कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २२ / ६७ № 22 of 67 रचना २२ / ६७
१० जून २०१३ 10 June 2013 १० जून २०१३

हुई विदाई ग्रीष्म की huee widaaee greeshm kee हुई विदाई ग्रीष्म की

हुई विदाई ग्रीष्म की, आया वर्षा काल।

॥

सोंधी मोहक गंध से, तन मन हुआ निहाल।

॥

मुक्त हुए तन स्वेद से, शीतल चली बयार।

॥

मन मयूर गाने लगे, झूम मेघ मल्हार।

॥

कहीं चमकती बिजलियाँ, कहीं घटा घनघोर।

॥

मन को पुलकित कर रहा, बादल का यह शोर।

॥

सूरज कब आया,गया, दिन बीता कब शाम।

॥

बरखा के सत्कार में, भूले प्रश्न तमाम।

॥

भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।

॥

इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग

huee widaaee greeshm kee, aayaa warshaa kaal

·

sondhee mohak gandh se, tan man huaa nihaal

·

mukt hue tan sved se, sheetal chalee bayaar

·

man mayoor gaane lage, jhoom megh malhaar

·

kaheen chamakatee bijaliyaan, kaheen ghataa ghanaghor

·

man ko pulakit kar rahaa, baadal kaa yah shor

·

sooraj kab aayaa,gayaa, din beetaa kab shaam

·

barakhaa ke satkaar men, bhoole prashn tamaam

·

bheegee bheegee shaam se, harshit tan,man,rom

·

indr dhanush sahasaa dikhaa, sajaa rang

हुई विदाई ग्रीष्म की, आया वर्षा काल।

॥

सोंधी मोहक गंध से, तन मन हुआ निहाल।

॥

मुक्त हुए तन स्वेद से, शीतल चली बयार।

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मन मयूर गाने लगे, झूम मेघ मल्हार।

॥

कहीं चमकती बिजलियाँ, कहीं घटा घनघोर।

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मन को पुलकित कर रहा, बादल का यह शोर।

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सूरज कब आया,गया, दिन बीता कब शाम।

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बरखा के सत्कार में, भूले प्रश्न तमाम।

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भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।

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इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗