कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ८ / ६५ № 8 of 65 रचना ८ / ६५
१४ सितम्बर २०१२ 14 September 2012 १४ सितम्बर २०१२

हरित क्रांति की ओर harit kraanti kee or हरित क्रांति की ओर

रोपें

पौधे नित नए, गाँव, शहर, हर छोर।

कदम

बढ़ाएँ साथ मेँ, हरित

क्रांति की ओर।

हरियाली

से पाट दें,

हर

पथ हर उद्यान।

सुधरेगा

पर्यावरण,

जन

जन दे श्रम दान।

मुक्त

ह्रदय से मानिए, कुदरत

का आभार।

मिला

उसी की गोद में, हरा

भरा संसार।

हरियाली

खोई अगर,

क्या

होगा अंजाम?

होगी

बाँझ वसुंधरा, जीव

लुप्त हे राम!

बीज

बीज मेँ प्राण हैं, दें

उनको आकार।

ropen

paudhe nit nae, gaanv, shahar, har chor

·

kadam

bढ़aaen saath men, harit

kraanti kee or

·

hariyaalee

se paat den,

har

path har udyaan

·

sudharegaa

paryaawaran,

jan

jan de shram daan

·

mukt

hraday se maanie, kudarat

kaa aabhaar

·

milaa

usee kee god men, haraa

bharaa sansaar

·

hariyaalee

khoee agar,

kyaa

hogaa anjaam?

·

hogee

baanjh wasundharaa, jeew

lupt he raam!

·

beej

beej men praan hain, den

unako aakaar

रोपें

पौधे नित नए, गाँव, शहर, हर छोर।

कदम

बढ़ाएँ साथ मेँ, हरित

क्रांति की ओर।

हरियाली

से पाट दें,

हर

पथ हर उद्यान।

सुधरेगा

पर्यावरण,

जन

जन दे श्रम दान।

मुक्त

ह्रदय से मानिए, कुदरत

का आभार।

मिला

उसी की गोद में, हरा

भरा संसार।

हरियाली

खोई अगर,

क्या

होगा अंजाम?

होगी

बाँझ वसुंधरा, जीव

लुप्त हे राम!

बीज

बीज मेँ प्राण हैं, दें

उनको आकार।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗