कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५६ / ६५ № 56 of 65 रचना ५६ / ६५
१९ फ़रवरी २०१५ 19 February 2015 १९ फ़रवरी २०१५

कह मुकरियाँ-41 से 54 kah mukariyaan-41 se 54 कह मुकरियाँ-41 से 54

41)

बार

बार वो झाँका करता।

घंटों

मुझको ताका करता।

रंग-रूप

ज्यों एक नगीना,

क्या

सखि साजन?

ना, आईना!

42)

जहाँ

रहूँ वो रहता याद।

मन-आँगन

उससे आबाद।

वो

मेरा सच्चा मनमीत,

क्या

सखि साजन?

ना

सखि, गीत!

43)

जब

तब वो उपदेश सुनाए।

कर

न सकूँ जो मन में आए।

शाश्वत

प्रेम सिखा हिय जीता,

क्या

सखि प्रेमी?

ना

सखि, गीता!

44)

चाहे

देखूँ बरसों बाद।

नज़र

पड़े सब आए याद।

कैसे

भूलूँ

41)

·

baar

baar wo jhaankaa karataa

·

ghanton

mujhako taakaa karataa

·

rang-roop

jyon ek nageenaa,

·

kyaa

sakhi saajan?

·

naa, aaeenaa!

·

42)

·

jahaan

rahoon wo rahataa yaad

·

man-aangan

usase aabaad

·

wo

meraa sachchaa manameet,

·

kyaa

sakhi saajan?

·

naa

sakhi, geet!

·

43)

·

jab

tab wo upadesh sunaae

·

kar

n sakoon jo man men aae

·

shaashvat

prem sikhaa hiy jeetaa,

·

kyaa

sakhi premee?

·

naa

sakhi, geetaa!

·

44)

·

chaahe

dekhoon barason baad

·

nazar

pade sab aae yaad

·

kaise

bhooloon

41)

बार

बार वो झाँका करता।

घंटों

मुझको ताका करता।

रंग-रूप

ज्यों एक नगीना,

क्या

सखि साजन?

ना, आईना!

42)

जहाँ

रहूँ वो रहता याद।

मन-आँगन

उससे आबाद।

वो

मेरा सच्चा मनमीत,

क्या

सखि साजन?

ना

सखि, गीत!

43)

जब

तब वो उपदेश सुनाए।

कर

न सकूँ जो मन में आए।

शाश्वत

प्रेम सिखा हिय जीता,

क्या

सखि प्रेमी?

ना

सखि, गीता!

44)

चाहे

देखूँ बरसों बाद।

नज़र

पड़े सब आए याद।

कैसे

भूलूँ

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗