कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५५ / ६५ № 55 of 65 रचना ५५ / ६५
१९ फ़रवरी २०१५ 19 February 2015 १९ फ़रवरी २०१५

कह मुकरियाँ-31 से 40 kah mukariyaan-31 se 40 कह मुकरियाँ-31 से 40

31)

जब

बहार बागों में आए।

कहीं

दूर से मुझे बुलाए।

मिलने

को मन होता बेकल।

क्या

सखि साजन?

ना

सखि कोयल!

32)

बाहुपाश

फैला सुविशाल।

मुझे

जकड़ ले करे धमाल।

पोर-पोर

हो जाता कूल।

क्या

सखि साजन?

ना

सखि, पूल!

33)

चलते-चलते

वो इतराए।

तान

छेड़कर सुर में गाए।

झूम

उठे सुन-सुन मन पागल।

क्या

सखि साजन?

ना

सखि, पायल!

34)

संग

चले वो सुख दुख बाँटे।

पथ

की हर बाधा को छाँटे।

चूमे,

31)

·

jab

bahaar baagon men aae

·

kaheen

door se mujhe bulaae

·

milane

ko man hotaa bekal

·

kyaa

sakhi saajan?

·

naa

sakhi koyal!

·

32)

·

baahupaash

phailaa suwishaal

·

mujhe

jakad le kare dhamaal

·

por-por

ho jaataa kool

·

kyaa

sakhi saajan?

·

naa

sakhi, pool!

·

33)

·

chalate-chalate

wo itaraae

·

taan

chedakar sur men gaae

·

jhoom

uthe sun-sun man paagal

·

kyaa

sakhi saajan?

·

naa

sakhi, paayal!

·

34)

·

sang

chale wo sukh dukh baante

·

path

kee har baadhaa ko chaante

·

choome,

31)

जब

बहार बागों में आए।

कहीं

दूर से मुझे बुलाए।

मिलने

को मन होता बेकल।

क्या

सखि साजन?

ना

सखि कोयल!

32)

बाहुपाश

फैला सुविशाल।

मुझे

जकड़ ले करे धमाल।

पोर-पोर

हो जाता कूल।

क्या

सखि साजन?

ना

सखि, पूल!

33)

चलते-चलते

वो इतराए।

तान

छेड़कर सुर में गाए।

झूम

उठे सुन-सुन मन पागल।

क्या

सखि साजन?

ना

सखि, पायल!

34)

संग

चले वो सुख दुख बाँटे।

पथ

की हर बाधा को छाँटे।

चूमे,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗