कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६८ / २०५ № 68 of 205 रचना ६८ / २०५
४ फ़रवरी २०१५ 4 February 2015 ४ फ़रवरी २०१५

नज़र नज़र में जो हो जाए प्यार nazar nazar men jo ho jaae pyaar नज़र नज़र में जो हो जाए प्यार

नज़र-नज़र

में जो हो जाए प्यार, क्या कहिए।

॥

बिना

बसंत के छाए बहार, क्या कहिए।

॥

सपन

सुहाने चले आते बंद, पलकों में

॥

पलक

झपकते ही होते करार, क्या कहिए।

॥

धड़कते

दिल हैं धुँधलकों में साँझ होते ही

॥

चमकते

नैनों में जुगनू हज़ार, क्या कहिए।

॥

घनेरी

घाम में हैं दीखते घने बादल

॥

अमा

के चाँद से झरता उजार,

क्या कहिए।

॥

गरम

हवा से है आती सुगंध फूलों की

॥

भिगोता

जेठ भी बनकर फुहार,

क्या कहिए।

॥

कदम

पहुँचते वहीं जिस जगह जुड़े दो दिल

॥

मिलन

की चाह में चल बार-बार, क्या कहिए।

॥

ये

“कल्पना” है अगन प्यार की भला कैसी

॥

हो

दिन या रात न जाता ख़ुमार, क्या कहिए।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

nazar-nazar

men jo ho jaae pyaar, kyaa kahie

·

binaa

basant ke chaae bahaar, kyaa kahie

·

sapan

suhaane chale aate band, palakon men

·

palak

jhapakate hee hote karaar, kyaa kahie

·

dhadakate

dil hain dhundhalakon men saanjh hote hee

·

chamakate

nainon men juganoo hazaar, kyaa kahie

·

ghaneree

ghaam men hain deekhate ghane baadal

·

amaa

ke chaand se jharataa ujaar,

kyaa kahie

·

garam

hawaa se hai aatee sugandh phoolon kee

·

bhigotaa

jeth bhee banakar phuhaar,

kyaa kahie

·

kadam

pahunchate waheen jis jagah jude do dil

·

milan

kee chaah men chal baar-baar, kyaa kahie

·

ye

“kalpanaa” hai agan pyaar kee bhalaa kaisee

·

ho

din yaa raat n jaataa kumaar, kyaa kahie

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

नज़र-नज़र

में जो हो जाए प्यार, क्या कहिए।

॥

बिना

बसंत के छाए बहार, क्या कहिए।

॥

सपन

सुहाने चले आते बंद, पलकों में

॥

पलक

झपकते ही होते करार, क्या कहिए।

॥

धड़कते

दिल हैं धुँधलकों में साँझ होते ही

॥

चमकते

नैनों में जुगनू हज़ार, क्या कहिए।

॥

घनेरी

घाम में हैं दीखते घने बादल

॥

अमा

के चाँद से झरता उजार,

क्या कहिए।

॥

गरम

हवा से है आती सुगंध फूलों की

॥

भिगोता

जेठ भी बनकर फुहार,

क्या कहिए।

॥

कदम

पहुँचते वहीं जिस जगह जुड़े दो दिल

॥

मिलन

की चाह में चल बार-बार, क्या कहिए।

॥

ये

“कल्पना” है अगन प्यार की भला कैसी

॥

हो

दिन या रात न जाता ख़ुमार, क्या कहिए।

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗