कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ४९ / ६५ № 49 of 65 रचना ४९ / ६५
५ जुलाई २०१४ 5 July 2014 ५ जुलाई २०१४

सार छंद-दिन कैसे ये आए saar chand-din kaise ye aae सार छंद-दिन कैसे ये आए

छन्न पकैया, छन्न पकैया, दिन कैसे ये आए।

देख आधुनिक कविताई को, छंद,गीत मुरझाए।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गर्दिश में हैं तारे।

रचना में कुछ भाव न चाहे, वाह, वाह के नारे।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, घटी काव्य की कीमत।

विद्वानों को वोट न

मिलते, मूढ़ों को है बहुमत।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, भ्रमित हुआ मन लखकर।

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, din kaise ye aae

·

dekh aadhunik kawitaaee ko, chand,geet murajhaae

·

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, gardish men hain taare

·

rachanaa men kuch bhaaw n chaahe, waah, waah ke naare

·

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, ghatee kaavy kee keemat

·

widvaanon ko wot n

milate, mooढ़on ko hai bahumat

·

chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, bhramit huaa man lakhakar

छन्न पकैया, छन्न पकैया, दिन कैसे ये आए।

देख आधुनिक कविताई को, छंद,गीत मुरझाए।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, गर्दिश में हैं तारे।

रचना में कुछ भाव न चाहे, वाह, वाह के नारे।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, घटी काव्य की कीमत।

विद्वानों को वोट न

मिलते, मूढ़ों को है बहुमत।

छन्न पकैया, छन्न पकैया, भ्रमित हुआ मन लखकर।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗