कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ३४ / ६३ № 34 of 63 रचना ३४ / ६३
१० जून २०१३ 10 June 2013 १० जून २०१३

बादल आए दूर से baadal aae door se बादल आए दूर से

बादल आए दूर से, लेकर यह पैगाम।

मानसून इस बार है, धरती माँ के नाम।

धरती माँ के नाम, नहीं अब सूखा होगा

शेष न होगी प्यास, न कोई भूखा होगा।

हरा भरा इस बार, दिखेगा माँ का आँचल।

लेकर यह पैगाम, दूर से आए बादल।

मौसम है बरसात का, बूँदों की बारात।

ढ़ोल बजाने आ गए, बादल आधी रात।

बादल आधी रात, हो गई पुलकित धरती

ओढ़ चुनरिया सब्ज़, गोद में

जलकण भरती।

बिखरे रंग अपार, हुआ

baadal aae door se, lekar yah paigaam

·

maanasoon is baar hai, dharatee maan ke naam

·

dharatee maan ke naam, naheen ab sookhaa hogaa

·

shesh n hogee pyaas, n koee bhookhaa hogaa

·

haraa bharaa is baar, dikhegaa maan kaa aanchal

·

lekar yah paigaam, door se aae baadal

·

mausam hai barasaat kaa, boondon kee baaraat

·

ढ़ol bajaane aa gae, baadal aadhee raat

·

baadal aadhee raat, ho gaee pulakit dharatee

·

oढ़ chunariyaa sabz, god men

jalakan bharatee

·

bikhare rang apaar, huaa

बादल आए दूर से, लेकर यह पैगाम।

मानसून इस बार है, धरती माँ के नाम।

धरती माँ के नाम, नहीं अब सूखा होगा

शेष न होगी प्यास, न कोई भूखा होगा।

हरा भरा इस बार, दिखेगा माँ का आँचल।

लेकर यह पैगाम, दूर से आए बादल।

मौसम है बरसात का, बूँदों की बारात।

ढ़ोल बजाने आ गए, बादल आधी रात।

बादल आधी रात, हो गई पुलकित धरती

ओढ़ चुनरिया सब्ज़, गोद में

जलकण भरती।

बिखरे रंग अपार, हुआ

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗