कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २१ / ६५ № 21 of 65 रचना २१ / ६५
१० जून २०१३ 10 June 2013 १० जून २०१३

हुई विदाई ग्रीष्म की huee widaaee greeshm kee हुई विदाई ग्रीष्म की

हुई विदाई ग्रीष्म की, आया वर्षा काल।

सोंधी मोहक गंध से, तन मन हुआ निहाल।

मुक्त हुए तन स्वेद से, शीतल चली बयार।

मन मयूर गाने लगे, झूम मेघ मल्हार।

कहीं चमकती बिजलियाँ, कहीं घटा घनघोर।

मन को पुलकित कर रहा, बादल का यह शोर।

सूरज कब आया,गया, दिन बीता कब शाम।

बरखा के सत्कार में, भूले प्रश्न तमाम।

भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।

इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग

huee widaaee greeshm kee, aayaa warshaa kaal

·

sondhee mohak gandh se, tan man huaa nihaal

·

mukt hue tan sved se, sheetal chalee bayaar

·

man mayoor gaane lage, jhoom megh malhaar

·

kaheen chamakatee bijaliyaan, kaheen ghataa ghanaghor

·

man ko pulakit kar rahaa, baadal kaa yah shor

·

sooraj kab aayaa,gayaa, din beetaa kab shaam

·

barakhaa ke satkaar men, bhoole prashn tamaam

·

bheegee bheegee shaam se, harshit tan,man,rom

·

indr dhanush sahasaa dikhaa, sajaa rang

हुई विदाई ग्रीष्म की, आया वर्षा काल।

सोंधी मोहक गंध से, तन मन हुआ निहाल।

मुक्त हुए तन स्वेद से, शीतल चली बयार।

मन मयूर गाने लगे, झूम मेघ मल्हार।

कहीं चमकती बिजलियाँ, कहीं घटा घनघोर।

मन को पुलकित कर रहा, बादल का यह शोर।

सूरज कब आया,गया, दिन बीता कब शाम।

बरखा के सत्कार में, भूले प्रश्न तमाम।

भीगी भीगी शाम से, हर्षित तन,मन,रोम।

इन्द्र धनुष सहसा दिखा, सजा रंग

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗