कह मुकरियाँ-31 से 40 kah mukariyaan-31 se 40 कह मुकरियाँ-31 से 40
31)
जब
बहार बागों में आए।
कहीं
दूर से मुझे बुलाए।
मिलने
को मन होता बेकल।
क्या
सखि साजन?
ना
सखि कोयल!
32)
बाहुपाश
फैला सुविशाल।
मुझे
जकड़ ले करे धमाल।
पोर-पोर
हो जाता कूल।
क्या
सखि साजन?
ना
सखि, पूल!
33)
चलते-चलते
वो इतराए।
तान
छेड़कर सुर में गाए।
झूम
उठे सुन-सुन मन पागल।
क्या
सखि साजन?
ना
सखि, पायल!
34)
संग
चले वो सुख दुख बाँटे।
पथ
की हर बाधा को छाँटे।
चूमे,
31)
jab
bahaar baagon men aae
kaheen
door se mujhe bulaae
milane
ko man hotaa bekal
kyaa
sakhi saajan?
naa
sakhi koyal!
32)
baahupaash
phailaa suwishaal
mujhe
jakad le kare dhamaal
por-por
ho jaataa kool
kyaa
sakhi saajan?
naa
sakhi, pool!
33)
chalate-chalate
wo itaraae
taan
chedakar sur men gaae
jhoom
uthe sun-sun man paagal
kyaa
sakhi saajan?
naa
sakhi, paayal!
34)
sang
chale wo sukh dukh baante
path
kee har baadhaa ko chaante
choome,
31)
जब
बहार बागों में आए।
कहीं
दूर से मुझे बुलाए।
मिलने
को मन होता बेकल।
क्या
सखि साजन?
ना
सखि कोयल!
32)
बाहुपाश
फैला सुविशाल।
मुझे
जकड़ ले करे धमाल।
पोर-पोर
हो जाता कूल।
क्या
सखि साजन?
ना
सखि, पूल!
33)
चलते-चलते
वो इतराए।
तान
छेड़कर सुर में गाए।
झूम
उठे सुन-सुन मन पागल।
क्या
सखि साजन?
ना
सखि, पायल!
34)
संग
चले वो सुख दुख बाँटे।
पथ
की हर बाधा को छाँटे।
चूमे,