कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना २ / १६३ № 2 of 163 रचना २ / १६३
२ नवम्बर २०१२ 2 November 2012 २ नवम्बर २०१२

कहलाऊँ तेरा सपूत kahalaaoon teraa sapoot कहलाऊँ तेरा सपूत

तुमने सब कुछ मुझे दे दिया

मुझपर हक़ है तेरा माँ!

कर्जदार हूँ पावन पय का

फर्ज़ शेष है मेरा माँ।

हर मंदिर था शीश झुकाया

हर मज़ार मन्नत मानी।

जननी, तेरे अन्तर्मन की

थाह भला किसने जानी।

पुत्रवती बनने करती

हर देवालय का फेरा माँ!

मुझको पाकर धन्य कहाई

धन्य भाव है तेरा माँ।

घंटों दिनों व बरसों कैसे

मुझको गोद उठाया था।

अडिग,अथक, तुमने तपस्विनी

हर पल गले लगाया था।

मुझे

tumane sab kuch mujhe de diyaa

mujhapar haq hai teraa maan!

karjadaar hoon paawan pay kaa

pharz shesh hai meraa maan

·

har mandir thaa sheesh jhukaayaa

har mazaar mannat maanee

jananee, tere antarman kee

thaah bhalaa kisane jaanee

·

putrawatee banane karatee

har dewaalay kaa pheraa maan!

mujhako paakar dhany kahaaee

dhany bhaaw hai teraa maan

·

ghanton dinon w barason kaise

mujhako god uthaayaa thaa

adig,athak, tumane tapasvinee

har pal gale lagaayaa thaa

·

mujhe

तुमने सब कुछ मुझे दे दिया

मुझपर हक़ है तेरा माँ!

कर्जदार हूँ पावन पय का

फर्ज़ शेष है मेरा माँ।

हर मंदिर था शीश झुकाया

हर मज़ार मन्नत मानी।

जननी, तेरे अन्तर्मन की

थाह भला किसने जानी।

पुत्रवती बनने करती

हर देवालय का फेरा माँ!

मुझको पाकर धन्य कहाई

धन्य भाव है तेरा माँ।

घंटों दिनों व बरसों कैसे

मुझको गोद उठाया था।

अडिग,अथक, तुमने तपस्विनी

हर पल गले लगाया था।

मुझे

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗