हुई विदाई ग्रीष्म की huee widaaee greeshm kee हुई विदाई ग्रीष्म की
हुई विदाई ग्रीष्म की, आया वर्षा काल।
सोंधी मोहक गंध से, तन मन हुआ निहाल।
मुक्त हुए तन स्वेद से, शीतल चली बयार।
मन मयूर गाने लगे, झूम मेघ मल्हार।
कहीं चमकती बिजलियाँ, कहीं घटा घनघोर।
मन को पुलकित कर रहा, बादल का यह शोर।
सूरज कब आया,गया, दिन बीता कब शाम।
बरखा के सत्कार में, भूले प्रश्न तमाम।
भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।
इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग
huee widaaee greeshm kee, aayaa warshaa kaal
sondhee mohak gandh se, tan man huaa nihaal
mukt hue tan sved se, sheetal chalee bayaar
man mayoor gaane lage, jhoom megh malhaar
kaheen chamakatee bijaliyaan, kaheen ghataa ghanaghor
man ko pulakit kar rahaa, baadal kaa yah shor
sooraj kab aayaa,gayaa, din beetaa kab shaam
barakhaa ke satkaar men, bhoole prashn tamaam
bheegee bheegee shaam se, harshit tan,man,rom
indr dhanush sahasaa dikhaa, sajaa rang
हुई विदाई ग्रीष्म की, आया वर्षा काल।
सोंधी मोहक गंध से, तन मन हुआ निहाल।
मुक्त हुए तन स्वेद से, शीतल चली बयार।
मन मयूर गाने लगे, झूम मेघ मल्हार।
कहीं चमकती बिजलियाँ, कहीं घटा घनघोर।
मन को पुलकित कर रहा, बादल का यह शोर।
सूरज कब आया,गया, दिन बीता कब शाम।
बरखा के सत्कार में, भूले प्रश्न तमाम।
भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।
इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग