कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६६ / १६३ № 66 of 163 रचना ६६ / १६३
२९ मार्च २०१४ 29 March 2014 २९ मार्च २०१४

चलो नवगीत गाएँ chalo nawageet gaaen चलो नवगीत गाएँ

गर्दिशों के भूलकर शिकवे गिले,

फिर उमंगों के चलो नवगीत गाएँ।

प्रकृति आती

रोज़ नव शृंगार कर।

रूप अनुपम, रंग उजले

गोद भर।

जो हमारे हिय छुपा है चित्रकार,

भाव की ले तूलिका उसको जगाएँ।

झोलियाँ भर

ख़ुशबुएँ लाती हवा।

मखमली जाजम बिछा

जाती घटा।

ख़्वाहिशों के, बाग से चुनकर सुमन,

शेष शूलों की चलो होली जलाएँ।

नित्य खबरें

gardishon ke bhoolakar shikawe gile,

·

phir umangon ke chalo nawageet gaaen

·

prakriiti aatee

·

roz naw shriingaar kar

·

roop anupam, rang ujale

·

god bhar

·

jo hamaare hiy chupaa hai chitrakaar,

·

bhaaw kee le toolikaa usako jagaaen

·

jholiyaan bhar

·

kushabuen laatee hawaa

·

makhamalee jaajam bichaa

·

jaatee ghataa

·

kvaahishon ke, baag se chunakar suman,

·

shesh shoolon kee chalo holee jalaaen

·

nity khabaren

गर्दिशों के भूलकर शिकवे गिले,

फिर उमंगों के चलो नवगीत गाएँ।

प्रकृति आती

रोज़ नव शृंगार कर।

रूप अनुपम, रंग उजले

गोद भर।

जो हमारे हिय छुपा है चित्रकार,

भाव की ले तूलिका उसको जगाएँ।

झोलियाँ भर

ख़ुशबुएँ लाती हवा।

मखमली जाजम बिछा

जाती घटा।

ख़्वाहिशों के, बाग से चुनकर सुमन,

शेष शूलों की चलो होली जलाएँ।

नित्य खबरें

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗