चलो नवगीत गाएँ chalo nawageet gaaen चलो नवगीत गाएँ
गर्दिशों के भूलकर शिकवे गिले,
फिर उमंगों के चलो नवगीत गाएँ।
प्रकृति आती
रोज़ नव शृंगार कर।
रूप अनुपम, रंग उजले
गोद भर।
जो हमारे हिय छुपा है चित्रकार,
भाव की ले तूलिका उसको जगाएँ।
झोलियाँ भर
ख़ुशबुएँ लाती हवा।
मखमली जाजम बिछा
जाती घटा।
ख़्वाहिशों के, बाग से चुनकर सुमन,
शेष शूलों की चलो होली जलाएँ।
नित्य खबरें
gardishon ke bhoolakar shikawe gile,
phir umangon ke chalo nawageet gaaen
prakriiti aatee
roz naw shriingaar kar
roop anupam, rang ujale
god bhar
jo hamaare hiy chupaa hai chitrakaar,
bhaaw kee le toolikaa usako jagaaen
jholiyaan bhar
kushabuen laatee hawaa
makhamalee jaajam bichaa
jaatee ghataa
kvaahishon ke, baag se chunakar suman,
shesh shoolon kee chalo holee jalaaen
nity khabaren
गर्दिशों के भूलकर शिकवे गिले,
फिर उमंगों के चलो नवगीत गाएँ।
प्रकृति आती
रोज़ नव शृंगार कर।
रूप अनुपम, रंग उजले
गोद भर।
जो हमारे हिय छुपा है चित्रकार,
भाव की ले तूलिका उसको जगाएँ।
झोलियाँ भर
ख़ुशबुएँ लाती हवा।
मखमली जाजम बिछा
जाती घटा।
ख़्वाहिशों के, बाग से चुनकर सुमन,
शेष शूलों की चलो होली जलाएँ।
नित्य खबरें