नीड़ का निर्माण फिर फिर टल रहा है need kaa nirmaan phir phir tal rahaa hai नीड़ का निर्माण फिर फिर टल रहा है
बल भी उसके सामने निर्बल रहा है।
घोर आँधी में जो दीपक जल रहा है।
डाल रक्षित ढूँढते,
हारा पखेरू,
नीड़ का निर्माण,
फिर फिर टल रहा है।
हाथ फैलाकर खड़ा दानी कुआँ वो,
शेष बूँदें अब न जिसमें जल रहा है।
सूर्य ने अपने नियम बदले हैं जब से,
दिन हथेली पर दिया ले चल रहा है।
क्यों तुला मानव उसी को नष्ट करने,
जो हरा भू का सदा आँचल रहा है।
देखिये इस बात पर कुछ गौर करके,
आज से बेहतर हमारा कल रहा है।
मन को जिसने आज तक शीतल रखा था,
सब्र का घन धीरे-धीरे गल रहा है।
ख्वाब है जनतन्त्र का अब तक अधूरा,
आदि से जो इन दृगों में पल रहा है।
-----कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
bal bhee usake saamane nirbal rahaa hai
ghor aandhee men jo deepak jal rahaa hai
daal rakshit dhoondhate,
haaraa pakheroo,
need kaa nirmaan,
phir phir tal rahaa hai
haath phailaakar khadaa daanee kuaan wo,
shesh boonden ab n jisamen jal rahaa hai
soory ne apane niyam badale hain jab se,
din hathelee par diyaa le chal rahaa hai
kyon tulaa maanaw usee ko nasht karane,
jo haraa bhoo kaa sadaa aanchal rahaa hai
dekhiye is baat par kuch gaur karake,
aaj se behatar hamaaraa kal rahaa hai
man ko jisane aaj tak sheetal rakhaa thaa,
sabr kaa ghan dheere-dheere gal rahaa hai
khvaab hai janatantr kaa ab tak adhooraa,
aadi se jo in driigon men pal rahaa hai
-----kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
बल भी उसके सामने निर्बल रहा है।
घोर आँधी में जो दीपक जल रहा है।
डाल रक्षित ढूँढते,
हारा पखेरू,
नीड़ का निर्माण,
फिर फिर टल रहा है।
हाथ फैलाकर खड़ा दानी कुआँ वो,
शेष बूँदें अब न जिसमें जल रहा है।
सूर्य ने अपने नियम बदले हैं जब से,
दिन हथेली पर दिया ले चल रहा है।
क्यों तुला मानव उसी को नष्ट करने,
जो हरा भू का सदा आँचल रहा है।
देखिये इस बात पर कुछ गौर करके,
आज से बेहतर हमारा कल रहा है।
मन को जिसने आज तक शीतल रखा था,
सब्र का घन धीरे-धीरे गल रहा है।
ख्वाब है जनतन्त्र का अब तक अधूरा,
आदि से जो इन दृगों में पल रहा है।
-----कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी