zameen pe aaee wyom

wedh paalakee

·

basant kee

·

phizaaon men bahaar ke

·

anek rang chaa gae

·

harek pushp ped ne

·

dhare wasan nae nae

·

udaa gulaal jyon

khulee ho anjuree anant kee

·

zameen pe aaee wyom

wedh, paalakee

·

basant kee

·

dikheen sudoor

peet-laal

·

rashmiyaan prakaash kee

·

ki jangalon men jee

uthee

·

punah prabhaa palaash kee

·

ghulee duaa digant men

kisee fakeer-sant kee

·

zameen pe aaee wyom

wedh paalakee

उगी पुनः नई सुप्रात तल्खियों के अंत की

ज़मीं पे आई व्योम

वेध पालकी

बसंत की।

फिज़ाओं में बहार के

अनेक रंग छा गए

हरेक पुष्प पेड़ ने

धरे वसन नए नए

उड़ा गुलाल ज्यों

खुली हो अंजुरी अनंत की

ज़मीं पे आई व्योम

वेध, पालकी

बसंत की।

दिखीं सुदूर

पीत-लाल

रश्मियाँ प्रकाश की

कि जंगलों में जी

उठी

पुनः प्रभा पलाश की

घुली दुआ दिगंत में

किसी फ़कीर-संत की

ज़मीं पे आई व्योम

वेध पालकी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗