कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५४ / १६३ № 54 of 163 रचना ५४ / १६३
१५ जनवरी २०१४ 15 January 2014 १५ जनवरी २०१४

तनहाई तुम क्यों आई tanahaaee tum kyon aaee तनहाई तुम क्यों आई

तनहाई, तुम इस जीवन में

बिना बुलाए आई क्यों?

मन तो मन के साथ-साथ था

तुमने सेंध लगाई क्यों?

क्या तुम इतना नहीं जानती

साथ सुहानी कुदरत है।

खिलती कलियाँ, हँसता गुलशन

फूल पात हैं, जल कण हैं।

महक हवा की साथ साथ थी

तूफाँ बनकर आई क्यों?

किसने कहा अकेले हैं हम।

कैसे तुमने मान लिया?

ढलता सूरज, झुकता अम्बर

नौका सागर सब कुछ था।

अंतर्घट यह भरा हुआ था

अगम रिक्तता लाई क्यों?

वापस जाओ, इस जीवन में

तेरी कोई

tanahaaee, tum is jeewan men

binaa bulaae aaee kyon?

man to man ke saath-saath thaa

tumane sendh lagaaee kyon?

·

kyaa tum itanaa naheen jaanatee

saath suhaanee kudarat hai

khilatee kaliyaan, hansataa gulashan

phool paat hain, jal kan hain

mahak hawaa kee saath saath thee

toophaan banakar aaee kyon?

·

kisane kahaa akele hain ham

kaise tumane maan liyaa?

dhalataa sooraj, jhukataa ambar

naukaa saagar sab kuch thaa

antarghat yah bharaa huaa thaa

agam riktataa laaee kyon?

·

waapas jaao, is jeewan men

teree koee

तनहाई, तुम इस जीवन में

बिना बुलाए आई क्यों?

मन तो मन के साथ-साथ था

तुमने सेंध लगाई क्यों?

क्या तुम इतना नहीं जानती

साथ सुहानी कुदरत है।

खिलती कलियाँ, हँसता गुलशन

फूल पात हैं, जल कण हैं।

महक हवा की साथ साथ थी

तूफाँ बनकर आई क्यों?

किसने कहा अकेले हैं हम।

कैसे तुमने मान लिया?

ढलता सूरज, झुकता अम्बर

नौका सागर सब कुछ था।

अंतर्घट यह भरा हुआ था

अगम रिक्तता लाई क्यों?

वापस जाओ, इस जीवन में

तेरी कोई

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗