तनहाई तुम क्यों आई tanahaaee tum kyon aaee तनहाई तुम क्यों आई
तनहाई, तुम इस जीवन में
बिना बुलाए आई क्यों?
मन तो मन के साथ-साथ था
तुमने सेंध लगाई क्यों?
क्या तुम इतना नहीं जानती
साथ सुहानी कुदरत है।
खिलती कलियाँ, हँसता गुलशन
फूल पात हैं, जल कण हैं।
महक हवा की साथ साथ थी
तूफाँ बनकर आई क्यों?
किसने कहा अकेले हैं हम।
कैसे तुमने मान लिया?
ढलता सूरज, झुकता अम्बर
नौका सागर सब कुछ था।
अंतर्घट यह भरा हुआ था
अगम रिक्तता लाई क्यों?
वापस जाओ, इस जीवन में
तेरी कोई
tanahaaee, tum is jeewan men
binaa bulaae aaee kyon?
man to man ke saath-saath thaa
tumane sendh lagaaee kyon?
kyaa tum itanaa naheen jaanatee
saath suhaanee kudarat hai
khilatee kaliyaan, hansataa gulashan
phool paat hain, jal kan hain
mahak hawaa kee saath saath thee
toophaan banakar aaee kyon?
kisane kahaa akele hain ham
kaise tumane maan liyaa?
dhalataa sooraj, jhukataa ambar
naukaa saagar sab kuch thaa
antarghat yah bharaa huaa thaa
agam riktataa laaee kyon?
waapas jaao, is jeewan men
teree koee
तनहाई, तुम इस जीवन में
बिना बुलाए आई क्यों?
मन तो मन के साथ-साथ था
तुमने सेंध लगाई क्यों?
क्या तुम इतना नहीं जानती
साथ सुहानी कुदरत है।
खिलती कलियाँ, हँसता गुलशन
फूल पात हैं, जल कण हैं।
महक हवा की साथ साथ थी
तूफाँ बनकर आई क्यों?
किसने कहा अकेले हैं हम।
कैसे तुमने मान लिया?
ढलता सूरज, झुकता अम्बर
नौका सागर सब कुछ था।
अंतर्घट यह भरा हुआ था
अगम रिक्तता लाई क्यों?
वापस जाओ, इस जीवन में
तेरी कोई