कह मुकरियाँ-41 से 54 kah mukariyaan-41 se 54 कह मुकरियाँ-41 से 54
41)
बार
बार वो झाँका करता।
घंटों
मुझको ताका करता।
रंग-रूप
ज्यों एक नगीना,
क्या
सखि साजन?
ना, आईना!
42)
जहाँ
रहूँ वो रहता याद।
मन-आँगन
उससे आबाद।
वो
मेरा सच्चा मनमीत,
क्या
सखि साजन?
ना
सखि, गीत!
43)
जब
तब वो उपदेश सुनाए।
कर
न सकूँ जो मन में आए।
शाश्वत
प्रेम सिखा हिय जीता,
क्या
सखि प्रेमी?
ना
सखि, गीता!
44)
चाहे
देखूँ बरसों बाद।
नज़र
पड़े सब आए याद।
कैसे
भूलूँ
41)
baar
baar wo jhaankaa karataa
ghanton
mujhako taakaa karataa
rang-roop
jyon ek nageenaa,
kyaa
sakhi saajan?
naa, aaeenaa!
42)
jahaan
rahoon wo rahataa yaad
man-aangan
usase aabaad
wo
meraa sachchaa manameet,
kyaa
sakhi saajan?
naa
sakhi, geet!
43)
jab
tab wo upadesh sunaae
kar
n sakoon jo man men aae
shaashvat
prem sikhaa hiy jeetaa,
kyaa
sakhi premee?
naa
sakhi, geetaa!
44)
chaahe
dekhoon barason baad
nazar
pade sab aae yaad
kaise
bhooloon
41)
बार
बार वो झाँका करता।
घंटों
मुझको ताका करता।
रंग-रूप
ज्यों एक नगीना,
क्या
सखि साजन?
ना, आईना!
42)
जहाँ
रहूँ वो रहता याद।
मन-आँगन
उससे आबाद।
वो
मेरा सच्चा मनमीत,
क्या
सखि साजन?
ना
सखि, गीत!
43)
जब
तब वो उपदेश सुनाए।
कर
न सकूँ जो मन में आए।
शाश्वत
प्रेम सिखा हिय जीता,
क्या
सखि प्रेमी?
ना
सखि, गीता!
44)
चाहे
देखूँ बरसों बाद।
नज़र
पड़े सब आए याद।
कैसे
भूलूँ