कह मुकरियाँ /21से 30 kah mukariyaan /21se 30 कह मुकरियाँ /21से 30
21)
महफिल-महफिल
रंग जमाए।
अपने
हाथों भंग पिलाए।
मधुर-मदिर
लगते उसके गुन,
क्या
सखि प्रियतम?
ना
सखि, फागुन!
22)
जब
से उससे प्रीत लगाई।
घर
बाहर होती खिलवाई।
पास
न हो तो रहूँ अनमनी,
क्या
सखि साजन?
नहीं, लेखनी!
23)
जब
जब मेरा मन अकुलाता।
झट
बहार बनकर आ जाता।
वो
मेरे प्राणों की पुलकन।
क्या
सखि प्रियतम?
ना
सखि सावन।
24)
सदा
नज़र में रखना चाहूँ।
21)
mahaphil-mahaphil
rang jamaae
apane
haathon bhang pilaae
madhur-madir
lagate usake gun,
kyaa
sakhi priyatam?
naa
sakhi, phaagun!
22)
jab
se usase preet lagaaee
ghar
baahar hotee khilawaaee
paas
n ho to rahoon anamanee,
kyaa
sakhi saajan?
naheen, lekhanee!
23)
jab
jab meraa man akulaataa
jhat
bahaar banakar aa jaataa
wo
mere praanon kee pulakan
kyaa
sakhi priyatam?
naa
sakhi saawan
24)
sadaa
nazar men rakhanaa chaahoon
21)
महफिल-महफिल
रंग जमाए।
अपने
हाथों भंग पिलाए।
मधुर-मदिर
लगते उसके गुन,
क्या
सखि प्रियतम?
ना
सखि, फागुन!
22)
जब
से उससे प्रीत लगाई।
घर
बाहर होती खिलवाई।
पास
न हो तो रहूँ अनमनी,
क्या
सखि साजन?
नहीं, लेखनी!
23)
जब
जब मेरा मन अकुलाता।
झट
बहार बनकर आ जाता।
वो
मेरे प्राणों की पुलकन।
क्या
सखि प्रियतम?
ना
सखि सावन।
24)
सदा
नज़र में रखना चाहूँ।