कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३० / २०४ № 30 of 204 रचना ३० / २०४
१३ जनवरी २०१४ 13 January 2014 १३ जनवरी २०१४

नई सदी में ज़रा सोचिए naee sadee men zaraa sochie नई सदी में ज़रा सोचिए

कल पुर्जों पर ही यह जीवन,

यदि मानव का निर्भर होगा।

नई सदी में ज़रा सोचिए,

जीना कितना दुष्कर होगा।

यंत्रों की हो रहीं खेतियाँ,

खाद-बीज निर्जीव सभी हैं

फल क्यों जीवित हमें मिलेंगे, अगर जीन ही जर्जर होगा?

रोटी, शिक्षा, रोजगार,

घर, मूल समस्याएँ जन-जन की

मिलकर सब जन अगर विचारें,

समाधान भी बेहतर होगा।

कल पर ही क्यों नज़रें होतीं, काल

कभी कहकर आया है?

आज अगर यह अवसर खोया,

महाप्रलय का मंजर होगा।

मूढ़ खिवैया,

डगमग नैया, बीच भँवर में फँसी बेबसी

होश तभी आएगा शायद,

जब पानी सिर ऊपर होगा।

हुक्मरान ने उलझाया है,

हर हिसाब को जाल बिछाकर

सुलझेंगे तब मसले सारे,

जब हर एक जन साक्षर होगा।

शिक्षित हाथों में हल लेकर,

सिंचित हो यदि श्रम की खेती

खेत-खेत उपजेगा सोना,

हरा गाँव का हर घर होगा।

संकल्पों की थाम लेखनी,

लेख उकेरें पाषाणों पर

जो लिक्खेंगे आज ‘कल्पना’ वही मील का पत्थर होगा।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

kal purjon par hee yah jeewan,

yadi maanaw kaa nirbhar hogaa

·

naee sadee men zaraa sochie,

jeenaa kitanaa dushkar hogaa

·

yantron kee ho raheen khetiyaan,

khaad-beej nirjeew sabhee hain

·

phal kyon jeewit hamen milenge, agar jeen hee jarjar hogaa?

·

rotee, shikshaa, rojagaar,

ghar, mool samasyaaen jan-jan kee

·

milakar sab jan agar wichaaren,

samaadhaan bhee behatar hogaa

·

kal par hee kyon nazaren hoteen, kaal

kabhee kahakar aayaa hai?

·

aaj agar yah awasar khoyaa,

mahaapralay kaa manjar hogaa

·

mooढ़ khiwaiyaa,

dagamag naiyaa, beech bhanvar men phansee bebasee

·

hosh tabhee aaegaa shaayad,

jab paanee sir oopar hogaa

·

hukmaraan ne ulajhaayaa hai,

har hisaab ko jaal bichaakar

·

sulajhenge tab masale saare,

jab har ek jan saakshar hogaa

·

shikshit haathon men hal lekar,

sinchit ho yadi shram kee khetee

·

khet-khet upajegaa sonaa,

haraa gaanv kaa har ghar hogaa

·

sankalpon kee thaam lekhanee,

lekh ukeren paashaanon par

·

jo likkhenge aaj ‘kalpanaa’ wahee meel kaa patthar hogaa

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

कल पुर्जों पर ही यह जीवन,

यदि मानव का निर्भर होगा।

नई सदी में ज़रा सोचिए,

जीना कितना दुष्कर होगा।

यंत्रों की हो रहीं खेतियाँ,

खाद-बीज निर्जीव सभी हैं

फल क्यों जीवित हमें मिलेंगे, अगर जीन ही जर्जर होगा?

रोटी, शिक्षा, रोजगार,

घर, मूल समस्याएँ जन-जन की

मिलकर सब जन अगर विचारें,

समाधान भी बेहतर होगा।

कल पर ही क्यों नज़रें होतीं, काल

कभी कहकर आया है?

आज अगर यह अवसर खोया,

महाप्रलय का मंजर होगा।

मूढ़ खिवैया,

डगमग नैया, बीच भँवर में फँसी बेबसी

होश तभी आएगा शायद,

जब पानी सिर ऊपर होगा।

हुक्मरान ने उलझाया है,

हर हिसाब को जाल बिछाकर

सुलझेंगे तब मसले सारे,

जब हर एक जन साक्षर होगा।

शिक्षित हाथों में हल लेकर,

सिंचित हो यदि श्रम की खेती

खेत-खेत उपजेगा सोना,

हरा गाँव का हर घर होगा।

संकल्पों की थाम लेखनी,

लेख उकेरें पाषाणों पर

जो लिक्खेंगे आज ‘कल्पना’ वही मील का पत्थर होगा।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗