कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३४ / ६५ № 34 of 65 रचना ३४ / ६५
१८ मार्च २०१४ 18 March 2014 १८ मार्च २०१४

कह मुकरियाँ /21से 30 kah mukariyaan /21se 30 कह मुकरियाँ /21से 30

21)

महफिल-महफिल

रंग जमाए।

अपने

हाथों भंग पिलाए।

मधुर-मदिर

लगते उसके गुन,

क्या

सखि प्रियतम?

ना

सखि, फागुन!

22)

जब

से उससे प्रीत लगाई।

घर

बाहर होती खिलवाई।

पास

न हो तो रहूँ अनमनी,

क्या

सखि साजन?

नहीं, लेखनी!

23)

जब

जब मेरा मन अकुलाता।

झट

बहार बनकर आ जाता।

वो

मेरे प्राणों की पुलकन।

क्या

सखि प्रियतम?

ना

सखि सावन।

24)

सदा

नज़र में रखना चाहूँ।

21)

·

mahaphil-mahaphil

rang jamaae

·

apane

haathon bhang pilaae

·

madhur-madir

lagate usake gun,

·

kyaa

sakhi priyatam?

·

naa

sakhi, phaagun!

·

22)

·

jab

se usase preet lagaaee

·

ghar

baahar hotee khilawaaee

·

paas

n ho to rahoon anamanee,

·

kyaa

sakhi saajan?

·

naheen, lekhanee!

·

23)

·

jab

jab meraa man akulaataa

·

jhat

bahaar banakar aa jaataa

·

wo

mere praanon kee pulakan

·

kyaa

sakhi priyatam?

·

naa

sakhi saawan

·

24)

·

sadaa

nazar men rakhanaa chaahoon

21)

महफिल-महफिल

रंग जमाए।

अपने

हाथों भंग पिलाए।

मधुर-मदिर

लगते उसके गुन,

क्या

सखि प्रियतम?

ना

सखि, फागुन!

22)

जब

से उससे प्रीत लगाई।

घर

बाहर होती खिलवाई।

पास

न हो तो रहूँ अनमनी,

क्या

सखि साजन?

नहीं, लेखनी!

23)

जब

जब मेरा मन अकुलाता।

झट

बहार बनकर आ जाता।

वो

मेरे प्राणों की पुलकन।

क्या

सखि प्रियतम?

ना

सखि सावन।

24)

सदा

नज़र में रखना चाहूँ।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗