कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ५ / ६३ № 5 of 63 रचना ५ / ६३
२० सितम्बर २०१२ 20 September 2012 २० सितम्बर २०१२

ख्यात हुए तो क्या हुआ khyaat hue to kyaa huaa ख्यात हुए तो क्या हुआ

ख्यात

हुए तो क्या हुआ, अगर हुए कुख्यात।

धर्मों को देते रहे, दुष्कर्मों से

मात।

दुष्कर्मों से मात, नतीजा कभी न सोचा

अपना ही हर सौख्य, देख जन-जन को नोचा

कहनी इतनी बात, कि जिस पथ पाँव धरे हो

धिक्कृत

होंगे आप, क्या

हुआ ख्यात हुए तो।

बुरे

न होते लोग सब, जो होते कुख्यात।

कर

देते बेबस इन्हें, नामी औ’ विख्यात।

नामी

औ’ विख्यात, छीन लेते हक

इनके।

बदले

की ये आग, बुझाते

बेघर

khyaat

hue to kyaa huaa, agar hue kukhyaat

·

dharmon ko dete rahe, dushkarmon se

maat

·

dushkarmon se maat, nateejaa kabhee n sochaa

·

apanaa hee har saukhy, dekh jan-jan ko nochaa

·

kahanee itanee baat, ki jis path paanv dhare ho

·

dhikkriit

honge aap, kyaa

huaa khyaat hue to

·

bure

n hote log sab, jo hote kukhyaat

·

kar

dete bebas inhen, naamee au’ wikhyaat

·

naamee

au’ wikhyaat, cheen lete hak

inake

·

badale

kee ye aag, bujhaate

beghar

ख्यात

हुए तो क्या हुआ, अगर हुए कुख्यात।

धर्मों को देते रहे, दुष्कर्मों से

मात।

दुष्कर्मों से मात, नतीजा कभी न सोचा

अपना ही हर सौख्य, देख जन-जन को नोचा

कहनी इतनी बात, कि जिस पथ पाँव धरे हो

धिक्कृत

होंगे आप, क्या

हुआ ख्यात हुए तो।

बुरे

न होते लोग सब, जो होते कुख्यात।

कर

देते बेबस इन्हें, नामी औ’ विख्यात।

नामी

औ’ विख्यात, छीन लेते हक

इनके।

बदले

की ये आग, बुझाते

बेघर

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗