कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५७ / १६४ № 57 of 164 रचना ५७ / १६४
८ फ़रवरी २०१४ 8 February 2014 ८ फ़रवरी २०१४

देवता जागे dewataa jaage देवता जागे

देवता जागे, सजे मंडप, बजीं

शहनाइयाँ।

॥

झिलमिलाते वस्त्र, आभूषण

निकल

बाज़ार से,

चल पड़े हैं तन सजाने वर-वधू

का प्यार से।

प्रेम का ले रंग

उभरेगी

हथेली पर, हिना।

हँस रही हल्दी, शगुन पूरा

नहीं उसके बिना।

॥

सात फेरे फिर रहे, लेते हुए

अँगड़ाइयाँ।

॥

हो रहे दूल्हे विकल, सेहरे

॥

सजाकर शीश पर,

दंग दर्पण तक रहा है दुल्हनों

को भर नज़र।

चल पड़े हैं

बैंड-बाजे, संग

बाराती स्वजन।

भाँवरों के साथ

dewataa jaage, saje mandap, bajeen

shahanaaiyaan

·

jhilamilaate wastr, aabhooshan

nikal

baazaar se,

chal pade hain tan sajaane war-wadhoo

kaa pyaar se

prem kaa le rang

ubharegee

hathelee par, hinaa

hans rahee haldee, shagun pooraa

naheen usake binaa

·

saat phere phir rahe, lete hue

angadaaiyaan

·

ho rahe doolhe wikal, sehare

·

sajaakar sheesh par,

dang darpan tak rahaa hai dulhanon

ko bhar nazar

chal pade hain

baind-baaje, sang

baaraatee svajan

bhaanvaron ke saath

देवता जागे, सजे मंडप, बजीं

शहनाइयाँ।

॥

झिलमिलाते वस्त्र, आभूषण

निकल

बाज़ार से,

चल पड़े हैं तन सजाने वर-वधू

का प्यार से।

प्रेम का ले रंग

उभरेगी

हथेली पर, हिना।

हँस रही हल्दी, शगुन पूरा

नहीं उसके बिना।

॥

सात फेरे फिर रहे, लेते हुए

अँगड़ाइयाँ।

॥

हो रहे दूल्हे विकल, सेहरे

॥

सजाकर शीश पर,

दंग दर्पण तक रहा है दुल्हनों

को भर नज़र।

चल पड़े हैं

बैंड-बाजे, संग

बाराती स्वजन।

भाँवरों के साथ

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗