सार छंद-दिन कैसे ये आए saar chand-din kaise ye aae सार छंद-दिन कैसे ये आए
छन्न पकैया, छन्न पकैया, दिन कैसे ये आए।
देख आधुनिक कविताई को, छंद,गीत मुरझाए।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, गर्दिश में हैं तारे।
रचना में कुछ भाव न चाहे, वाह, वाह के नारे।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, घटी काव्य की कीमत।
विद्वानों को वोट न
मिलते, मूढ़ों को है बहुमत।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, भ्रमित हुआ मन लखकर।
chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, din kaise ye aae
dekh aadhunik kawitaaee ko, chand,geet murajhaae
chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, gardish men hain taare
rachanaa men kuch bhaaw n chaahe, waah, waah ke naare
chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, ghatee kaavy kee keemat
widvaanon ko wot n
milate, mooढ़on ko hai bahumat
chann pakaiyaa, chann pakaiyaa, bhramit huaa man lakhakar
छन्न पकैया, छन्न पकैया, दिन कैसे ये आए।
देख आधुनिक कविताई को, छंद,गीत मुरझाए।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, गर्दिश में हैं तारे।
रचना में कुछ भाव न चाहे, वाह, वाह के नारे।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, घटी काव्य की कीमत।
विद्वानों को वोट न
मिलते, मूढ़ों को है बहुमत।
छन्न पकैया, छन्न पकैया, भ्रमित हुआ मन लखकर।