कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३१ / ६७ № 31 of 67 रचना ३१ / ६७
११ फ़रवरी २०१४ 11 February 2014 ११ फ़रवरी २०१४

फागुन लाया प्रेम की... phaagun laayaa prem kee फागुन लाया प्रेम की...

फागुन लाया प्रेम की, सतरंगी बौछार।

॥

मिलकर आज मनाइए, होली का त्यौहार॥

॥

कली खिली कचनार की, सुन फागुन का राग।

॥

आम्र बौर बौरा गए, लगे सुनाने फाग॥

॥

होली के हुड़दंग से, उड़ी धूल ही धूल।

॥

रंग खेलने आ गए, टेसू के ये फूल॥

॥

गुब्बारों की मार से, ऐसी मची धमाल।

॥

उड़े हास्य के बुलबुले, हाल हुए बेहाल॥

॥

नए नज़ारे रंग के, नए नए

phaagun laayaa prem kee, satarangee bauchaar

·

milakar aaj manaaie, holee kaa tyauhaar

·

kalee khilee kachanaar kee, sun phaagun kaa raag

·

aamr baur bauraa gae, lage sunaane phaag

·

holee ke hudadang se, udee dhool hee dhool

·

rang khelane aa gae, tesoo ke ye phool

·

gubbaaron kee maar se, aisee machee dhamaal

·

ude haasy ke bulabule, haal hue behaal

·

nae nazaare rang ke, nae nae

फागुन लाया प्रेम की, सतरंगी बौछार।

॥

मिलकर आज मनाइए, होली का त्यौहार॥

॥

कली खिली कचनार की, सुन फागुन का राग।

॥

आम्र बौर बौरा गए, लगे सुनाने फाग॥

॥

होली के हुड़दंग से, उड़ी धूल ही धूल।

॥

रंग खेलने आ गए, टेसू के ये फूल॥

॥

गुब्बारों की मार से, ऐसी मची धमाल।

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उड़े हास्य के बुलबुले, हाल हुए बेहाल॥

॥

नए नज़ारे रंग के, नए नए

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗