कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ४ / ११४ № 4 of 114 रचना ४ / ११४
८ फ़रवरी २०१५ 8 February 2015 ८ फ़रवरी २०१५

कटौती katautee कटौती

रेशमी

ने बर्तन धोने के लिए अपनी आदत के अनुसार नल की टोटी खोली और धार की लय पर धड़ाधड़

बर्तन धोने लगी। देखते ही रमोला ने टोका-“सुनो

रेशमी! पानी की कटौती शुरू हो चुकी है, ज़रा

रोक रोक कर पानी खर्च करो,

इस तरह काम करोगी तो जल मिलना दूभर हो

जाएगा। हमें तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, भरपूर

पैसा देते हैं तो हमारे घरों में कटौती नहीं होती लेकिन इसका असर तुम लोगों की

बस्तियों पर अवश्य पड़ेगा”।

रेशमी

कई सालों

reshamee

ne bartan dhone ke lie apanee aadat ke anusaar nal kee totee kholee aur dhaar kee lay par dhadaadhad

bartan dhone lagee dekhate hee ramolaa ne tokaa-“suno

reshamee! paanee kee katautee shuroo ho chukee hai, zaraa

rok rok kar paanee kharch karo,

is tarah kaam karogee to jal milanaa doobhar ho

jaaegaa hamen to koee phark naheen padegaa, bharapoor

paisaa dete hain to hamaare gharon men katautee naheen hotee lekin isakaa asar tum logon kee

bastiyon par awashy padegaa”

·

reshamee

kaee saalon

रेशमी

ने बर्तन धोने के लिए अपनी आदत के अनुसार नल की टोटी खोली और धार की लय पर धड़ाधड़

बर्तन धोने लगी। देखते ही रमोला ने टोका-“सुनो

रेशमी! पानी की कटौती शुरू हो चुकी है, ज़रा

रोक रोक कर पानी खर्च करो,

इस तरह काम करोगी तो जल मिलना दूभर हो

जाएगा। हमें तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, भरपूर

पैसा देते हैं तो हमारे घरों में कटौती नहीं होती लेकिन इसका असर तुम लोगों की

बस्तियों पर अवश्य पड़ेगा”।

रेशमी

कई सालों

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗