कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ३० / ६५ № 30 of 65 रचना ३० / ६५
११ फ़रवरी २०१४ 11 February 2014 ११ फ़रवरी २०१४

फागुन लाया प्रेम की... phaagun laayaa prem kee फागुन लाया प्रेम की...

फागुन लाया प्रेम की, सतरंगी बौछार।

मिलकर आज मनाइए, होली का त्यौहार॥

कली खिली कचनार की, सुन फागुन का राग।

आम्र बौर बौरा गए, लगे सुनाने फाग॥

होली के हुड़दंग से, उड़ी धूल ही धूल।

रंग खेलने आ गए, टेसू के ये फूल॥

गुब्बारों की मार से, ऐसी मची धमाल।

उड़े हास्य के बुलबुले, हाल हुए बेहाल॥

नए नज़ारे रंग के, नए नए

phaagun laayaa prem kee, satarangee bauchaar

·

milakar aaj manaaie, holee kaa tyauhaar

·

kalee khilee kachanaar kee, sun phaagun kaa raag

·

aamr baur bauraa gae, lage sunaane phaag

·

holee ke hudadang se, udee dhool hee dhool

·

rang khelane aa gae, tesoo ke ye phool

·

gubbaaron kee maar se, aisee machee dhamaal

·

ude haasy ke bulabule, haal hue behaal

·

nae nazaare rang ke, nae nae

फागुन लाया प्रेम की, सतरंगी बौछार।

मिलकर आज मनाइए, होली का त्यौहार॥

कली खिली कचनार की, सुन फागुन का राग।

आम्र बौर बौरा गए, लगे सुनाने फाग॥

होली के हुड़दंग से, उड़ी धूल ही धूल।

रंग खेलने आ गए, टेसू के ये फूल॥

गुब्बारों की मार से, ऐसी मची धमाल।

उड़े हास्य के बुलबुले, हाल हुए बेहाल॥

नए नज़ारे रंग के, नए नए

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗