कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ९ / ६७ № 9 of 67 रचना ९ / ६७
१४ सितम्बर २०१२ 14 September 2012 १४ सितम्बर २०१२

हरित क्रांति की ओर harit kraanti kee or हरित क्रांति की ओर

रोपें

पौधे नित नए, गाँव, शहर, हर छोर।

॥

कदम

बढ़ाएँ साथ मेँ, हरित

क्रांति की ओर।

॥

हरियाली

से पाट दें,

हर

पथ हर उद्यान।

॥

सुधरेगा

पर्यावरण,

जन

जन दे श्रम दान।

॥

मुक्त

ह्रदय से मानिए, कुदरत

का आभार।

॥

मिला

उसी की गोद में, हरा

भरा संसार।

॥

हरियाली

खोई अगर,

क्या

होगा अंजाम?

॥

होगी

बाँझ वसुंधरा, जीव

लुप्त हे राम!

॥

बीज

बीज मेँ प्राण हैं, दें

उनको आकार।

ropen

paudhe nit nae, gaanv, shahar, har chor

·

kadam

bढ़aaen saath men, harit

kraanti kee or

·

hariyaalee

se paat den,

har

path har udyaan

·

sudharegaa

paryaawaran,

jan

jan de shram daan

·

mukt

hraday se maanie, kudarat

kaa aabhaar

·

milaa

usee kee god men, haraa

bharaa sansaar

·

hariyaalee

khoee agar,

kyaa

hogaa anjaam?

·

hogee

baanjh wasundharaa, jeew

lupt he raam!

·

beej

beej men praan hain, den

unako aakaar

रोपें

पौधे नित नए, गाँव, शहर, हर छोर।

॥

कदम

बढ़ाएँ साथ मेँ, हरित

क्रांति की ओर।

॥

हरियाली

से पाट दें,

हर

पथ हर उद्यान।

॥

सुधरेगा

पर्यावरण,

जन

जन दे श्रम दान।

॥

मुक्त

ह्रदय से मानिए, कुदरत

का आभार।

॥

मिला

उसी की गोद में, हरा

भरा संसार।

॥

हरियाली

खोई अगर,

क्या

होगा अंजाम?

॥

होगी

बाँझ वसुंधरा, जीव

लुप्त हे राम!

॥

बीज

बीज मेँ प्राण हैं, दें

उनको आकार।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗