कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५७ / १६३ № 57 of 163 रचना ५७ / १६३
८ फ़रवरी २०१४ 8 February 2014 ८ फ़रवरी २०१४

देवता जागे dewataa jaage देवता जागे

देवता जागे, सजे मंडप, बजीं

शहनाइयाँ।

झिलमिलाते वस्त्र, आभूषण

निकल

बाज़ार से,

चल पड़े हैं तन सजाने वर-वधू

का प्यार से।

प्रेम का ले रंग

उभरेगी

हथेली पर, हिना।

हँस रही हल्दी, शगुन पूरा

नहीं उसके बिना।

सात फेरे फिर रहे, लेते हुए

अँगड़ाइयाँ।

हो रहे दूल्हे विकल, सेहरे

सजाकर शीश पर,

दंग दर्पण तक रहा है दुल्हनों

को भर नज़र।

चल पड़े हैं

बैंड-बाजे, संग

बाराती स्वजन।

भाँवरों के साथ

dewataa jaage, saje mandap, bajeen

shahanaaiyaan

·

jhilamilaate wastr, aabhooshan

nikal

baazaar se,

chal pade hain tan sajaane war-wadhoo

kaa pyaar se

prem kaa le rang

ubharegee

hathelee par, hinaa

hans rahee haldee, shagun pooraa

naheen usake binaa

·

saat phere phir rahe, lete hue

angadaaiyaan

·

ho rahe doolhe wikal, sehare

·

sajaakar sheesh par,

dang darpan tak rahaa hai dulhanon

ko bhar nazar

chal pade hain

baind-baaje, sang

baaraatee svajan

bhaanvaron ke saath

देवता जागे, सजे मंडप, बजीं

शहनाइयाँ।

झिलमिलाते वस्त्र, आभूषण

निकल

बाज़ार से,

चल पड़े हैं तन सजाने वर-वधू

का प्यार से।

प्रेम का ले रंग

उभरेगी

हथेली पर, हिना।

हँस रही हल्दी, शगुन पूरा

नहीं उसके बिना।

सात फेरे फिर रहे, लेते हुए

अँगड़ाइयाँ।

हो रहे दूल्हे विकल, सेहरे

सजाकर शीश पर,

दंग दर्पण तक रहा है दुल्हनों

को भर नज़र।

चल पड़े हैं

बैंड-बाजे, संग

बाराती स्वजन।

भाँवरों के साथ

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗