पुस्तक समीक्षा/हौसलों के पंख-आचार्य संजीव सलिल pustak sameekshaa/hausalon ke pankh-aachaary sanjeew salil पुस्तक समीक्षा/हौसलों के पंख-आचार्य संजीव सलिल
हौसलों के पंख - कल्पना रामानी
भाषा के स्तर पर गीत में संकेतन का
महत्वपूर्ण स्थान होता है जबकि
नवगीत में स्पष्टता आवश्यक है।
गीत पारम्परिकता का पोषक होता
है तो नवगीत नव्यता को महत्व
देता है। गीत में छंद योजना को
वरीयता है तो नवगीत में गेयता
को महत्व मिलता है।' उक्त दो
बयानों के परिप्रेक्ष्य में नवगीतकार
कल्पना रामानी के प्रथम नवगीत
संग्रह 'हौसलों के पंख'
hausalon ke pankh - kalpanaa raamaanee
bhaashaa ke star par geet men sanketan kaa
mahatvapoorn sthaan hotaa hai jabaki
nawageet men spashtataa aawashyak hai
geet paaramparikataa kaa poshak hotaa
hai to nawageet navyataa ko mahatv
detaa hai geet men chand yojanaa ko
wareeyataa hai to nawageet men geyataa
ko mahatv milataa hai' ukt do
bayaanon ke pariprekshy men nawageetakaar
kalpanaa raamaanee ke pratham nawageet
sangrah 'hausalon ke pankh'
हौसलों के पंख - कल्पना रामानी
भाषा के स्तर पर गीत में संकेतन का
महत्वपूर्ण स्थान होता है जबकि
नवगीत में स्पष्टता आवश्यक है।
गीत पारम्परिकता का पोषक होता
है तो नवगीत नव्यता को महत्व
देता है। गीत में छंद योजना को
वरीयता है तो नवगीत में गेयता
को महत्व मिलता है।' उक्त दो
बयानों के परिप्रेक्ष्य में नवगीतकार
कल्पना रामानी के प्रथम नवगीत
संग्रह 'हौसलों के पंख'