कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५० / ६७ № 50 of 67 रचना ५० / ६७
५ जुलाई २०१४ 5 July 2014 ५ जुलाई २०१४

सार छंद-दिन कैसे ये आए saar chand-din kaise ye aae सार छंद-दिन कैसे ये आए

छन्न पकैया, छन्न पकैया, दिन कैसे ये आए।

॥

देख आधुनिक कविताई को, छंद,गीत मुरझाए।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गर्दिश में हैं तारे।

॥

रचना में कुछ भाव न चाहे, वाह, वाह के नारे।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, घटी काव्य की कीमत।

॥

विद्वानों को वोट न

मिलते, मूढ़ों को है बहुमत।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, भ्रमित हुआ मन लखकर।

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, din kaise ye aae

·

dekh aadhunik kawitaaee ko, chand,geet murajhaae

·

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, gardish men hain taare

·

rachanaa men kuch bhaaw n chaahe, waah, waah ke naare

·

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, ghatee kaavy kee keemat

·

widvaanon ko wot n

milate, mooढ़on ko hai bahumat

·

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, bhramit huaa man lakhakar

छन्न पकैया, छन्न पकैया, दिन कैसे ये आए।

॥

देख आधुनिक कविताई को, छंद,गीत मुरझाए।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गर्दिश में हैं तारे।

॥

रचना में कुछ भाव न चाहे, वाह, वाह के नारे।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, घटी काव्य की कीमत।

॥

विद्वानों को वोट न

मिलते, मूढ़ों को है बहुमत।

॥

छन्न पकैया, छन्न पकैया, भ्रमित हुआ मन लखकर।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗